रीवा । आजादी का अमृत महोत्सव मनाने के क्रम में सोमवार 27 मार्च को शासकीय कन्या महाविद्यालय के सभाकक्ष में देश की आजादी के आंदोलन में पत्रकारिता की भूमिका पर एक व्याख्यान आयोजन किया गया । उक्त कार्यक्रम ताम्रपत्रधारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय श्री ओंकार नाथ खरे के ज्येष्ठ पुत्र लोकतंत्र सेनानी अजय खरे के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की हिंदी विभाग की प्राध्यापक सरोज गोस्वामी ने किया। गृह विज्ञान संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ अर्चना गुप्ता ने विषय परिचय कराया।
इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि आजादी के आंदोलन में कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के द्वारा देश भक्ति से संबंधित समाचारों के प्रकाशन एवं लेखन कार्य को बढ़ावा दिया गया। उस दौर में पत्रकारिता की कोई डिग्री नहीं होती थी लेकिन पत्रकारिता का स्तर काफी ऊंचा और क्रांतिकारी था। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता को रोकने के लिए ब्रिटिश सरकार ने कई बार प्रेस एक्ट में संशोधन करके दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन कलम के सिपाही अपनी आवाज बुलंद करते रहे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी , लोकमान्य तिलक, जवाहरलाल नेहरू , भगत सिंह , सुभाष चंद्र बोस , मौलाना आजाद, गणेश शंकर विद्यार्थी , माखनलाल चतुर्वेदी आदि ने अपने क्रांतिकारी विचारों और लेखन के दम पर आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुंशी प्रेमचंद ने भी सक्रियता दिखलाई। आजादी के आंदोलन के दौर में पत्रकारिता पेशा नहीं बल्कि समाज सेवा और देश सेवा थी। बड़ी संख्या में पत्रकार आजादी के आंदोलन के योद्धा बनकर सामने आए। श्री खरे ने कहा कि पत्रकारिता में जीवन मूल्यों का बना रहना सामाजिक चेतना , लोकतंत्र एवं देश की आजादी के मूल्यों के लिए बेहद जरूरी है। इसका संकट खतरनाक साबित हो सकता है।
संपन्न कार्यक्रम की अध्यक्षता राजनीति विज्ञान विभाग की प्राध्यापक डॉ इला तिवारी ने की । इस अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग की प्राध्यापक डॉ पुष्पा तिवारी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। अमृत महोत्सव वर्ष व्याख्यान कार्यक्रम में महाविद्यालयीन छात्राओं की बड़ी संख्या में भागीदारी रही।

