प्रेमानंद महाराज और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच विवाद छिड़ा हुआ है। इस बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने इस मामले में एंट्री ली है। बाबा बागेश्वर ने इस विवाद दोनों संतों के योगदान को बताते हुए विवाद सुलझाने वाला बयान दिया है, हालांकि जगद्गुरु रामभद्राचार्य अपने बयान पर सफाई भी दे चुके हैं।
बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने संतों के बीच आपसी मतभेदों को सनातन धर्म के लिए नुकसानदेह बताया। भिवंडी के बागेश्वर सनातन मठ में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर संतों के बीच विवाद पैदा कर रहे हैं, जिससे सनातन धर्म की छवि को ठेस पहुंच रही है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य और बाबा प्रेमानंद महाराज पर बात करते हुए बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रेमानंद महाराज और जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर एक मुद्दा खूब वायरल हो रहा है। गौरतलब हो कि यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब जगद्गगुरू रामभद्राचार्य ने कहा था कि पहले विद्वान लोग ही कथावाचन करते थे, आजकल मूर्ख लोग धर्म का ज्ञान दे रहे हैं। उन्होंने चैलेंज किया था कि प्रेमानंद जी एक अक्षर संस्कृत का बोलकर दिखा दें। तब इस विवाद को समाज और संस्कृति पर प्रवचन दे रहे संत-कथावाचकों के संस्कृत भाषा के ज्ञान पर शास्त्रार्थ के दौर पर देखा गया था, हालांकि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेमानंद महाराज का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि वे ज्यादा, योग्य ये किसने बताया?
प्रेमानंद-जगतगुरु पर बोले धीरेंद्र शास्त्री
बाबा बागेश्वर ने कहा कि मैं इस मुद्दे पर यही कहूंगा कि एक महापुरुष (प्रेमानंद महाराज) ने भागती, दौड़ती, बिछड़ती पीढ़ी को भजन से जोड़ा, तो वहीं जगद्गुरु रामभद्राचार्य गुरुदेव ने सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर रामलला के पक्ष में बयान देकर राम मंदिर निर्माण में अहम योगदान दिया।धीरेंद्र शास्त्री ने गुरु रामभद्राचार्य का बचाव करते हुए कहा कि हमारे गुरुदेव कुछ छिपाते नहीं, जो मन में है, वही बोलते हैं। उनके मन में कोई गलत भावना नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संतों के बीच मतभेदों को सार्वजनिक करना सनातन धर्म को कमजोर करता है। शास्त्री ने कहा कि हमें संतों की बात को सोशल मीडिया या मीडिया का विषय नहीं बनाना चाहिए। यह आदर का विषय है। संतों की लड़ाई दिखाने से सिर्फ सनातन का ही नुकसान होगा।
प्रेमानंद महाराज ने कुछ नहीं कहा
बाबा बागेश्वर ने बताया कि रामभद्राचार्य ने खुद कहा है कि वे प्रेमानंद महाराज को अपने पुत्र की तरह मानते हैं और उनके प्रति कोई ईर्ष्या नहीं रखते। प्रेमानंद महाराज ने भी रामभद्राचार्य की बात पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कुछ लोग जानबूझकर संतों के बीच विवाद पैदा कर रहे हैं, जिससे सनातन धर्म की छवि को ठेस पहुंच रही है। जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने संत प्रेमानंद महाराज पर टिप्पणी की थी, जिसे लेकर संत समाज में नाराजगी देखने को मिली थी। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद स्वामी रामभद्राचार्य ने सफाई पेश की थी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी टिप्पणी का गलत अर्थ निकाला गया और उनका किसी भी संत का अनादर करने का कोई इरादा नहीं था।
प्रेमानंद महाराज और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच क्यों छिड़ा है विवाद?
उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच विवाद गहरा गया है। हालांकि, प्रेमानंद महाराज ने इस विवाद में अब तक कोई बयान नहीं दिया है। जगद्गुरु ने उनके पुराने बयानों के आधार पर उन पर हमलावर रुख अपनाया है। इसके बाद से लगातार मामला उठ रहा है कि आखिर वह क्या वजह है कि सनातन के दो बड़े संत और उनके समर्थक आमने-सामने आते दिख रहे हैं। दरअसल, पिछले कुछ दिनों में लिव इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दे को लेकर संतों और कथावाचकों की टिप्पणी पर बवाल मचा हुआ है। मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। वहीं, संतों के बीच भी टकराव जैसी स्थिति बनती दिख रही है। मामला कथावाचक स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज के लिव-इन में रहने वाले जोड़ों पर आपत्तिजनक टिप्पणी से शुरू हुआ। अब यह प्रेमानंद महाराज से होते हुए जगदगुरु रामभद्राचार्य तक पहुंच गया है। हालांकि, अब जगद्गुरु की तरफ से बयान पर सफाई भी आ गई है।
क्यों गरमाया है विवाद?
महिलाओं पर टिप्पणी मामले को लेकर संत प्रेमानंद महाराज और कथावाचक का अनिरुद्धाचार्य हाल के दिनों में खूब चर्चाओं में रहे हैं। महिला पर बयाल को लेकर विवाद शुरू हुआ। मामले में लोगों ने अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ कोर्ट में केस भी दर्ज कराया है। संत प्रेमानंद महाराज ने महिलाओं की पवित्रता पर सवाल खड़े किए थे। एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद से विवाद लगातार गहराया हुआ है। वीडियो में वह करके दिखाते हैं कि जब कर होटल का भोजन खाने की जुबान में आदत पड़ गई है तो घर की रसोई का भोजन अच्छा नहीं लगेगा। जब चार पुरुषों से मिलने की आदत पड़ गई है तो एक पति को स्वीकार करने की हिम्मत नहीं रह जाएगी।

प्रेमानंद महाराज कहते सुनाई देते हैं कि ऐसे ही चार लड़कियों से व्यभिचार करने वाला पुरुष अपनी पत्नी से संतुष्ट नहीं रहेगा, क्योंकि चार लड़कियों के साथ व्यभिचार करने की उसने आदत बना ली है। उन्होंने इसी वीडियो में कहा कि 100 में से मुश्किल से कोई दो-चार कन्याएं ही ऐसी होगी जो अपना पवित्र जीवन रखकर किसी पुरुष को समर्पित होती होगी। तब वह लड़की कैसे सच्ची बहू बनेगी, जो पहले चार लड़कों से मिल चुकी है। इसी प्रकार जो पहले ही चार लड़कियों से मिल चुका है, क्या वह सच्चा पति बन पाएगा?
इसी बीच कथावाचक अनिरुद्धाचार्य का भी वीडियो सामने आया। इस वीडियो में कहते दिख रहे हैं कि 16 साल की उम्र की लड़कियों की शादी कर देनी चाहिए। लड़कियों की 24 साल की उम्र में शादी करने तक वे जगह मुंह मार चुकी होती है। इन बयानों के बाद से लगातार विवाद बढ़ रहा है। मामले में मध्य प्रदेश के सतना के व्यक्ति ने प्रेमानंद महाराज को धमकी तक दे दी थी। अब इस मामले में जगद्गुरु रामभद्राचार्य का बयान सामने आया है।
पॉडकास्ट में किया चैलेंज
तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने संत प्रेमानंद महाराज को चैलेंज किया है। एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज के बिना किडनी के जीवन बिताना कोई चमत्कार नहीं है। साथ ही, उन्होंने कहा कि मेरे सामने संस्कृत का एक अक्षर बोलकर दिखाएं। दरअसल, पॉडकास्ट में प्रेमानंद महाराज की किडनी के बारे में सवाल किया गया था। सवाल किया गया कि क्या यह कोई चमत्कार है? इस पर जगतगुरु ने कहा कि यह कोई चमत्कार नहीं है। अगर चमत्कार है तो मैं चैलेंज करता हूं कि प्रेमानंद जी महाराज एक अक्षर संस्कृत का बोलकर मेरे सामने दिखा दें।
अब बयान पर आई सफाई
जगदगुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्रदास का इस मामले में बयान सामने आया है। उन्होंने मीडिया के मामले में सफाई दी है। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु सबके गुरु होते हैं। सारी प्रजा उनकी संतान यानी पुत्र के समान होती है। उन्होंने का कहा कि सोशल मीडिया पर जगद्गुरु की बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। आचार्य रामचंद्रदास ने कहा कि गुरुदेव ने स्पष्ट रूप से कहा है कि प्रेमानंद जी से उन्हें किसी प्रकार की ईर्ष्या नहीं है। वे एक अच्छे नामजापक संत हैं।
आचार्य रामचंद्रदास ने आगे कहा कि भगवन का नाम जपने वाला हर व्यक्ति गुरुदेव की दृष्टि में सम्मान के योग्य होता है। अपने प्रवचनों में गुरुदेव बार-बार यह बात कहते हैं। जगद्गुरु कहते हैं कि राम- कृष्ण को भजने वाला चाहे जिस धर्म, वर्ण, अवस्था अथवा लिंग का हो, वह आदर का पात्र है। हम प्रेमानंद जैसे नाम जापक संत को पराया कैसे मान सकते हैं?
वृंदावन में कथा के दौरान बयान
जगतगुरु ने कथावाचकों को लेकर किए गए सवाल पर कहा कि पहले जो सबसे विद्वान होता था, वह कथावाचन करता था। आज जो मूर्ख है, वह कथावाचन करता है। स्वामी रामभद्राचार्य दो दिन पहले सात दिनों की श्रीमद् भागवत कथा वृंदावन में करके गए हैं। कथा की समाप्ति के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह बहुत प्रसन्न नहीं है। आज के समय में संत पढ़-लिख नहीं रहे हैं। आजकल सब कुछ हो रहा है, लेकिन लोग अध्ययन नहीं कर रहे हैं।
जगद्गुरु ने कहा कि आज के समय में लोग पढ़ते-लिखते नहीं है। बस मठ-मंदिर और स्थान बनाने पर ध्यान देते हैं। उन्होंने कहा कि संत जागरूक हो जाते तो हिंदू धर्म की दुर्दशा नहीं होती। महिलाओं पर टिप्पणी को लेकर उन्होंने कहा था कि इस प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है। अब उन्होंने पॉडकास्ट में सीधा हमला बोला है।
संतों की अलग-अलग राय
संत प्रेमानंद महाराज को लेकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान पर संतों की अलग-अलग राय सामने आई है। किसी का कहना है कि संतों की गरिमा बनाए रखने के लिए ऐसे भेदभावपूर्ण बयान से बचना चाहिए। वहीं, किसी ने कहा कि संत प्रेमानंद महाराज भक्त और प्रेम का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। किसी ने रामभद्राचार्य के बयान का समर्थन किया है और किसी ने उनके बयान को गलत ठहराया है।
कुछ संतों ने कहा कि विद्वान और चमत्कारी होना अलग विषय है, संत होना अलग। भक्ति और ज्ञान को एक पैमाने से नहीं मापा जा सकता है। संत और विद्वान हाथों के पांचों उंगलियों की तरह होते हैं। कोई बराबर नहीं होता। अब इस विषय पर विवाद गहराने लगा है। हालांकि, प्रेमानंद महाराज मामले में अब तक चुप हैं।