भोपाल। हाल ही में उज्जैन संभाग उसके बाद इंदौर संभाग में हुई मौतो का कारण जहरीली शराब या नकली शराब माना जा रहा है। मगर इसकी पुष्टी किसी के पास नही है कि *जहरीली शराब है या शराब में जहर*। इंदौर में हुआ शराब सिंडिकेट का गोली कांड और आज पुलिस अधीक्षक इंदौर का प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी बयान, जिसमे उन्होंने बताया कि इंदौर में भारी मात्रा में ब्रांड की नकली शराब बिक रही है। इससे इस बात की तो पुष्टि होती ही है कि मौत चाहे शराब से हुई हो या नही, मगर नकली/ जहरीली शराब के कारोबार का इंदौर सहित कई नगरों में बोलबाला है! शराब दुकानों की मोनोपॉली व अन्य राज्यो की तुलना में अत्यधिक महंगी शराब मध्यप्रदेश में होने के कारण यहाँ अब शराब माफियाओ का गिरोह सक्रिय भूमिका में है और इनमें लिकर किंग पोंटी चड्डा बनने की होड़ जारी है। जिसका उदाहरण इंदौर जिले में हुई घटना है, जिसमे वर्चस्व की लड़ाई को लेकर गोलीकांड हुआ। हालांकि उक्त सभी मामले पुलिस सहित आबकारी विभाग के अधिकारी क्षेत्र का भी बनता है जहाँ विभाग की जिम्मेदारी अवैध व नकली शराब पर लगाम लगाना, जिले में अन्य जिलो की शराब का विक्रय रोकना आदि है इस सभी के लिए आबकारी विभाग के अधिकारियों पर गाज गिरना तय है मगर आबकारी विभाग से संबंधित मामला होने के बावजूद ना आबकारी विभाग के किसी अधिकारी को जांच टीम (एसआईटी)में स्थान मिलता है और ना ही पुलिस अधीक्षक अवैध शराब की सूचना देने हेतु स्वयं के अलावा किसी आबकारी अफसर का नम्बर जारी करते है।
नकली शराब का खेल शराब माफियाओ में पोंटी चड्डा बनने की होड़ तो नहीं!

