Site icon अग्नि आलोक

युद्ध नहीं, शांति चाहिए: इंदौर की गांधीवादी संस्थाओं ने सैन्य कार्रवाई की निंदा की

Share


इंदौर, । शहर की रचनात्मक एवं गांधीवादी विचारधारा से जुड़ी संस्थाओं ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध की गई सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। संस्थाओं ने इसे न केवल अमानवीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और मानवाधिकारों के लिए गंभीर खतरा बताया है।
प्रेस वक्तव्य में कहा गया कि ओमान की मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ता के बीच बिना युद्ध की औपचारिक घोषणा के इस प्रकार की सैन्य कार्रवाई अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। ईरान के राष्ट्रीय नेताओं की हत्या तथा स्कूल और अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थलों पर हमलों में सैकड़ों निर्दोष नागरिकों, विशेषकर बच्चों की मौत मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।
संस्थाओं का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाइयों से वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ेगी और इसका प्रभाव केवल युद्धग्रस्त क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि, महंगाई और आर्थिक संकट की आशंका भी व्यक्त की गई है।
गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के संयोजक कुमार सिद्धार्थ, शांति मंच के शफी शेख, सदभावना प्रतिष्‍ठान फादर पायस, मध्‍यप्रदेश आचार्यकुल, खादी मिशन सेवा ट्रस्‍ट, सर्वोदय शिक्षण समिति, के डॉ. पुष्‍पेंद्र दुबे, ने कहा कि महात्मा गांधी ने अन्याय और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने का संदेश दिया था। आज के युद्धों में सबसे अधिक क्षति गांधी के मूल्यों सत्य, अहिंसा और करुणा की हो रही है। उन्होंने कहा कि जब समाज में घृणा और संकीर्णता पनपती है, तब वही आगे चलकर युद्ध का रूप ले लेती है।
वक्‍तव्‍य में यह भी कहा कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम अहिंसा, सर्वधर्म समभाव और विविधता में एकता का प्रतीक रहा है, जिसने दुनिया के अनेक देशों को प्रेरित किया। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 भी अंतरराष्ट्रीय शांति, न्यायपूर्ण संबंधों और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने का स्पष्ट निर्देश देता है।
रचनात्‍मक व गांधी विचार की संस्थाओं ने संयुक्त रूप से अमेरिका और इज़राइल की इस कार्रवाई की निंदा करते हुए युद्ध को तत्काल रोकने की अपील की है। साथ ही सभी देशों से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, संवाद और मानवीय मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि गांधी के देश भारत को विश्व शांति के लिए अपनी नैतिक भूमिका निभानी चाहिए।

Exit mobile version