इंदौर और उज्जैन के बीच बन रही छह लेन की सड़क की गुणवत्ता को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया गया था कि यह सड़क प्लास्टिक के सरिए से बन रही है. इसके बाद ही 6 लेन की यह रोड विवादों में आ गई. लेकिन अब मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम की तरफ से इस पर सफाई सामने आई है और उनकी तरफ से इस तरह के दावों को गलत बताया गया है.इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन हाइवे के निर्माण में सोशल मीडिया पर प्लास्टिक के सरिए के इस्तेमाल का दावा किया गया था, जो गलत निकला है. क्योंकि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के द्वारा बताया गया है कि सड़क बनाने में स्टील के सरिए की जगह GFRP का इस्तेमाल हो रहा है. जो काफी हल्का होता है और इसमें कभी भी जंग नहीं लगता है.
GFRP नाम की सामग्री से बनाई जा रही सड़क
मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने मंगलवार ने सफाई देते हुए सोशल मीडिया पर चल रही रील में किए गए दावों को भ्रामक बताया और कहा कि यह सड़क प्लास्टिक के सरिए से नहीं, बल्कि ‘ग्लास फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीमर (GFRP)’ नाम की सामग्री से बनाई जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि आमतौर पर ‘फाइबर ग्लास’ कहे जाने वाले जीएफआरपी में कांच के महीन रेशे और पॉलीमर रेजिन होते हैं, जो हल्का, मजबूत होता है और यह टिकाऊ भी होता है.
रील में बताए दावों को बताया गया गलत
मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंधक गणेश भाभर ने कहा कि इंदौर और उज्जैन के बीच सड़क बनाने में स्टील के सरिए की जगह GFRP का इस्तेमाल हो रहा है. उन्होंने कहा कि पिछले दो दिन से सोशल मीडिया पर इस सड़क में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं. रील में दावा किया गया कि सड़क में प्लास्टिक के सरिए का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन यह सही नहीं है.
GFRP में कभी नहीं लगता है जंग
गणेश भाभर ने बताया कि स्टील के सरिए में जल्दी जंग लग सकता है, जबकि GFRP में कभी जंग नहीं लगता. उन्होंने कहा कि स्टील का सरिया भारी होता है, लेकिन जीएफआरपी बहुत हल्का है. भले ही इसका वजन कम है, लेकिन इसमें खिंचाव सहने की ताकत स्टील से ज्यादा है.

