
नवंबर 2021 : केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में नई शराब नीति लागू की।
जुलाई 2022 : 22 जुलाई को दिल्ली के उप राज्यपाल ने नई शराब नीति में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मनीष सिसोदिया के खिलाफ CBI जांच की सिफारिश की।
जुलाई 2022 : 30 जुलाई को डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। 1 अगस्त 2022 से पुरानी नीति पर ही शराब को बेचा जाएगा।
अगस्त 2022 : 19 अगस्त को CBI ने दिल्ली की नई शराब नीति के मामले में डिप्टी CM मनीष सिसोदिया के आवास समेत 21 जगहों पर छापेमारी की है। CBI ने सिसोदिया समेत 15 लोगों को आरोपी बनाया है।
दिल्ली की नई शराब नीति में गड़बड़ी के मामले में CBI ने डिप्टी सीएम और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया के घर पर छापेमारी की है। CBI पूर्व एक्साइज कमिश्नर अरवा गोपी कृष्ण के आवास समेत 7 राज्यों के 21 ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई कर रही है।
दिल्ली की पुरानी शराब नीति में 60% दुकानें सरकारी थीं
दिल्ली में पुरानी नीति के तहत L1 और L10 लाइसेंस रिटेल वेंडर को दिया जाता था। इसमें L1 दुकानें DDA के अप्रूव्ड मार्केट, लोकल शापिंग सेंटर, कन्वीनिएंट शॉपिंग सेंटर, डिस्ट्रिक्ट सेंटर और कम्युनिटी सेंटर में चला करती थीं।
2003 से ही L1 और L10 लाइसेंस चल रहे थे। L10 वाइन शॉप के लाइसेंस शॉपिंग मॉल के लिए थे। हर साल वेंडर लाइसेंस रिन्यू के लिए फीस भरता है। वहीं होलसेल के लिए फिक्स प्राइज था और बिलिंग अमाउंट पर वैट लगता था।
दिल्ली में 17 नवंबर 2021 को शराब के लिए नई आबकारी नीति लागू होने तक 849 शराब की दुकानें थीं। इनमें से 60% दुकानें सरकारी और 40% निजी थीं।
दिल्ली सरकार ने नई नीति के तहत 2021 में सरकारी दुकानें बंद कर दीं
दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने 17 नवंबर को नई शराब नीति को मंजूरी दी। इसके तहत दिल्ली में शराब की सरकारी दुकानों को बंद कर दिया गया। नई नीति को लागू करने के लिए दिल्ली को 32 जोन में बांटा गया था। हर जोन में 27 शराब की दुकानें थीं। इन दुकानों का मालिकाना हक जोन को जारी किए गए लाइसेंस के तहत दिया गया था। हर वार्ड में 2 से 3 वेंडर को शराब बेचने की अनुमति दी गई।
सरकार ने लाइसेंस धारकों के लिए नियमों को भी आसान बनाया। इसके तहत उन्हें शराब पर डिस्काउंट देने और MRP पर बेचने के बजाय खुद कीमत तय करने की छूट दी। वेंडर्स को डिस्काउंट देने का फायदा भी हुआ। इससे शराब की बिक्री में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली। हालांकि विपक्ष के विरोध के बाद आबकारी विभाग ने कुछ समय के लिए छूट वापस ले ली।
दिल्ली सरकार नई शराब नीति क्यों लेकर आई?
दिल्ली के डिप्टी सीएम ने उस वक्त नई शराब नीति लाने के पीछे कुछ प्रमुख वजहें बताई थीं। पहली- शराब माफियाओं पर नियंत्रण और दूसरा सरकार का राजस्व बढ़ाना। इसके अलावा कालाबाजारी को खत्म करना और शराब की दुकानों का समान वितरण करना था।
डिप्टी सीएम सिसोदिया ने बताया था कि दिल्ली में 272 वॉर्ड हैं, उनमें से 79 वॉर्ड में एक भी शराब की दुकान नहीं है। 45 ऐसे हैं, जहां 1 से 2 दुकानें हैं। 158 वॉर्ड यानी करीब 58% ऐसी जगहें हैं, जहां दुकानें नहीं हैं या कम हैं। दिल्ली में करीब 850 दुकानें हैं, जिनमें से 50% दुकानें 45 वॉर्ड में हैं। नई नीति से अब हर वॉर्ड में दुकानें होंगी और शराब की कालाबाजारी रुकेगी।
दिल्ली में नई शराब नीति से क्या फायदा हुआ?
नई शराब नीति लागू होने के बाद से केजरीवाल सरकार के राजस्व में 27% का इजाफा हुआ। सरकार के खजाने में 8900 करोड़ रुपए आए।
शराब की होम डिलीवरी वाले प्रस्ताव में क्या गड़बड़ी थी?
2 मई 2022 को दिल्ली सरकार के मंत्रियों के एक समूह यानी GOM ने नई शराब नीति की संशोधित नीति की सिफारिश की। इसके तहत शराब की होम डिलीवरी, सुबह 3 बजे तक दुकानें खोलने और वेंडर्स को अनलिमिटेड डिस्काउंट देने की बात थी।
मंत्री समूह की सिफारिश के बाद इस नीति की जांच दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार द्वारा की जानी थी। आबकारी विभाग से जांच का प्रस्ताव मिलने के बाद चीफ सेक्रेटरी ने दिल्ली की नई शराब नीति 2021-22 में कई सारी खामियां और अनियमितताएं पाईं।
इसके बाद चीफ सेक्रेटरी ने आबकारी विभाग के मंत्री सिसोदिया को 8 जुलाई को एक रिपोर्ट भेजकर जवाब मांगा। उसी दिन दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को भी रिपोर्ट भेजी गई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ सेक्रेटरी ने इसके बाद दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW को नई शराब नीति में भ्रष्टाचार, गुटबंदी और शराब के कारोबार में एकाधिकार के आरोपों की जांच करने को कहा।
EOW ने बाद में इस महीने 15 दिनों में हुई आबकारी विभाग की बैठकों की डिजिटल वीडियो रिकॉर्डिंग यानी DVR को जुटाया। इसमें पाया गया कि 11-12 जुलाई को हुई एक बैठक सुबह 5 बजे तक चली थी।
इसके बाद EOW ने दिल्ली आबकारी विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर को नोटिस जारी कर नई शराब नीति के नियमों और शर्तों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों को अवैध तरीके से शराब लाइसेंस देने की जानकारी मांगी।
EOW ने विभाग से शराब लाइसेंस पाने वाले सभी सफल आवेदकों के एप्लिकेशन फॉर्म के साथ अन्य डॉक्यूमेंट भी देने को कहा, जिन्हें उन्हें जमा करना था। इसके अतिरिक्त आबकारी विभाग से शराब व्यापार में एकाधिकार और गुटबंदी को रोकने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया की आउटलाइन भी मांगी।
सिसोदिया पर शराब ठेकेदारों के 144 करोड़ की टेंडर फीस माफ करने का आरोप
उपराज्यपाल और दिल्ली के सीएम को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार सिसोदिया ने उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना शराब नीति में बदलाव किया। जैसे कि कोरोना महामारी के नाम पर 144.36 करोड़ रुपए की टेंडर लाइसेंस फीस माफ करना। आरोप है कि इससे शराब ठेकेदाराें को फायदा पहुंचा। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इससे मिले कमीशन का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव में किया।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सिसोदिया ने विदेशी शराब की कीमतों में संशोधन करके और बीयर के प्रति केस पर 50 रुपए के आयात शुल्क को हटाकर शराब लाइसेंसधारियों को बेजा लाभ दिया। इससे विदेशी शराब और बीयर रिटेल यानी खुदरा मार्केट में सस्ती हो गई, जिससे राज्य के सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
अधिकारियों ने कहा कि यदि पहले से लागू की गई नीति में कोई बदलाव होता है तो पहले आबकारी विभाग को उसे कैबिनेट के सामने रखना होगा और अंतिम मंजूरी के लिए उपराज्यपाल के पास भेजना होता है। कैबिनेट और उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना किया गया कोई भी बदलाव अवैध होता है और ऐसा करना दिल्ली एक्साइज रूल्स- 2010 और ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स-1993 का उल्लंघन है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मनीष सिसोदिया ने शराब माफिया को फायदा पहुंचाने का काम किया है। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में शराब के प्रोडक्शन, होलसेलर और बिक्री से जुड़ा काम एक ही व्यक्ति को दिए जाने पर भी सवाल उठाया गया है।
इस रिपोर्ट के आने के बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने केजरीवाल सरकार की नई शराब नीति 2021-22 में भ्रष्टाचार के आरोपों की CBI जांच की सिफारिश की। इसी के तहत CBI ने 19 जुलाई की सुबह डिप्टी CM मनीष सिसोदिया के आवास समेत 21 जगहों पर CBI की छापेमारी की है। जांच एजेंसी सुबह 8.30 बजे ही सिसोदिया के घर पहुंच गई थी।
एक्साइज के डिप्टी कमिश्नर रहे आनंद तिवारी, तत्कालीन आबकारी आयुक्त अरवा गोपी कृष्ण, कुलजीत सिंह, सुभाष रंजन के घर पर भी CBI की टीम ने छापा मारा। शराब नीति घोटाले के आरोप को लेकर CBI ने FIR दर्ज की। सूत्रों के मुताबिक इसमें सिसोदिया के अलावा 4 और लोगों के नाम हैं।