प्रदीप मिश्रा
इंदौर|ये कैसी जिला न्यायिक प्रशासनिक व्यवस्था है कि जिला कलेक्टर ऑफिस के राजस्व विभागों मे बैठे तहसीलदार से लेकर एस डी एम न्यायालय मे पिछले 5 सालों से भी ज्यादा समय से मय दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ 35 एकड़ सरकारी पट्टे मे दी गई बेशकीमती जमीन को न सिर्फ उद्योगपति और निजी लोगों को बेच दिया गया वरन सरकारी पट्टे की जमीन का नामांतरण भी उद्योगपति और निजी लोगों के नाम पर कर दिया गया! का प्रकरण चल रहा है और आज तक उस 35 एकड़ सरकारी बेशकीमती जमीन के विक्रय और नामांतरण को अवैध घोषित कर निरस्त नहीं किया और न ही आरोपियों के ख़िलाफ़ कोई अपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया!?
*इंदौर शहर से लगा हुआ ग्राम असरावद बुजुर्ग, तहसील खुड़ेल के खसरा नंबर 271,272,263,और 363 की 35 एकड़ बेशकीमती क्रषी भूमि सन 1974 मे अनुसूचित जाति के गरीब लोगों की 14 सदस्यों की क्रषी सहकारी समिति को सरकारी पट्टे के तौर पर प्रदान की गई थी!*सन 1988 मे क्रषी सहकारी समिति के तत्कालीन स्व घोषित अध्यक्ष ने फर्जी और अवैधानिक तरीके से 14 सदस्यों की समिति में से मृतक 4 सदस्यों को हटाकर 10 सदस्यों की समिति में बदल दिया! और उपरोक्त सरकारी पट्टे की 35 एकड़ जमीन को 10 सदस्यों के नाम पर व्यक्तिगत पट्टे दिए जाने का आवेदन उप जिला पंजीयक के कार्यालय में दिया! दिनांक 20 जुलाई 1988 को अवैधानिक तरीके से उप जिला पंजीयक ने सभी 10 सदस्यों के पक्ष में व्यक्ती गत पट्टे देने का आदेश दे दिया!जबकि क्रषी सहकारी समिति को दिए गए सरकारी पट्टे मे 14 सदस्यों के नाम खसरे मे थे!मृतक 3 सदस्यों के वारिस पुत्रों सीताराम, कल्याण और फूलसिंह जब बालिग हुए और उन्हें इस बात का पता चला कि उनके पिता का नाम अवैध और फर्जी तरीके से क्रषी सहकारी समिति से हटा दिया गया और उनकी जगह पुत्र होने के नाते उनका नाम समिति मे नहीं चढ़ाया गया!! और उपरोक्त 35 एकड़ क्रषी भूमि को प्रकाश उद्योग और अन्य निजी लोगों को बेच दिया है!?*उपरोक्त अपराधिक और अवैधानिक कृत्य की शिकायत सीताराम, कल्याण सिंह और फूल सिंह द्वारा मुख्यमंत्री हेल्प लाइन के साथ तहसील न्यायालय खुड़ेल और एस डी एम खुड़ेल को की!
लेकिन पिछले 5 सालों से प्रकरण क्रमांक 04/अ – 6 अ/16 – 17 आज तक विचाराधीन है!? कलेक्टर साहेब अब आप बता दो की कब सीताराम, कल्याण सिंह और फूल सिंह को न्याय मिलेगा

