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साथी अफसर की कोरोना से मृत्यु हुई तो उन्हीं के पद पर हुआ प्रमोशन, यह बोल नौकरी छोड़ी कि दोस्त की कुर्सी पर कैसे बैठ पाएंगे

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इंदौर

सांख्यिकी विभाग के एडिशनल डायरेक्टर व संयुक्त संचालक की 38 साल साथ रही नौकरी, एक के निधन पर दूसरे ने लिया वीआरएस

दोस्ती कहने को एक शब्द ही है, लेकिन जिसे यह मानते हैं, उनके लिए सब कुछ इसी से होता है, जीते जी और फिर दोस्त के जाने के बाद भी दोस्ती को निभाया जाता है। इंदौर में सांख्यिकी विभाग के संयुक्त संचालक जेपी परिहार और वरिष्ठ अधिकारी एके राठौर की दोस्ती की कहानी भी ऐसी ही है। कोरोना की दूसरी लहर में 19 अप्रैल को भोपाल में एडिशनल डायरेक्टर के पद पर पदस्थ एके राठौर का निधन हो गया। उनके बाद विभाग में सीनियर अधिकारी परिहार थे। इसलिए उनकी पदोन्नति की फाइल चली और परिहार से कहा गया कि आपको अब भोपाल में आकर पद संभालना है। पदोन्नत किया जा रहा है।

यह सुनते ही परिहार ने विभाग को नौकरी छोड़ने के लिए वीआरएस का आवेदन कर दिया। विभाग के उप सचिव अभिषेक सिंह ने आवेदन वापस कर दिया और परिहार को बुलाकर पूछा कि एेसा क्यों कर रहे हैं, अभी तो आपकी दो साल की नौकरी बची है, पदोन्नत तो सभी होना चाहते हैं। इस पर परिहार ने जो कारण बताया उसे सुनकर सिंह चौंक गए। उन्होंने कहा कि सर मैं और राठौर एक साथ ही दिसंबर 1983 में पीएससी में चयनित हुए। मेरे लिए वह दोस्त और भाई थे।

अब मैं पदोन्नत होकर उनके कक्ष में उनकी कुर्सी पर नहीं बैठ सकूंगा, मुझमें इतनी हिम्मत नहीं है। मैं नौकरी में रहूंगा तो पदोन्नत होना होगा और फिर इसी कुर्सी पर आना होगा। इसलिए अब मुझे नौकरी ही नहीं करना है। आखिर में सिंह ने उनकी बात सुनकर कह दिया कि ठीक है आप फिर आवेदन कर दीजिए। इसके बाद परिहार ने फिर वीआरएस का आवेदन करते हुए नौकरी छोड़ने का तीन माह का नोटिस दे दिया। अगस्त माह उनकी नौकरी का अंतिम माह है।

मेरी बैच के टॉपर थे राठौर सर, उनका जाना मेरी जिंदगी का सबसे खराब दिन
परिहार कहते हैं कि हमारी 1983 की बैच में 13 लोग थे। सभी की ट्रेनिंग साथ हुई। राठौर सर बैच के टॉपर थे। पांच साल भोपाल में साथ में एक ही मल्टी में रहे, फिर अलग-अलग जगह पदस्थ रहे। फिर साल 2007 से 2012 तक भोपाल में साथ रहे। विभाग में एडिशनल डायरेक्टर की एक ही पोस्ट थी। भोपाल में इस पद पर उनकी पदोन्नति हो गई।

मैं इंदौर पदस्थ हो गया। कोरोना में 19 अप्रैल को उनका निधन हो गया। यह दिन मेरी जिंदगी का सबसे खराब दिन रहा। मेरी पदोन्नति की फाइल चल रही थी, क्योंकि अब बैच में उनके बाद मेरा ही नंबर था, लेकिन मैं उनकी जगह नहीं ले सकता, इसलिए वीआरएस का आवेदन कर दिया है। मेरी अभी करीब दो साल की नौकरी बची है।

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