बीएमसी चुनाव के नतीजे आ गए. अब मेयर पद को लेकर हलचल है. बीएमसी चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. हालांकि, मुंबई का मेयर कौन होगा? इस पर अब तक सस्पेंस है. अभी तक की तस्वीर से साफ है कि मेयर भाजपा का होगा. हालांकि, सियासत में कुछ भी संभव होता है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना से बातचीत के बाद ही मेयर का चुनाव होगा. उधर बीएमसी मेयर को लेकर उठा-पटक बढ़ गई है. शिंदे को अपने शिवसैनिकों के टूटने का डर सकता रहा है. उद्धव ठाकरे के एक बयान से खलबली मच चुकी है. खबलली इस कदर है कि एकनाथ शिंदे को अपने पार्षदों को फाइट स्टार होटल में शिफ्ट करना पड़ गया है.
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को शिवसेना के फिर से टूटने की चिंता सता रहा है. एकनाथ शिंदे ने बीएमसी नतीजे आने के बाद अपने पार्षदों के टूट से बचने के लिए बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने अपने चुने गए शिवसेना पार्षदों को बांद्रा के एक फाइव स्टार होटल में शिफ्ट कर दिया, ताकि उन्हें कोई खरीद न ले. दरअसल, उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश की है और जोर देकर कहा कि भारत की सबसे अमीर नगर निकाय पर नियंत्रण खोने के बावजूद मुंबई में शिवसेना (यूुबीटी) का मेयर देखना उनका सपना है और अगर भगवान ने चाहा तो यह सच होगा. उद्धव ठाकरे के इसी बयान से शिंदे कैंप में डर का माहौल है.
शिंदे क्यों चिंतित हैं?
यही कारण है कि भारत की सबसे अमीर नगर निकाय में मेयर के चुने जाने से पहले कम मार्जिन को देखते हुए शिंदे सतर्क हैं. उन्होंने अपने नए चुने गए कॉर्पोरेटर्स यानी पार्षदों को एक होटल में भेज दिया है ताकि उन्हें पाला बदलने या आखिरी मिनट में दल-बदल से बचाया जा सके. इससे गणित बिगड़ सकता है और नगर निकाय पर नियंत्रण मुश्किल हो सकता है. पार्टी नेताओं ने कहा कि यह कदम एक एहतियाती कदम है ताकि ऐसे समय में पाला बदलने से रोका जा सके जब संख्याएं करीब हैं और मेयर का चुनाव जल्द ही होने वाला है.
शिंदे के पार्षद कहां रखे गए?
सूत्रों के मुताबिक, मुंबई में शिंदे वाली शिवसेना के सभी जीते कॉर्पोरेटर को तीन दिनों तक पांच सितारा होटल में रखा जाएगा. शिंदे कैम्प के सभी 29 नगर सेवक की बांद्रा के ताज लैंड एंड में रखा जाएगा. नगर सेवकों को महा विकास आघाड़ी अपनी तरह ना खींच ले, उसकी वजह से सभी 29 नगर सेवकों को तीन दिनों तक होटल में रखा जाएगा. एक बार शिवेसना टूट चुकी है. ऐसे में सवाल है कि क्या फिर से शिंदे कैंप वाली शिवसेना में टूट होगा?
भाजपा-शिंदे शिवसेना में खींचतान?
इधर भाजपा और शिवसेना में खींचतान की भी खबर है. क्योंकि ढाई-ढाई साल के कार्यकाल की मांग हो गई है. बीएमसी मेयर पद को लेकर भाजपा और शिंदे कैंप वाली शिवसेना आमने-सामने आ चुकी हैं. सूत्रों के मुताबिक बीएमसी में बड़ी जीत के बाद शिवसेना ने भी मेयर का दावा ठोक दिया है. सूत्रों के मुताबिक, शिंदे वाली शिवसेना की मांग है कि बीएमसी का मेयर बीजेपी और शिवसेना का ढ़ाई ढ़ाई साल को हो. हालांकि, इस मामले में महाराष्ट्र की सीएम देवेंद्र फडणवीस ने साफ कह दिया है मेयर को लेकर शिवसेना के साथ पहले चर्चा होगी, उसके बाद फैसला लिया जाएगा.
क्या है बीएमसी का नंबर गेम
‘दरअसल, बीएमसी में कुल सदस्यों की संख्या है 227. बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है. भाजपा ने 89 सीटें जीती हैं और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 29 सीटें जीती हैं. इससे सत्ताधारी गठबंधन 118 सीटों पर पहुंच गया है. यह बहुमत के आंकड़े से केवल चार अधिक है. वहीं, उद्धव कैंप के आंकड़ों पर गौर करें तो उसके पास 65 सीटे हैं और भाई राज ठाकरे की पार्टी मनसे के 6 मिलाकर आंकड़ा 71 पहुंच रहा है. कांग्रेस के पास 24 पार्षद हैं. ऐसे में बीएमसी में खेल कभी भी हो सकता है. इसको विस्तार से आंकड़ों पर गौर करके जानते हैं.
क्यों बीएमसी में पासा पलटने की आशंका है
बीएमसी का गणित कुछ ऐसा है कि अगर शिंदे कैंप के 15-20 कॉर्पोरेटर पार्टी बदल लेते हैं तो तस्वीर बदल सकती है. ऐसा इसलिए भी संभव दिख रहा है क्योंकि शिंदे कैंप चाहता है कि मेयर उसका बने. इसकी वजह है कि शिंदे कैंप ने अब तक उद्धव ठाकरे के साथ मिलकर बीएमसी पर राज किया है. बीएमसी में पिछले 25 सालों से अविभाजित शिवसेना का कब्जा रहा है. यही कारण है कि शिंदे वाली शिवसेना में अब ढाई साल के कार्यकाल की मांग हो रही है. हालांकि, भाजपा को जिस तरह की जीत मिली है और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, ऐसे में लगता नहीं है कि वह शिंदे कैंप की मांग मानेगी.
भाजपा का पलड़ा भारी
चलिए अब जानते हैं कि अभी किसके पास कितनी सीटें हैं और कैसे गेम बदलने के चांस लग रहे हैं? शिवसेना में दो फाड़ के बाद से तस्वीर बीएमसी की बदल चुकी है. अभी भाजपा के पास 89 और शिंदे के पास 29 पार्षद हैं. कुल मिलाकर यह संख्या 118 होती है. अगर इसमें अजीत पवार की तीन सीट जोड़ ले तो यह 121 हो जाती है. यह बहुमत से 7 अधिक है. इसलिए पूरी संभावना है कि भाजपा का ही मेयर बनेगा. मगर दूसरी तस्वीर टूट वाली दिख रही है. अगर शिंदे कैंप टूटता है और विपक्ष एक हो जाता है तो खेल बदल सकता है.
क्या है मेयर पर गेम बदलने के समीकरण
मसलन उद्धव ठाकरे के पास 65 और राज ठाकरे के पास 6 पार्षद हैं यानी कुल 71. अब कांग्रेस के 24 पार्षद, शरद पवार के 1 और एआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी के पार्षद को जोड़ लें तो यह संख्या 106 हो जाती है. याद रखें कि बहुमत का आंकड़ा 114 है. यानी उद्धव गुट को शिंदे कैंप से कुछ ही पार्षदों की जरूरत होगी. यही कारण है कि बीएमसी में अब भी खेला होने के चांस है. तभी तो एकनाथ शिंदे डर के साए में जी रहे हैं. वह कोई चांस नहीं लेना चाहते हैं. उन्हें भी पता है कि उनकी पार्टी के जो लोग हैं, पहले तो उद्धव वाली शिवेसना के साथ ही थे.
हालांकि, यह तस्वीर बहुत ही हाइपोथेटिकल दिखती है. अभी तक जो तस्वीर है, उसमें बीएमसी में भाजपा का ही मेयर बनता दिख रहा है. नंबर कम होने की वजह से बीएमसी में उद्धव ठाकरे और विपक्षी गुट का मेयर बनना बहुत दूर की कौड़ी लगती है. नंबर गेम से समझिए. बहुमत के लिए 114 सीटें चाहिए.
भाजपा पक्ष
भाजपा- 89 सीटें
शिवसेना (शिंदे गुट) – 29 सीटें
अजित पवार की एनसीपी- 3
महायुति गठबंधन- कुल 121 सीटें (स्पष्ट बहुमत)
विपक्षी पक्ष:
शिवसेना (UBT) – 65 सीटें
मनसे- 6 सीटें
कांग्रेस – 24 सीटें
अन्य (AIMIM 8, NCP आदि)
कुल सीटें- 106 के पास पहुंचती हैं. यह बहुमत से काफी कम है. बगैर शिंदे कैंप को तोड़े उद्धव के लिए यह संभव नहीं है कि वह अपना मेयर बना ले.

