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क्या है टीपू सुल्तान के मंदिर तोड़ने का सच, इमारत में आज भी चल रहा मदरसा

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श्रीरंगपटना, कर्नाटक

दूर से दिखाई देने वालीं दो ऊंची-ऊंची मीनारें। एंट्री गेट पर एक सिक्योरिटी गार्ड। उसके साथ में आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया यानी ASI के दो कर्मचारी। ये कर्नाटक के मंड्या जिले में आने वाले ऐतिहासिक शहर श्रीरंगपटना की जामिया मस्जिद है, जो एक किले में बनी है।

आप यहां की फोटो-वीडियो नहीं ले सकते, क्योंकि ये ASI के संरक्षण में है, हालांकि मस्जिद के अंदर एक मदरसा चल रहा है। 60 बच्चे यहां पढ़ते हैं। ये सभी रहते, खाते-पीते भी यहीं हैं। एक प्रेयर हॉल है, जिसमें हर रोज पांच वक्त की नमाज अदा की जाती है।

10 मई को कर्नाटक की 224 सीटों पर वोटिंग है, 13 मई को रिजल्ट आएगा। चुनाव से पहले जामिया मस्जिद का मसला फिर खड़ा हो गया है। हिंदू संगठन करीब 8 साल से इस मस्जिद का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यहां नमाज बंद करवाकर, पूजा की इजाजत दी जाए। इसके पीछे दो तर्क हैं…

पहला- इस जगह की देखरेख 30 साल से ASI के पास है, तो यहां मदरसा कैसे चल रहा है और अंदर इतने लोग रह कैसे रहे हैं?

दूसरा- किले में पहले हनुमान मंदिर था, जिसे तोड़कर टीपू सुल्तान ने 1786-87 में मस्जिद बनवा दी।

ASI अफसर ने कहा- फोटो-वीडियो शूट करना है तो दिल्ली से परमिशन लाइए
चुनावी माहौल के बीच मैं बेंगलुरु से करीब 120 किमी दूर जामिया मस्जिद पहुंचा। अंदर जाने लगा, तो ASI के अधिकारी दीपक ने गेट पर रोक दिया। कहने लगे कि ‘आप अंदर जा सकते हैं, लेकिन फोटो-वीडियो लेने की परमिशन नहीं है। शूटिंग करना है तो दिल्ली से इजाजत लेनी होगी।’

दीपक ने मेरी बात ASI के बेंगलुरू सर्कल के इंचार्ज बिपिन चंद्र नेगी से करवाई। उनसे वीडियो शूट करने की परमिशन मांगी, तो बोले, ‘ASI की किसी भी प्रॉपर्टी में बिना परमिशन फोटो-वीडियो नहीं लिए जा सकते। यही नियम यहां भी लागू है।’

जामिया मस्जिद के संरक्षण का जिम्मा ASI के पास करीब 30 साल से है। इसके अलावा किले में बने वॉर मेमोरियल और पुराने कैदखाने की देखरेख भी यही संस्था करती है।

इसके बाद मैं कैमरा बाहर रखकर अंदर गया। दीपक ने पहरा दे रहे गार्ड से कहा कि मेरे साथ रहे। कुछ कदम आगे बढ़ते ही टोपी पहने एक बुजुर्ग नजर आए। गार्ड से पूछा कि ये कौन हैं, जवाब मिला, ‘यहां मदरसा चलता है, नमाज होती है। ये वक्फ बोर्ड से आए हैं। यही सब मैनेज करते हैं।’

मैंने उन बुजुर्ग से बात करनी चाही, तो उन्होंने कहा कि ‘क्या बात करनी है। टीपू सुल्तान ने इस मस्जिद को बनवाया था। तब से ही यहां नमाज चल रही है और मदरसा भी। बाकि हमें कुछ बात नहीं करनी।’

मैंने कहा, ‘क्या मैं वो जगह देख सकता हूं, जहां नमाज होती है।’ उन्होंने अपने एक सहयोगी को आवाज दी। मैं उनके साथ सीढ़ियों से फर्स्ट फ्लोर पर पहुंचा। सामने 5 दरवाजे नजर आए। मैंने कहा, इतने सारे कमरे हैं। वो बोले, ‘नहीं, ये बड़ा हॉल है, उसके ही अलग-अलग दरवाजे हैं।’

फिर मुझे अंदर ले गए। वहां एक बच्चा सो रहा था। मेरे साथ आए शख्स ने बताया, ‘ऐसे बेसहारा बच्चों को हम यहां रखते हैं और तालीम देते हैं। ये यहीं रहता है।’

मस्जिद के फर्स्ट फ्लोर पर मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों के रहने का इंतजाम है। एक्टिविस्ट इसी पर आपत्ति जताते हैं। उनका कहना है कि इससे इमारत को नुकसान हो रहा है।

फिर छत की तरफ दिखाते हुए कहने लगे कि ‘टीपू सुल्तान को तीन चीजें- पान, अंगूर और लीची बहुत पसंद थी। इसलिए पहली डिजाइन पान के आकार की है। दूसरी डिजाइन अंगूर जैसी है और तीसरी लीची की तरह।

दीवार की तरफ इशारा कर बोले, ‘यहां से सुल्तान हर रोज नमाज अदा करने आया करते थे। वो मेन गेट से नहीं आते थे, क्योंकि उन्हें देखकर सब खड़े हो जाते थे और वो नहीं चाहते थे कि खुदा के सामने कोई उन्हें देखकर खड़ा हो।’

मैंने पूछा, ‘अभी मदरसे में कितने बच्चे पढ़ रहे हैं’। बोले, ‘60 बच्चे हैं। तालीम के साथ 5 वक्त की नमाज अदा होती है। सुबह साढ़े 5 बजे से रात तक यही होता है।’

हम बात करते हुए बाहर आ गए। मैंने उनसे कहा कि आपका कैमरे पर वर्जन लेना है। उन्होंने इनकार कर दिया और अपने कमरे में चले गए। मैं दोबारा हिसाब-किताब देख रहे शख्स के पास पहुंचा।

उनसे पूछा, ‘हिंदू संगठन इस जगह को मंदिर बताते हैं, वे सवाल उठा रहे हैं कि जब ये ASI इस जगह की देखरेख करती है, तो फिर यहां मदरसा कैसे चल रहा है, इतने लोग रह कैसे रहे हैं। जवाब में उस शख्स ने बस इतना कहा, ‘यह सब हम नहीं जानते।’ फिर लिखा-पढ़ी का बोलकर बात करने से इनकार कर दिया।

मैं मस्जिद से बाहर आया तो मुझे ननचुंडा मिले। ननचुंडा की पैदाइश श्रीरंगपटना की ही है और वो बाहर से आने वाले टूरिस्ट को गाइड करते हैं। मस्जिद के बारे में पूछने पर बोले, ‘टीपू सुल्तान के शासन में आने के बाद यह जगह 1787 में मस्जिद बन गई। इसका इतिहास बहुत पुराना है। टीपू सुल्तान को सपोर्ट करने वाले बोलते हैं कि ये मस्जिद हिंदू और इस्लामिक कल्चर मिक्स करके बनाई गई है। हिंदू संगठन विरोध कर रहे हैं, लेकिन मदरसा-नमाज चल रहे हैं। पुलिस सिक्योरिटी है।’

एक्टिविस्ट बोले- 100 से ज्यादा लोग अंदर रहते हैं, इस जगह को डैमेज कर रहे
यहीं मेरी मुलाकात हिंदू संगठन के एक्टिविस्ट चंदन से हुई। वे बोले, ‘अंदर रह रहे लोग इस जगह को बिगाड़ रहे हैं। आप अंदर कई स्क्रेच देख सकते हैं। कई जगह डैमेज भी है। ASI की प्रॉपर्टी में एक स्क्रेच पर भी जुर्माना हो जाता है। आप अंदर की सभी फोटो लें और लोगों को दिखाएं कि यहां क्या हो रहा है।’

चंदन के साथ खड़े रवीश बोले, ‘यह मस्जिद हिंदू मंदिर के बेस पर बनी है। स्ट्रक्चर भी मंदिर का ही है। पहले यहां आंजनेय मंदिर था। हम लोग चाहते हैं कि यहां दोबारा मंदिर बने और पूजा शुरू हो। हिंदुओं को सिर्फ BJP सपोर्ट करती है, इसलिए हम भी BJP को सपोर्ट कर रहे हैं।’

मस्जिद के नजदीक ही करीब 8 साल से ठेला लगा रहे यूपी के गोपाल कुमार ने पहले कैमरे पर आने से मना कर दिया। बोले, ‘ये लोकल लोगों की लड़ाई है।’ फिर कहने लगे कि ‘साल में एक बार बजरंग दल वाले रैली निकालते हैं, बाकि वक्त कोई हल्ला नहीं होता। हां, चुनाव में इसका असर जरूर दिखेगा।’

स्थानीय खंडोजी राव का कहना है, ‘मंदिर में हिंदू धर्म से जुड़े निशान हैं, लेकिन कोई आर्कियोलॉजिकल एविडेंस नहीं हैं, क्योंकि 1947 में पुराने अधिकारी ही थे। वो जो हटाना चाहते थे, उन्होंने सब हटा दिया। अभी किसी पार्टी ने खुलकर समर्थन नहीं किया है। BJP का 80% सपोर्ट है। कैंडिडेट्स नॉमिनेशन फाइल करने में लगे हैं। देखते हैं मीटिंग में क्या बोलते हैं।’

मुस्लिमों के सिर्फ 50-60 घर, लोग बोले- बाहर के लोग आग लगा रहे
हिंदुओं का पक्ष जानने के बाद मैं श्रीरंगपटना की मुस्लिम बस्ती में पहुंचा। यहां सबसे पहले मेरी मुलाकात इमरान से हुई। जामिया मस्जिद की जगह मंदिर होने की बात पर बोले, ‘पुराने जमाने में क्या था, ये कोई नहीं जानता। वे साल में एक दिन आकर प्रदर्शन करते हैं, फिर सब शांत हो जाता है। पुलिस की सिक्योरिटी रहती है।’

साथ खड़े अब्दुल राउफ बोले, ‘बाहरी लोग तेज-तेज आवाजें करते हैं। झंडा फहराते हैं। यह सब बजरंग दल, RSS और BJP वाले करवा रहे हैं। यह इमारत ASI के कंट्रोल में है, इसमें हम क्या कर सकते हैं।

राउफ कहते हैं, ‘श्रीरंगपटना टाउन में तो हम 50-60 मुस्लिम परिवार ही रह गए हैं, बाकी तो सालों पहले मैसूर जाकर बस गए। हम लोग यहां जो काम-धंधा कर रहे हैं, वो हिंदुओं का ही काम कर रहे हैं। वेल्डिंग और छोटे-मोटे काम करते हैं।’

अब्दुल रहमान कहते हैं, ‘इतिहास को इतिहास ही रहने देना चाहिए। जो किताबों में है, वही पढ़ रहे हैं। मैं 32 साल की उम्र से वहां नमाज कर रहा हूं। मेरे पिता-दादा भी करते थे।’

इस मामले में हिंदूवादी संगठन बजरंग सेना के स्टेट प्रेसिडेंट सीटी मंजूनाथ ने हाईकोर्ट में 17 नवंबर 2022 को पिटीशन फाइल की थी। ये अभी डिविजन बेंच में है। उनका दावा है कि ‘हनुमान मंदिर के ऊपर यह मस्जिद टीपू सुल्तान ने बनवाई थी। बाहरी लोगों को अंदर प्रेयर करने से रोका जाए’।

बजरंग सेना के स्टेट प्रेसिडेंट सीटी मंजूनाथ मैसूर पुरातत्व विभाग की यह रिपोर्ट दिखाते हैं, जिसमें लिखा है कि टीपू सुल्तान ने आंजनेय मंदिर तोड़कर जामिया मस्जिद बनवाई थी।

2018 में BJP को यहां सिर्फ 11 हजार वोट मिले
श्रीरंगपटना सीट पर लगातार 4 बार से JD(S) का कैंडिडेट जीत रहा है। 2018 के चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार रविंद्र श्रीकांता को एक लाख वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के रमेश बाबू को 57,619 और तीसरे नंबर पर रहे BJP कैंडिडेट ननजुंडे गौड़ा को सिर्फ 11,326 वोट मिले थे। JD(S) और कांग्रेस ने इस बार भी पुराने उम्मीदवारों को टिकट दिया है। BJP की ओर से ई. सच्चिदानंद चुनाव लड़ रहे हैं।

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