कर्नाटक के बागलकोट जिले में गन्ने के दाम को लेकर किसानों का प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया. किसानों की प्रमुख मांग 3,500 रुपये प्रति टन कीमत तय करने की थी, जबकि सरकार ने हाल ही की बैठक में 3,300 रुपये प्रति टन दर घोषित की थी. इस फैसले से नाराज प्रदर्शनकारी किसानों ने महालिंगपुरा के पास संगनाकट्टी क्रॉस इलाके में 50 से अधिक गन्ने से लदे ट्रैक्टरों को आग लगा दी. अनुमान है कि हजारों टन गन्ना जलकर खाक हो गया. प्रदर्शनकारी किसान सिद्दापुरा स्थित चीनी मिल को घेरने की कोशिश कर रहे थे. मिल के बाहर 200 से ज्यादा ट्रैक्टर खड़े थे, जिनमें से कई को आग के हवाले कर दिया गया. किसानों ने पिछले एक हफ्ते से विरोध जारी रखा था और गुरुवार को मुधोल कस्बे में पूरी बंदी की गई. इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई. केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सरकार को विफल बताया, जबकि विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा कि यह कांग्रेस सरकार की लापरवाही का सीधा नतीजा है. विपक्ष ने किसानों को हर संभव समर्थन देने का दावा किया है.
कर्नाटक के बागलकोट जिले में गन्ना किसानों का विरोध हिंसक हो गया। समर्थन मूल्य की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने 20 से ज्यादा ट्रैक्टरों को आग के हवाले कर दिया। पुलिस के दखल के बावजूद हालात बेकाबू रहे। किसान 3500 रुपये प्रति टन का समर्थन मूल्य तय करने और बकाया भुगतान की मांग पर अड़े हैं।
माना जा राह है कि किसान लंबे समय से प्रति टन 3500 रुपये का समर्थन मूल्य तय करने की मांग कर रहे हैं। फैक्ट्री मालिकों से बातचीत के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर गुस्साए किसानों ने हिंसक रूप ले लिया। उन्होंने सांगनट्टी क्रॉस इलाके में महालिंगपुर के पास गन्ना लदे ट्रैक्टरों को पलटकर आग के हवाले कर दिया। इस दौरान पुलिस ने हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
फैक्ट्री प्रबंधन पर गुस्सा और हंगामा
किसानों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिक उनकी बात सुनने के लिए मंच पर तक नहीं पहुंचे। इसी नाराजगी में किसानों ने फैक्ट्री गेट की ओर कूच किया और वहीं खड़े ट्रैक्टरों की लंबी कतार में आग लगा दी। फैक्ट्री परिसर के बाहर भी कई गन्ना लदे ट्रॉली खड़े थे जिन्हें प्रदर्शनकारियों ने पलट दिया। बताया गया कि आग इतनी तेज थी कि आस-पास का इलाका धुएं से भर गया।विज्ञापन
पुलिस की कार्रवाई और मौके की स्थिति
स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग के कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने की कोशिश की। हालांकि, कई ट्रैक्टर पूरी तरह जलकर खाक हो गए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि हालात फिर से बिगड़ें नहीं।
किसानों की मांगें और प्रशासन की प्रतिक्रिया
किसानों का कहना है कि जब तक बकाया भुगतान नहीं किया जाता और शुगर फैक्ट्रियों का संचालन फिर से शुरू नहीं होता, वे आंदोलन जारी रखेंगे। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर विचार किया जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार ने नुकसान का आंकलन करने और मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
प्रदर्शनकारियों को पुलिस हिरासत में लिया
: पुलिस ने कर्नाटक रक्षणा वेदिके (शिवरामगौड़ा गुट) के कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया, जो शुक्रवार को शहर में किसानों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। किसान गन्ने के लिए ₹3,500 प्रति टन की तय कीमत की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने सेंट्रल बस स्टैंड से रानी चेन्नम्मा सर्कल तक एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया और अपना गुस्सा दिखाने के लिए टायर जलाए। उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए और सड़क जाम करने के लिए इंसानी चेन बनाई।

जब पुलिस ने उन्हें विरोध खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने, तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस दौरान उनके बीच कहा-सुनी भी हुई। इस मौके पर नेता वाजिद हिरेकोडी, महंतेश रानागट्टी मठ और अन्य लोग मौजूद थे। ‘आपको ₹5 हज़ार देने चाहिए’ जिला कन्नड़ संगठनों की एक्शन कमेटी के अध्यक्ष अशोक चंदरागी ने मांग की, “किसानों का मौजूदा संघर्ष 1980 के दशक में नारगुंडा और नवलगुंडा में हुए संघर्ष की याद दिलाता है। गन्ने की हर टन पेराई से चीनी मिलों को अलग-अलग सोर्स से ₹14,000 की कमाई होती है। ऐसे में, किसानों की ₹3,500 की मांग पूरी करने में हिचकिचाना सही नहीं है। आने वाले दिनों में, मिलों को गन्ने के लिए ₹5,000 प्रति टन का भुगतान करना चाहिए।”