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*हाइफनेशन की थ्योरी? क्या होती है ,क्या भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से आ गई है ये थ्योरी?*

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नई दिल्ली: क्या भारत दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के मद्देनजर उसी हाइफनेशन के सिद्धांत में फंस गया है जिससे निकलने में उसे कई साल लगे ? ये सवाल इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि पिछले दिनों जब भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव दिख रहा था। उसके खात्मे के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने एक्स पोस्ट में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया। उसमें भारत और पाकिस्तान को डी -हाइफनेट नहीं किया यानि हर बात में दोनों देशों को कई स्तरों पर एक जैसा ही मापा जा रहा है।

बता दें कि डिप्लोमेसी की भाषा में पश्चिम जिस तरह से भारत और पाकिस्तान को एक तरह से देखता रहा है, उसे हाइफनेशन का नाम दिया गया है। भारत ‘हाइफनेशन’ के इस सिद्धांत को नहीं मानता। इसके पीछे कई वजहें हैं। बात चाहे लोकतांत्रिक मूल्यों की हो या फिर इकोनॉमी की । भारत की अपनी अलग हैसियत है। दूसरा पाकिस्तान आतंकवाद को स्पॉन्सर करने वाला देश है। खासतौर से सीमा पार आतंकवाद के मामले पर भारत पीड़ित रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति की भाषा पर हो रही हैरानी
ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति की इस तरह की भाषा पर अचरज होना स्वाभाविक है। कई जानकार कहते हैं कि दशकों तक भारत को पश्चिम के इस हाइफनेशन के नजरिए से संघर्ष करना पड़ा और डी हाइफनेट में उसने कामयाबी भी पाई। लेकिन अब उसकी स्थिति पहले जैसी हो गई है। रणनीतिक मामलों के जानकार यूनाइटेड सर्विस इंस्टीटूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) के निदेशक मेजर जनरल बीके शर्मा कहते हैं कि ट्रंप की वजह से भारत को असहजता का सामना तो करना पड़ा। उन्होंने दोनों देशों को एक ही तराजू पर रख दिया है। हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक सवाल के जवाब में दोनों देशों को हाइफ नेट किए जाने की बात नहीं स्वीकारी। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है दुनिया भर ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का समर्थन किया है। भारत के नजरिए को समझा गया है।

हाइफनेशन की नीति से ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं
कुछ जानकार मानते हैं कि भारतीय विदेश नीति और डिप्लोमेसी को ट्रंप के हाइफनेशन की नीति से ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं हैं। अंतर्राष्ट्रीय मामलों की जानकार इंद्राणी बनर्जी कहती हैं कि ये सही है कि भारत खुद पाकिस्तान के आतंकवाद का पीड़ित रहा है और हम कई सालों से ये नजरिया पाकिस्तान को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ये इतना आसान नहीं, हालांकि पश्चिम कई सालों में कई देश भी खुद आतंकवाद से पीड़ित होने के बाद इस नजरिए को समझने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में ट्रंप के हालिया ट्वीट को लेकर हमें ज्यादा तवज्जो नहीं देनी चाहिए। क्योंकि ऐसा नहीं हुआ है कि पश्चिम ने पाकिस्तान के नरेटिव को मान लिया है।

क्या है हाइफनेशन की थ्योरी ?

ये एक ऐसी थ्योरी है जिसके तहत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के कई देश भारत और पाकिस्तान के संदर्भ में चलत हैं। जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय नेताओं के दौरों पर ही नजर डालें तो ज्यादातर देश इस पॉलिसी पर चलते हैं कि एक वक्त में दोनों देशों का दौरा एक साथ ना किया जाए। यही वजह है कि ज्यादातर देश भारत या पाकिस्तान का दौरा करते वक्त एक छोटा सा ब्रेक बीच में रखते हैं।

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