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*लोकसभा में गूंजा वंदे मातरम; ओम बिरला बोले- भारत की आत्मा, संस्कृति और शक्ति का शाश्वत प्रतीक*

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वंदे मातरम पर चर्चा में प्रियंका ने सरकार घेरा; राजनाथ ने बताया इतिहास

लोकसभा में सोमवार को वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय गीत पर एक दिवसीय विशेष चर्चा आयोजित की गई। सदन के प्रारंभ में स्पीकर ओम बिरला ने वंदे मातरम को भारत की आत्मा, एकता, संस्कृति और अदम्य शक्ति का जीवंत प्रतिबिंब बताया। ओम बिरला ने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत आज भी हर भारतीय के हृदय में गहराई से बसता है। उन्होंने कहा इसके हर शब्द में भारत की प्रकृति, मातृत्व, सौंदर्य और शक्ति की अद्वितीय एकता झलकती है।

आज संसद के शीतकालीन सत्र का आठवां दिन है। राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद में विस्तार से चर्चा होगी। इस गीत के ऐतिहासिक महत्व पर लोकसभा में होने वाली चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। राज्यसभा में इस पर मंगलवार को चर्चा होगी, जिसकी शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। आज की कार्यवाही शुरू होने पर राज्यसभा में पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल को श्रद्धांजलि दी गई। लोकसभा में प्रश्नकाल के बाद पीएम मोदी ने वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर अपना वक्तव्य रखा। 

नए भारत की पीढ़ियों तक पहुंचानी होगी इसकी प्रेरक ऊर्जा- ओम बिरला
स्पीकर ओम बिरला ने याद दिलाया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम ने करोड़ों भारतीयों में आजादी का सपना जगाया और असंख्य क्रांतिकारियों ने फांसी और अत्याचारों का सामना करते हुए भी इस गीत को अपना संबल बनाया। सदन में मेज थपथपाकर सदस्यों ने इस ऐतिहासिक चर्चा का स्वागत किया। ओम बिरला ने कहा कि यह बहस सिर्फ एक औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक स्मृति और राष्ट्रभावना को जागृत करने का अवसर है।

‘नेहरू और कांग्रेस के नाम का बार-बार जिक्र किया’
लोकसभा में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर चर्चा हुई। इस चर्चा के दौरान, सदन में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की यह आदत है कि जब भी वह किसी मुद्दे पर बोलते हैं तो भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू और कांग्रेस का जिक्र करते रहते हैं। उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान उन्होंने नेहरू का नाम 14 बार और कांग्रेस का नाम 50 बार लिया। जब संविधान की 75वीं सालगिरह पर चर्चा हुई, तो नेहरू का नाम 10 बार और कांग्रेस का नाम 26 बार लिया गया।’

‘नेताजी-टैगोर की कद्र नहीं करते…’ वंदे मातरम बहस पर सीएम ममता बनर्जी का भाजपा पर तीखा हमला

ममता बनर्जी ने कहा मैंने सुना कि भाजपा के कुछ लोग कह रहे हैं कि वे नेताजी की सराहना नहीं करते। तो बताइए, आप नेताजी, टैगोर और राजाराम मोहन राय को सम्मान नहीं देते, फिर किसे देते हैं?

’भगवद्गीता पाठ से अनुपस्थित रहने पर बोलीं ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में हुए भगवद्गीता पाठ कार्यक्रम में न जाने के फैसले पर सफाई देते हुए कहा कि वह इसलिए नहीं गईं क्योंकि यह कार्यक्रम भाजपा से जुड़ा हुआ था। संतनन संस्कृति संसद की ओर से रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में लाखों लोग पहुंचे थे, जिसे 2026 विधानसभा चुनाव से पहले हिंदू पहचान के बड़े प्रदर्शन के तौर पर देखा गया।

एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा अगर कार्यक्रम निष्पक्ष होता, तो मैं जरूर जाती। मैं एक राजनीतिक दल से जुड़ी हूं और एक विचारधारा का पालन करती हूं। मैं हर धर्म और हर समुदाय का सम्मान करती हूं। लेकिन जिस कार्यक्रम से भाजपा सीधे जुड़ी हो, उसमें मैं कैसे जा सकती हूं? उन्होंने कहा मैं ऐसे आयोजनों में शामिल नहीं होती जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अपमान होता हो या महात्मा गांधी के सिद्धांतों का पालन न किया जाता हो। मेरे माता-पिता ने मुझे यह शिक्षा 

वंदे मातरम पर चर्चा में प्रियंका ने सरकार घेरा; राजनाथ ने बताया इतिहास

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा बोले- वंदे मातरम को महज साहित्य और राष्ट्रगीत के दायरे में नहीं बांध सकते। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम ने पूरे देश को एक सूत्र में बांधने का काम किया। देश के आध्यात्मिक इतिहास में इसका योगदान अद्वितीय है।उत्तर प्रदेश की फैजाबाद लोकसभा सीट से निर्वाचित समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित विस्तृत चर्चा में भाग लिया। उन्होंने 25 नवंबर को अयोध्या के राम मंदिर में ध्वजारोहण कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा, हमें आज तक समझ नहीं आया कि उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने का पास क्यों नहीं दिया गया, मेरी अनदेखी क्यों की गई? अवधेश प्रसाद ने कहा कि ये घटना दिखाती है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के लोगों का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम का संदेश भी इस घटना के कारण अधूरा लगता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जिस चर्चा की शुरुआत की है, इसमें शामिल होकर अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि इंसानों को पेशाब पिलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, ये धरती किसी दूसरे की नहीं है।

रक्षा मंत्री ने पंडित नेहरू और कांग्रेस पर तुष्टीकरण के आरोप लगाए

कम्युनिस्ट विचारधारा से जन्मे वामपंथी चरमपंथ के कारण न जाने कितनी पीढ़ियां बर्बाद हो गईं। देश के कई हिस्से विकास में पीछे रह गए। पहले की सरकारें नक्सलवाद या वामपंथी उग्रवाद की इस समस्या का समाधान नहीं ढूंढ सकीं। पीएम मोदी ने इसका समाधान खोजा और आज उनके नेतृत्व में वामपंथी चरमपंथ अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

राजनाथ सिंह ने कहा, ये कितनी बड़ी विडंबना है कि जिस कम्युनिस्ट विचारधारा ने कई देशों में सत्ता पाने की हिंसा का रास्ता चुना, उसे खतरा न मानकर वसुधैव कुटुंबकम की भावना में विश्वास रखने वाली विचारधारा को खतरा माना गया। ये कोई मामूली सोच नहीं, बल्कि ऐसा पूर्वाग्रह था, जिससे तुष्टीकरण की राजनीति को जन्म मिला और कुछ पड़ोसी देशों से आए अल्पसंख्यक समुदाय के शरणार्थियों को दशकों तक अपने अधिकारियों से वंचित रखा गया। इसी के कारण मुस्लिम महिलाओं से समान अधिकार छीने गए। इसी तुष्टीकरण की राजनीति के कारण देश का विभाजन हुआ और आज पश्चिम बंगाल के अनेक परिवारों को पलायन करना पड़ रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने भाषण के दौरान पंडित नेहरू से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने एक किताब के हवाले से इतिहास की घटना का जिक्र करते हुए कहा, पंडित नेहरू की मौजूदगी में विदेश मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक में उनसे पूछा गया कि अगर कल को कम्युनिस्ट केंद्र की सत्ता में आ जाएं तो सरकारी तंत्र का क्या होगा? नेहरू जी ने झुंझलाकर जवाब दिया। कम्युनिस्ट-कम्युनिस्ट भारत के लिए खतरा कम्युनिज्म नहीं है। खतरा हिंदू दक्षिणपंथी कम्युनलिज्म है। 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के राष्ट्रगीत- वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान इस रचना को देश की आत्मा का गीत बताया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम और आनंदमठ कभी भी इस्लाम विरोधी नहीं रहे। आनंदमठ के प्रसंगों को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि ये देश के इतिहास और वर्तमान दोनों से जुड़ा है। उन्होंने बंकिम चंद्र चटोपाध्याय की रचना का मूल्यांकन करने की बात कहते हुए कहा, वंदे मातरम की मूल रचना में भारत की विशेषताओं को दिखाया गया है। उन्होंने कहा, वंदे मातरम से जिन पंक्तियों को हटाया गया उन्हें केवल जिन्ना के नजरिए से देखने पर ही सांप्रदायिक और राजनीतिक कहा जा सकता है।

राजनाथ सिंह ने बंगाल की संस्कृति का जिक्र करते हुए वंदे मातरम की पंक्तियों की व्याख्या भी की। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चटोपाध्याय की इस रचना में कहीं भी मूर्ति पूजा पर जोर नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को तुष्टीकरण के लिए इस्तेमाल किया गया। राजनाथ सिंह ने वर्तमान सरकार के नारे- सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास का जिक्र करते हुए कहा, हमने इसी भावना से काम किया है। हालांकि, आजादी के आंदोलन के दौरान कांग्रेस के कुछ तथाकथित सेक्युलर लोगों की बेचैनी इतनी बढ़ गई थी कि उन्होंने भारतीय संस्कृति, परंपरा और महान सभ्यता से जुड़ी बातें उन्हें सांप्रदायिक दिखती थीं। वंदे मातरम भी इसी का शिकार बन गया।

बिहार के RJD सांसद अभय कुमार सिन्हा ने भी चर्चा में भाग लिया

बिहार की औरंगाबाद लोकसभा सीट से निर्वाचित राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद अभय कुमार सिन्हा ने भी वंदे मातरम पर चर्चा में भाग लिया। उन्होंने कहा कि बिहार की धरती पर आज भी स्वतंत्रता आंदोलन की धड़कनों को महसूस किया जा सकता है।

केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रियंका से सवाल पूछा

केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रियंका गांधी के भाषण के अंशों पर सवाल किया। उन्होंने कहा, कांग्रेस सांसद को ये सिद्ध करना चाहिए कि ‘बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में वंदे मातरम के केवल दो स्टैंजा लिखे और सात साल के बाद 1882 में बाकी पांच स्टैंजा लिखे’ ये तथ्य इन्होंने कहां से लिए हैं। \

वंदे मातरम पर चर्चा: प्रियंका बोलीं- राष्ट्रगीत देश की रगों में, सरकार ध्यान भटकाना चाहती है

वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ध्यान भटकाना चाहती है। सत्ताधारी पक्ष के बताना चाहिए कि वे इतने अहंकारी क्यों हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा दिखावे की राजनीति करती है। चुनाव से चुनाव तक सियासत करने वाली ये पार्टी बेरोजगारी, युवाओं के मुद्दे और महंगाई जैसे विषयों पर चर्चा क्यों नहीं करनी चाहती। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए सवाल किया कि खुद को महापुरुषों से बड़ा बताना क्या उनका अपमान नहीं है? प्रियंका ने कहा कि कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम गाया जाता है।

विज्ञान, इसरो, डीआरडीओ और एम्स जैसी संस्थाओं के योगदान का जिक्र करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर इन्होंने ये नहीं बनाया होता तो भारत विकसित कैसे बनता। उन्होंने राष्ट्रनिर्माण में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के योगदान को रेखांकित करते हुए सरकार को सलाह भी दी। प्रियंका ने कहा, नेहरू जी को जितनी भी गालियां देनी हैं, जितने अपमान करने हैं उसकी एक सूची बना लेनी चाहिए।

सत्ताधारी खेमे की तरफ से बीते दिनों जारी की गई एक सूची का जिक्र करते हुए प्रियंका ने कहा स्पीकर की अनुमति से जितने भी घंटे की चर्चा जरूरी हो, हम बहस कर लेंगे। एक बार चर्चा के बाद इस अध्याय को बंद कर देना चाहिए। फिर बेरोजगारी और ऐसे तमाम जरूरी मुद्दों पर संसद में चर्चा की जाएगी।

प्रियंका ने सत्ताधारी दल और स्पीकर ओम बिरला की तरफ से टोके जाने पर कहा कि बिना तथ्यों के हम पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि संसद में इस बात पर चर्चा क्यों नहीं हो रही है कि महिलाओं की परिस्थितियों को सुधारने के लिए ठोस कदम कैसे उठाए जाएंगे। कांग्रेस सांसद ने कहा कि प्रदूषण, पेपरलीक जैसे मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जाता। हिम्मत है तो भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करें। अपने वक्तव्य के अंतिम हिस्से में प्रियंका ने कहा कि भाजपा इवेंट मैनेजमेंट की राजनीति करती है।

प्रियंका गांधी बोलीं- प्रधानमंत्री मोदी का आत्मविश्वास घटने लगा है

प्रियंका गांधी ने वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी का आत्मविश्वास घटने लगा है। प्रियंका ने पीएम मोदी के उद्धरण पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उन्होंने इस सदन के सामने गलत जानकारी सामने रखी है। सत्ताधारी खेमे की तरफ से टोके जाने पर प्रियंका ने उन पर कटाक्ष किया। प्रियंका ने कहा, ‘हम देश के लिए हैं, आप चुनाव के लिए हैं।’ कांग्रेस सांसद ने पीएम मोदी के अधूरे उद्धरण का जिक्र करते हुए कहा, चुनिंदा पंक्तियों का उल्लेख करना ठीक नहीं है।

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