नई दिल्ली पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों में BJP चार राज्यों में सत्ता बरकरार रखने में कामयाब रही है। यूपी, उत्तराखंड और मणिपुर में वह लगातार दूसरी बार सत्ता में आई है। गोवा में उसकी हैट्रिक है। उधर, पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया है।
मोदी और योगी ने उत्तर प्रदेश में वो कर दिखाया, जो 37 साल में कोई पार्टी नहीं कर सकी.. लगातार दूसरी बार सत्ता में भाजपा की वापसी। करीब ढाई सौ से ज्यादा सीटें जीत चुकी भाजपा बहुमत से काफी आगे निकल चुकी है। अगले कुछ घंटों में इसमें इजाफा ही होना है।
सपा सवा सौ में सिमट गई है। कांग्रेस और बसपा साफ ही हो गई हैं। पूरा यूपी नापने वाली प्रियंका गांधी की पुरजोर मेहनत के बावजूद खाली दो सीटें आईं। मायावती इससे भी आधे यानी एक सीट ही हासिल कर पाएंगी।
भाजपा की जीत ऐतिहासिक थी तो जश्न भी उसी अंदाज में मना। शाम करीब साढ़े पांच बजे योगी लखनऊ पार्टी दफ्तर पहुंचे। गुलाल उड़ाकर होली खेली और बोले, “जब मोदी जैसा नेतृत्व हो तो ऐसा ही बहुमत मिलता है।’ (जीत के जोश में और भी बातें बोले, पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…)
जश्न लखनऊ से दिल्ली तक मनाया गया। प्रधानमंत्री मोदी जब शाम साढ़े सात बजे भाजपा मुख्यालय पहुंचे तो फूल बरसाए गए। माला पहनाई गई। मोदी बोले- भाजपा को चारों दिशाओं से आशीर्वाद मिल रहा है। यूपी से इतना प्यार मिला कि मैं अब यूपीवाला हो गया। (मोदी की पूरी स्पीच पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… )
जीत और जश्न के बीच आंकड़ों ने एक कड़वी हकीकत भी बताई। भाजपा भले दूसरी बार जीती, लेकिन परफॉर्मेंस पिछली बार के मुकाबले गिर गई। 2017 में 312 सीटें मिलीं थी तो इस बार पार्टी 275 तक पहुंच पा रही है। सपा भले ही सत्ता में नहीं आई, लेकिन 75 से ज्यादा सीटों का फायदा उसे हो रहा है। भाजपा के डिप्टी सीएम केशव मौर्य और बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी जैसे धुरंधर भी हार गए।
उत्तर प्रदेश चुनाव रिजल्ट/ रुझान अपडेट्स…
| पार्टी | आगे | जीते |
| भाजपा | 01 | 272 |
| सपा | 01 | 124 |
| कांग्रेस | 00 | 02 |
| बसपा | 00 | 01 |
| अन्य | 00 | 02 |
उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक बहुमत के बाद योगी आदित्यनाथ भारी हुजूम के बीच लखनऊ दफ्तर पहुंचे। करीब पौने छह बजे वे मंच पर पहुंचे और साथी मंत्रियों-पदाधिकारियों के साथ गले मिले और जमकर गुलाल उड़ाया। विजयी भाषण भी दिया। बोले- जब मोदी जी जैसा नेतृत्व हो तो ऐसा ही प्रचंड बहुमत मिलता है। विजयी उल्लास से शुरू हुआ ये 30 मिनट का कार्यक्रम जय श्री राम के नारों के साथ खत्म हुआ।
1980 से 2022 तक उत्तर प्रदेश में भाजपा और अन्य पार्टियों की जीती हुई सीटों का ग्राफ।
लखनऊ में 10 मिनट के संक्षिप्त भाषण में योगी बोले- भाजपा ने चार राज्यों में चुनाव जीते हैं। उत्तर प्रदेश पर विशेष रूप से देश और दुनिया की निगाहें थीं। जब मोदी जी कोरोना और भ्रष्टाचार से लड़ रहे थे, तब कुछ लोग भ्रामक प्रचार कर रहे थे। मतगणना के बारे में भ्रामक बातें कही जा रही थीं। उत्तर प्रदेश की जनता ने उस प्रचार को नकारते हुए भाजपा को बहुमत दिया है। जनता का आभार। ये बहुमत राष्ट्रवाद, सुरक्षा, विकास और सुशासन के मॉडल को जनता का आशीर्वाद है।
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दिग्गजों के किले हुए ध्वस्त, कांग्रेस अध्यक्ष भी हारे
चुनाव से पहले अखिलेश का हाथ थामने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य फाजिलनगर में हार गए। TET पेपर लीक में घिरे योगी के मंत्री सतीश द्विवेदी सिद्धार्थनगर की इटवा सीट नहीं जीत पाए। कैराना में भी भाजपा को हार मिली, यहां सपा के नाहिद हसन जीते। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू को कुशीनगर में हार मिली।
2017 की मोदी लहर में चमके फायर ब्रांड योगी
यूपी में 37 साल से किसी पार्टी की सरकार रिपीट नहीं हुई, 4 और राज्यों में यही ट्रेंड
37 साल से यूपी में किसी पार्टी की लगातार दूसरी बार सरकार नहीं बनी। 1985 में कांग्रेस लगातार दूसरी बार यहां चुनाव जीती थी। इस सरकार का टर्म पूरा होने के अगले करीब 19 सालों तक राज्य में हंग असेंबली रही। 2007 से हर 5 साल बाद सरकार बदली है। पहले मायावती फिर अखिलेश और फिर योगी सीएम बने। इस बार फिर भाजपा सरकार बनाने जा रही है। उत्तर प्रदेश में 37 साल में पहली बार ऐसा होगा। देश में कर्नाटक, उत्तराखंड, हिमाचल और राजस्थान में भी लंबे अरसे से हर बार सरकार बदलने का ट्रेंड है।
चुनावी वादे और उनका हाल, भाजपा-सपा-कांग्रेस सभी पार्टियां इन्हें भूल जाती हैं भाजपा ने UP में 16 पेज का ‘लोक कल्याण संकल्प पत्र’ जारी किया है। इसमें 5वें पेज से 12वें तक घोषणाएं हैं। इन 7 पेज में 10 मुद्दों पर 130 ऐलान किए गए। इनमें लड़कियों को मुफ्त स्कूटी, महिलाओं को 2 LPG सिलेंडर, मुफ्त बिजली और लव जिहाद पर लगाम जैसे वादे किए गए हैं। अब जरा पिछले यानी 2017 के वादों की बात करें तो 28 जनवरी 2017 को भाजपा मेनिफेस्टो लाई थी। इसमें 10 विषयों पर करीब 100 वादे थे। भाजपा का दावा है कि सारे वादे पूरे हो गए। 7 बड़े ही जरूरी वादों का एनालिसिस किया तो पता चला कि 3 में 1% काम भी योगी सरकार में नहीं हुआ और 4 पर 10% से भी कम काम हो सका। (इस एनालिसिस को पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें…)
सपा ने वोटिंग से ठीक 40 घंटे पहले सपा मेनिफेस्टो का ऐलान किया। कुल 88 पेज, 22 विषय और 1000 से ज्यादा वादे। सबसे अहम वादों का एनालिसिस किया तो पता चला सवा करोड़ लैपटॉप देने का वादा किया है। जब सरकार थी तब 6 लाख दिए थे। 300 यूनिट बिजली मुफ्त का वादा, सरकार थी तो विभाग घाटे में था। स्कूलों को टेबल-कुर्सी से लैस करने की बात कही। जब सरकार थी तो 68 हजार स्कूल में बेंच नहीं थी।
कांग्रेस ने वोटिंग से 18 घंटे पहले अपना मेनिफेस्टो जारी किया। वादा किया कि कोरोना प्रभावित परिवार को 25 हजार रुपए की मदद की जाएगी। जबकि, योगी सरकार 50 हजार रुपए की मदद पहले से कर रही है। ठीक इसी तरह वृद्धा और विधवा पेंशन 1000 रुपए करने की बात कही। योगी सरकार ने पेंशन को दिसंबर 2021 में ही 1000 कर दी है। दो लाख शिक्षकों की भर्ती का वादा किया, अभी खाली पद ही महज 73 हजार हैं।
सत्ता के इस संघर्ष में सबसे बड़े सियासी सिपहसालार
यूपी में नेताओं के बयान, पार्टियों की कैंपेनिंग, उनकी रणनीति कितनी काम आई, ये तो नतीजों से साफ हो गया है। आप जान लीजिए उन चेहरों को जो सामने नहीं आए, लेकिन हर कदम-हर चाल के पीछे दिमाग उनका ही था। ये हैं पार्टियों के सिपहसालार, जिन्हें स्ट्रैटजी तैयार की और उसे जमीन पर उतारा।
भास्कर डेमोक्रेसी वॉल: यूपी के युवाओं का झुकाव NOTA की तरफ
दैनिक भास्कर ने यूपी के 5 अलग-अलग शहरों में अपनी डेमोक्रेसी वॉल खड़ी की। इसके पीछे हमारा मकसद था कि चुनाव के दौरान युवाओं और आम लोगों को अपनी बात रखने का एक मौका मिल पाए। हम उन तक पहुंचे और वॉल पर लिखी उनकी बातों को एक-एक कर लाखों लोगों तक पहुंचाया भी। एक अहम बात जो इस डेमोक्रेसी वॉल के जरिए पता चली, वो ये कि युवाओं का झुकाव नोटा की तरफ ज्यादा है।
एनालिसिस: पहली बार माया का दलित भाजपा के पाले में, सपा से जितना नुकसान…बसपा के वोटों ने उससे ज्यादा भरपाई कर दी
उत्तर प्रदेश में BJP की जीत के पीछे कुछ विरोधी दलों की रणनीति भी जिम्मेदार है। जैसे- यहां बसपा ने 122 सीटों पर ऐसे उम्मीदवार खड़े किए, जो सपा के उम्मीदवार की ही जाति के थे। इससे वोट बंट गए। सपा खुद को मुस्लिम सरपरस्त पार्टी की छवि से बाहर नहीं निकाल पाई। वह भाजपा के हिन्दुत्व का काट नहीं खोज पाई। उसके हिंदू वोटर छिटक गए। मोदी-योगी ने लगातार हर चीज को हिन्दुत्व से जोड़ा। इससे वे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण करने में भी कामयाब रहे।
पंजाब: AAP ने चौंकाया, अब 2 राज्यों में उसकी सरकार
पंजाब में AAP ने अपने प्रदर्शन से चौंका दिया है। वह 92 सीटों पर जीती है। उसे पिछली बार सिर्फ 20 सीटें मिली थीं। AAP के CM कैंडिडेट भगवंत मान ने 45 हजार वोटों से रिकॉर्ड जीत दर्ज की है। यहां CM चरणजीत सिंह चन्नी, कांग्रेस से अलग हुए पूर्व CM अमरिंदर सिंह और कांग्रेस के नवजोत सिंह सिद्धू चुनाव हार गए। हैं। सिद्धू ने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। अब दिल्ली के बाद पंजाब दूसरा राज्य है, जहां AAP की सरकार बनाने जा रही है।
एनालिसिस: आप गारंटी कार्ड लेकर घर-घर पहुंची; गांवों में नए और शहरों में दूसरे दलों से लाकर जनाधार वाले कैंडिडेट उतारे
पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की जीत उसकी चुनावी रणनीति की कामयाबी है। चुनाव नजदीक आते ही आप ने मुद्दों से कैंपेन शुरू किया। अच्छे सरकारी स्कूल और बेहतर अस्पताल की बात की। फिर 400 यूनिट मुफ्त बिजली और 18 साल से बड़ी हर महिला को प्रतिमाह एक-एक हजार रुपए देने की घोषणा कर दी। इसके बाद एक कदम आगे बढ़कर घर-घर से गारंटी कार्ड भरवाए।
गोवा: BJP की हैट्रिक, AAP के CM फेस को ही हार मिली
देश के सबसे छोटे राज्य गोवा में BJP लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। यहां 40 सीटों में से उसे 20 पर जीत हासिल हुई। उसे 3 निर्दलीयों और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (MGP) के 2 विधायकों ने समर्थन दे दिया है। इस तरह उसका आंकड़ा 25 हो गया है जो बहुमत से 4 ज्यादा है। कांग्रेस 11 सीटें ही जीत पाई। आम आदमी पार्टी (AAP) को पहली बार विधानसभा में एंट्री मिली है। उसके दो उम्मीदवार जीते हैं, लेकिन पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने जिस अमित पालेकर को CM का चेहरा बनाया था, वे ही चुनाव हार गए।
एनालिसिस: सिर्फ 77 वोट से भी जीते बीजेपी उम्मीदवार, ममता-केजरीवाल चुनाव नहीं लड़ते तो BJP को नुकसान होता
गोवा में BJP ने जो सीटें जीतीं, उनमें से कुछ पर जीत का अंतर 500 वोटों का भी नहीं है। इससे इस बात के साफ संकेत मिलते हैं कि एंटी BJP वोट विपक्षी पार्टियों के बीच बंट गए, जिसका सीधा फायदा BJP को मिला। इस बार कहा जा रहा था कि पर्रिकर के बिना BJP के लिए सरकार बनाना मुश्किल हो जाएगा, लेकिन पार्टी ने 2017 से भी अच्छा प्रदर्शन किया।
उत्तराखंड-मणिपुर: दोनों राज्यों में BJP को स्पष्ट बहुमत, देवभूमि में CM धामी हारे
उत्तराखंड में BJP ने 70 में से 48 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। उसे इस बार 9 सीटों का घाटा हुआ है। CM पुष्कर सिंह धामी भी करीब 7 हजार वोटों से चुनाव हार गए हैं। उधर, मणिपुर में BJP ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। वह 34 सीटें जीती है। उसे 13 सीटों की बढ़त मिली है। CM एन. बीरेन सिंह करीब 16 हजार वोटों से जीते हैं।
एनालिसिस: हर चुनाव में सरकार बदलने वाली परंपरा टूटी, जानें जीत की 5 वजहें, हार गए धामी और हरीश
उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव पर स्थानीय और राष्ट्रीय कई मुद्दों का असर साफ दिखा। पहाड़ में मोदी फैक्टर हावी रहा, तो मैदानी इलाकों में महंगाई और किसान आंदोलन जैसे मुद्दों ने अपना असर दिखाया। अलग राज्य बनने के बाद पांच साल कांग्रेस और पांच साल भाजपा सरकार रहने की परंपरा भी टूटी है। प्रदेश में पहली बार भाजपा की सरकार रिपीट हो रही है।

