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‘बांग्लादेश में हो या भारत में, मॉब लिंचिंग स्वीकार्य नहीं – सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)’

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हाल में बांग्लादेश में एक हिंदू नागरिक तथा केरल में बांग्लादेशी होने के संदेह में पीट-पीटकर मारे गए राम नारायण बघेल की हत्या सभ्य समाज पर एक धब्बा है। अब तो यह तथ्य भी सामने आ चुका है कि मृतक राम नारायण बघेल एक हिंदू भारतीय नागरिक थे, जिन्हें भीड़ ने अंधे शक और नफरत के आधार पर मार डाला। भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेना घोर अपराध है और इसे किसी भी सूरत में सही ठहराया नहीं जा सकता।

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त करती है कि एक ओर भारत सरकार बांग्लादेश सहित अन्य देशों में हिंदुओं पर हो रहे हमलों का मुद्दा उठाती है, वहीं दूसरी ओर देश के भीतर ही अल्पसंख्यकों, दलितों और बांग्लाभाषी नागरिकों को “बांग्लादेशी” बताकर निशाना बनाया जा रहा है। यह दोहरा चरित्र न केवल पाखंडपूर्ण है बल्कि लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों के भी खिलाफ है।

हाल ही में बंगाल की एक महिला को दिल्ली से जबरन उठाकर बांग्लादेश भेज दिया गया, जबकि वह भारतीय नागरिक थी। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही उसकी वापसी संभव हो सकी। सवाल यह है कि बिना जांच, बिना प्रक्रिया और बिना मानवता के ऐसी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है?

असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार द्वारा बांग्लाभाषी मुसलमानों को विदेशी बताकर घरों पर बुलडोज़र चलाना और अब तथाकथित विदेशियों को 24 घंटे में “गायब होने” का आदेश देना खुला राज्य दमन है। यदि बांग्लादेश उन्हें स्वीकार नहीं करता तो वे कहाँ जाएँगे? क्या यह सरकार लोगों को देशविहीन बनाना चाहती है?

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) मांग करती है कि देश के भीतर मॉब लिंचिंग, पहचान के आधार पर उत्पीड़न और बिना न्यायिक प्रक्रिया की कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगे। पार्टी स्पष्ट करना चाहती है कि अल्पसंख्यकों को डराने और नफरत की राजनीति के ज़रिये सत्ता साधने की यह प्रवृत्ति उसे अस्वीकार्य है और संविधान, कानून और मानवता की रक्षा उसके संघर्ष का केंद्रीय सवाल है।

बसंत हेतमसरिया

राष्ट्रीय प्रवक्ता

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)

मो. 9934443337

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