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संयुक्त संघर्ष मोर्चा, मध्यप्रदेश ने जिलों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे

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एमएसपी पर खरीद की मांग, खाद की मूल्यवृद्धि वापस ले सरकार,भावान्तर एवम् फसल बीमा की बाकी राशि का भुगतान करने की मांग
कर्जा माफी एवं बिजली बिल माफी की मांग

       संयुक्त संघर्ष मोर्चा, मध्यप्रदेश द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि आज प्रदेश के विभिन्न जिलों में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले प्रदेश के विभिन्न किसान संगठनों द्वारा मुख्यमंत्री के नाम  ज्ञापन सौंपे गए।ज्ञापन में कहा गया है कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले देश के 550 किसान संगठनों द्वारा 146 दिन से किसान आंदोलन चलाया जा रहा हैं। मध्य प्रदेश के लगभग सभी जिलों में 3 किसान विरोधी कानूनों को रद्द करने, सभी कृषि उत्पादों की एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी देने और बिजली संशोधन बिल 2020 की वापसी को लेकर यह आंदोलन किया जा रहा है। 

      मुख्यमंत्री की ओर भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि कोरोना महामारी शहरों के साथ साथ गाँव मे भी फैल चुकी है। रोकथाम की सरकारी व्यवस्था चरमरा गई है। अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बैड, ऑक्सीजन, पीपीई किट, टेस्टिंग किट,  टीकाकरण तथा जरूरी रेमडेसिविर इंजेक्शन- दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है।  सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर्स, मेडिकल, पैरामेडिकल, नर्सिंग, लैब टेक्नीशियन स्टाफ की भर्ती की जाए तथा निजी अस्पतालों को सरकार अपने नियंत्रण में ले ताकि सभी कोरोना पीड़ितों के समुचित इलाज की व्यवस्था की जा सके। प्रदेश के सभी नागरिकों को निशुल्क वैक्सीन उपलब्ध कराने की मांग की गई है। 

         प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कारण कृषि मंडियां बंद है। प्रदेश के सभी जिलों में गेहूं की सीमित खरीदी की जा रही है। अपनी आवश्यक जरूरतों के अलावा बिजली बिल, बैंक का ऋण, कृषि लागत की बकाया राशि आदि के भुगतान के लिए किसान मंडियों में अपनी उपज बेचने जाने को मजबूर हैं जहां व्यापारी  एमएसपी से कम दामों पर खरीद कर किसानों से खुली लूट कर रहे है। एमएसपी से कम दाम पर खरीद करने वाले व्यापारियों को दण्डित किये जाने तथा किसानों के सभी उत्पादों की समर्थन मूल्य पर खरीद  सुनिश्चित करने की मांग की गई हैं।   

  ज्ञापन पत्र में छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड की तरह मध्यप्रदेश में भी 49 लघु वनोपजों की एमएसपी पर खरीद की मांग की गई है ताकि कोरोना लॉकडाउन के कारण संकट की  घड़ी में वनांचल के वनवासी-ग्रामीणों को  राहत मिल सके।        सब्जी, फल तथा दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के साथ ही समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र पर किसानों को बैठने, भोजन करने के लिए छायादार स्थान तथा शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराने की मांग की गई है।           

मुख्यमंत्री को स्मरण कराते हुए ज्ञापन में मांग की गई है कि उनकी सरकार ने 2019 की सोयाबीन की फसल का भावांतर तथा गेंहू पर बोनस देने का वादा किया था  लेकिन वह भी अभी तक किसानों को नहीं मिला है। वर्ष 2018  की खरीफ की फसल खराब हुई थी जिसकी  25 % राहत राशि किसानों को दी गई थी शेष 75% राशि अभी तक नही दी गई। 2019-20 की खरीफ की फसल अल्पवृष्टि एवं कीट व्याधि से नष्ट होने पर दो बार 33- 33%  राहत राशि दी गई शेष 34% राशि भी अभी तक नही दी गई है। किसानों को तत्काल फसल बीमा की राशि दिलाई जाए तथा कोरोना लाकडाउन में बागवानी, दूध उत्पादन करने वाले किसानों को हो रहे नुकसान का मुआवजा तत्काल देने की मांग की है।ज्ञापन में आगे  कहा गया है कि  गेंहू खरीद के मापदंडों में परिवर्तन कर दिया गया है । चमक विहीन कहकर किसानों को गेंहू खरीदी केंद्र से लौटा दिया जाता है। नये नियम के अनुसार नमी को 14% से 12% तक , फॉरेन मैटर 0.75% से 0.50% तक, कम क्षतिग्रस्त अनाज 4% से 2% तक, और सिकुड़े अनाज को 6% से 4%  तक सीमित कर दिया गया है। किसानों का गेंहू इन मापदंडों पर खरा नही उतरता है तो उसे प्राकृतिक आपदा से प्रभावित फसल मानकर फसल बीमा का भुगतान किया जाए तथा सैम्पल के नाम पर लूट बंद की जाए । किसानों से हम्मालों के माध्यम से सफाई के नाम पर बिक्री के समय लगभग 20 किलो अनाज की लूट पर रोक लगाने की मांग की गई।       

   कर्ज माफी के मुद्दे पर ज्ञापन पत्र में कहा गया कि कांग्रेस की सरकार ने दो लाख रुपये तक की कर्ज माफी की योजना लागू की थी जिसे आपकी सरकार ने बंद कर दिया है। सभी किसानों के समस्त कर्जे माफ किये जाएं।     उपार्जन केन्द्रों पर गेहूं का बिल बनाते समय कर्ज की राशि काट कर बिल बनाया जा रहा है जो एक अन्यायपूर्ण होने के साथ साथ गैरकानूनी भी  है जबकि  किसान नियमानुसार 31 जून तक कर्ज लौटा सकता है उसे डिफॉल्टर नही माना जा सकता।   

   बिजली विभाग की अवैध बिज़ली बिल वसूली और लापरवाही पर रोक लगाई जाने के मुद्दे पर ज्ञापन पत्र में  कहा गया है कि  बिजली विभाग 3 हॉर्स पावर के मोटर पंप का 5 हॉर्स पावर तथा 5 हॉर्स पावर के मोटर पंप का 7.5 हॉर्स पावर का अवैध बिल वसूला जा रहा है। इस पर तत्काल रोक लगाने और बिजली बिल माफी की मांग की गई है। बिजली विभाग की लापरवाही से करंट की चपेट में आकर किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके परिजन को पांच लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान है लेकिन विभाग पूरी क्षतिपूर्ति राशि पीड़ित परिवार को नहीं देता है। जान माल के नुकसान पर  तत्काल मुआवजा  पीड़ित परिवार को दिए जाने की मांग की गई।
     ज्ञापन पत्र में रासायनिक उर्वरकों (डीएपी 1200 से 1900 रूपये  50 कि.ग्रा.के बैग पर )की कीमतें बढ़ाई गई । बढ़ी हुई कीमते वापस ली जाने, सभी जरूरतमंदों को मनरेगा में 200 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाने, प्रदेश में आगजनी से हुए फसल नुकसानी का मुआवजा शीघ्र दिलाये जाने तथा शुगर मिल मालिकों द्वारा गन्ना किसानों को गन्ने का तत्काल सम्पूर्ण राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए जाने की भी मांग की गई हैउल्लेखनीय है कि संयुक्त किसान मोर्चा ,मध्यप्रदेश में  अखिल भारतीय किसान सभा ,किसान जागृति संगठन ,अखिल भारतीय किसान महासभा ,भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक),क्रांतिकारी मजदूर संगठन ,भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन ,अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा ,ऑल इंडिया खेत मजदूर संगठन ,किसान संघर्ष समिति – नर्मदा बचाओ आंदोलन ,टोको, रोको, ठोको क्रांतिकारी मोर्चा आम किसान युनियन ,सीटू  श्रमिक जनता संघ- जागृत आदिवासी दलित संगठन आदि संगठन शामिल हैं।

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