प्रदेश की लगभग सभी सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के द्वारा प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किए जाने से तस्वीर भी साफ हो गई है। लेकिन हम आपको एक ऐसी सीट के बारे में बताने जा रहे हैं जिस पर मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है। इसकी वजह चुनावी मैदान में उतरे भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशी का कट्टर विरोधी होना तो है ही साथ ही साथ दोनों का पार्टी बदलना भी है। यानी जो कभी कांग्रेस का उम्मीदवार था वो अब भाजपा का है और जो कभी भाजपा का उम्मीदवार था वो अब कांग्रेस का है।
बदनावर में बड़ा दिलचस्प मुकाबला
धार जिले की बदनावर विधानसभा सीट पर इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है। सीट पर हर किसी की जुबान पर एक ही बात है उम्मीदवार वही पार्टी नई। जिसकी वजह है भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों का पार्टी बदलना। इस सीट पर भाजपा के राजवर्धन सिंह और कांग्रेस के भंवर सिंह शेखावत चुनावी मैदान में हैं और इन दोनों के बीच ही मुख्य मुकाबला है। दिलचस्प बात ये है कि राजवर्धन सिंह और भंवर सिंह शेखावत दोनों चेहरे पर पुराने हैं पर पार्टियां नई-नई हैं। दरअसल साल 2018 के विधानसभा चुनाव में राजवर्धन सिंह कांग्रेस के उम्मीदवार थे और भाजपा उम्मीदवार रहे भंवर सिंह शेखावत को चुनाव हराकर विधायक बने थे। लेकिन बाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मिलकर बगावत करने वाले विधायकों के साथ राजवर्धन सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए थे। वहीं इसी साल भंवर सिंह शेखावत भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे।
दोनों के बीच तीसरा मुकाबला
भाजपा के राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और भंवर सिंह शेखावत के बीच ये तीसरा मुकाबला है। दोनों के बीच इससे पहले दो विधानसभा चुनावों में मुकाबला हो चुका है। साल 2013 के विधानसभा चुनावों में भंवर सिंह शेखावत ने कांग्रेस से उम्मीदवार रहे राजवर्धन सिंह दत्तीगांव को 9 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था तो वहीं साल 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार रहते हुए राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने हार का बदला भाजपा के भंवर सिंह को 41 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर लिया था।

