गोवा में 27 से 30 जनवरी 2026 तक इंडिया एनर्जी वीक (IEW) 2026 का आयोजन होगा। यह आयोजन वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन कम करने) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए दुनियाभर के मंत्रियों, सीईओ, नीति निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, शिक्षाविदों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को एक साथ लाएगा। साल की यह पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बैठक है। इसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, निवेश को बढ़ावा देना और कार्बन उत्सर्जन कम करने के व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर लागू होने वाले तरीकों को आगे बढ़ाना है। यह आयोजन ऐसे समय हो रहा है जब वेनेजुएला पर अमेरिका के एक्शन से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों पर नियंत्रण की बात कही है।
दुनियाभर के ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती मांग, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रतिबद्धताओं के बीच IEW 2026 संवाद और सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करेगा। पिछले आयोजनों की सफलता को देखते हुए इस बार 120 से अधिक देशों के प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। 2025 में इस आयोजन में 68,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे। इनमें 570 प्रदर्शक और 5,400 सम्मेलन प्रतिनिधि थे। 540 से अधिक वैश्विक वक्ताओं ने 100 से अधिक सम्मेलन सत्रों में भाग लिया था। IEW 2026 का दायरा और भी बढ़ेगा। इससे यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा संवाद मंचों में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।
बढ़ने वाली है भारत की हिस्सेदारी
भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संरक्षण में और फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (FIPI) और dmg events की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित IEW 2026 ऊर्जा सुरक्षा, सामर्थ्य और स्थिरता पर सहयोग के लिए एक तटस्थ और वैश्विक स्तर पर जुड़ा हुआ मंच प्रदान करता है। अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल के भाग लेने की उम्मीद है, जो वैश्विक ऊर्जा कूटनीति में इंडिया एनर्जी वीक की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक 2025 के अनुसार, 2050 तक वैश्विक ऊर्जा मांग में बढ़ोतरी का 23 फीसदी से अधिक हिस्सा अकेले भारत का होगा, जो किसी भी अन्य देश से सबसे अधिक है। इस पृष्ठभूमि में IEW 2026 नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं को मजबूत और लचीली ऊर्जा प्रणालियों के निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को तेज करने पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाएगा।
भारत का सुधार-आधारित एनर्जी फ्रेमवर्क
IEW 2026 भारत के सुधार-आधारित ऊर्जा मॉडल पर प्रकाश डालेगा, जो आर्थिक विकास, जलवायु जिम्मेदारी और उपभोक्ता संरक्षण को संतुलित करता है। ऑयलफील्ड्स (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट 2025 और पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रूल्स, 2025 के तहत महत्वपूर्ण विधायी और नियामक सुधारों ने अपस्ट्रीम (खोज और उत्पादन) क्षेत्र को मजबूत किया है। इन सुधारों में अन्वेषण, उत्पादन, डीकार्बोनाइजेशन और एकीकृत ऊर्जा परियोजनाओं को कवर करने वाले एकल पेट्रोलियम पट्टे शामिल हैं। पट्टे के निर्णय 180 दिनों के भीतर अनिवार्य होने के साथ समयबद्ध अनुमोदन की सुविधा है। पट्टे की स्थिरता 30 साल तक लंबी अवधि की है, जिसे क्षेत्र के आर्थिक जीवन तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे को साझा करने के तंत्र और मध्यस्थता और मुआवजे की सुरक्षा सहित निवेशक जोखिम-शमन उपाय भी शामिल हैं।
स्वच्छ ऊर्जा और इथेनॉल कार्यक्रम
भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम एक वैश्विक बेंचमार्क के रूप में उभरा है। इसने महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं। 2014 से अब तक ₹1.59 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। 813 लाख टन कार्बन डाइ ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है। 270 लाख टन कच्चे तेल का प्रतिस्थापन हुआ है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इथेनॉल डिस्टिलर्स को ₹2.32 लाख करोड़ का भुगतान किया है। सीधे किसानों को ₹1.39 लाख करोड़ का भुगतान किया है। IEW 2026 में बायोफ्यूल्स, ग्रीन हाइड्रोजन, सस्टेनेबल फ्यूल्स (टिकाऊ ईंधन) और उभरती हुई कम-कार्बन प्रौद्योगिकियों पर प्रमुखता से चर्चा की जाएगी।
बुनियादी ढांचे का विस्तार और ऊर्जा सुरक्षा
भारत ने दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने के लिए घरेलू अन्वेषण और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जारी रखा है। 2014 में लगभग 52,000 पेट्रोल खुदरा आउटलेट थे, जो 2025 में बढ़कर एक लाख से अधिक हो गए हैं। सीएनजी स्टेशनों की संख्या लगभग 968 से बढ़कर 8,477 से अधिक हो गई है, जबकि पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) घरेलू कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.59 करोड़ से अधिक हो गए हैं। प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क लगभग 66 फीसदी से बढ़कर 25,923 किमी से अधिक हो गया है और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) का कवरेज अब द्वीपों को छोड़कर पूरे देश में फैल गया है।
मूल्य स्थिरता और उपभोक्ता संरक्षण
ऊर्जा की कीमतों में वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत ने उपभोक्ताओं के लिए मूल्य स्थिरता बनाए रखी है। जबकि 2021 से प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई 2025 में दिल्ली में कीमतें 2021 की तुलना में कम रहीं। पेट्रोल पर ₹13 प्रति लीटर और डीजल पर ₹16 प्रति लीटर की केंद्रीय उत्पाद शुल्क कटौती पूरी तरह से उपभोक्ताओं को ट्रांसफर कर दी गई थी। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मार्च 2024 में ₹2 प्रति लीटर की अतिरिक्त मूल्य कटौती लागू की थी। पीएमयूवाई (प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना) लाभार्थियों के लिए एलपीजी की कीमतें लगभग 553 रुपये प्रति सिलेंडर पर बनी हुई हैं, जो दुनिया में सबसे कम में से एक है।
वैश्विक ऊर्जा संवाद के लिए मंच
चार दिनों तक चलने वाले IEW 2026 में मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठकें, सीईओ संवाद, सार्वजनिक-निजी क्षेत्र की बातचीत, प्रौद्योगिकी प्रदर्शनियां, प्रदर्शनियां, सामाजिक कार्यक्रम और मीडिया सहभागिता शामिल होगी। हाइड्रोजन अर्थव्यवस्थाओं, हरित वित्त, टिकाऊ ईंधन, सर्कुलरिटी, डिजिटल परिवर्तन और कार्यबल विकास पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। एक्सटेंडेड एग्जिबिशन में पूरे ऊर्जा मूल्य श्रृंखला की सैकड़ों कंपनियां भाग लेंगी। इन्हें व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और देश के पवेलियन का समर्थन प्राप्त होगा।

