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राजबाड़ालोहे की जंजीरों से कब होगा मुक्त

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इंदौर

विकास कामों को लेकर हमारे अफसर कितने लापरवाह हैं, इसका एक उदाहरण राजबाड़ा है। राजबाड़ा के जीर्णोद्धार का काम 2017 से चल रहा है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ है। जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति की फरवरी 2021 में हुई बैठक में कहा गया था कि काम समय पर पूरा हो जाना चाहिए। तब अफसरों ने 105 दिन यानी करीब साढ़े तीन महीने का वक्त मांगा था।

जब यह डेडलाइन बीत गई तो कहा कि कोरोना की वजह से काम लेट हुआ। मार्च 2022 के दूसरे सप्ताह में फिर बैठक हुई। सांसद शंकर लालवानी और कलेक्टर मनीष सिंह ने काम की नई डेडलाइन पूछी। सांसद ने स्मार्ट सिटी सीईओ को कहा कि पांच साल बाद भी काम पूरा क्यों नहीं हुआ। राजबाड़ा के आसपास लोहे का स्ट्रक्चर लगा होने से शहर की छवि खराब होती है।

बहानों में उलझे अफसर, कभी कोविड में मजदूर नहीं मिले, तो कभी इंजीनियर आने में देरी हुई

इस मामले में स्मार्ट सिटी के सीईओ ऋषव गुप्ता ने कहा कि हेरिटेज कंजर्वेशन में विशेष तकनीक और कार्ययोजना की आवश्यकता होती है। इस कारण यह काम समय पर पूरा नहीं किया जा सका। जून तक काम पूरा होना था, लेकिन मार्च में काेविड की दूसरी लहर के कारण कोरोना कर्फ्यू और लॉकडाउन के कारण देरी हुई। मजदूर आवश्यकतानुसार नहीं मिले।

कोशिश करते तो पिछले साल पूरा हो जाता काम

कोविड की दूसरी लहर का असर तीन महीने रहा। यदि सितंबर में भी काम शुरू होता तो दिसंबर तक चार महीने में काम पूरा हो जाता। अब फिर चार महीने मांगे गए हैं। इसी तरह वीर सावरकर मार्केट और खजूरी बाजार में पार्किंग का काम भी देरी से चल रहा है। अफसर इसका भी कोई जवाब नहीं दे पाए।

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