अग्नि आलोक

*मध्य प्रदेश का सबसे शिक्षित गांव कौन सा …यहां बच्चे से बडे़ सब पढ़े-लिखे, 100% साक्षरता*

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100 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ बघुवार गांव ने यह साबित कर दिया कि अगर इच्छा शक्ति और सामूहिक प्रयास हो तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं. यहां स्कूल से ड्रॉपआउट दर 0% है, यानी कोई भी बच्चा पढ़ाई बीच में नहीं छोड़ता. इसके पीछे गांव वालों की सोच और एकजुटता सबसे बड़ी ताकत है.

प्रदेश में जिले के आदर्श गांव बघुवार की पहचान कई दशकों से जल, शिक्षा, पर्यावरण और स्वच्छता के संस्कार देने वाले गांव के रूप में बनी है।जहां गांव की व्यवस्थित बसाहट, गांव के स्कूल, पंचायत भवन से लेकर अन्य सरकारी भवनों का स्वरूप स्वयं बयां करता है

प्रदेश में जिले के आदर्श गांव बघुवार की पहचान कई दशकों से जल, शिक्षा, पर्यावरण और स्वच्छता के संस्कार देने वाले गांव के रूप में बनी है।जहां गांव की व्यवस्थित बसाहट, गांव के स्कूल, पंचायत भवन से लेकर अन्य सरकारी भवनों का स्वरूप स्वयं बयां करता है कि गांव के इस आदर्श स्वरूप के लिए किस विचारधारा के जतन किए गए होंगे। बदलते वक्त के साथ अब इस गांव में भी बदलाव की चुनावी बयार बह रही है। पहली बार सामान्य महिला सीट आरक्षित होने से गांव की एक बेटी दीक्षा ने गांव की बागडोर संभालने छह वार्डों से पंच प्रत्याशी उतारने के साथ सरपंच पद की दावेदारी की है तो वहीं दूसरी ओर प्रीति चौहान जो गांव की बहू हैं वह दावेदार हैं। जिनके समर्थक सभी 12 वार्ड में पंच के प्रत्याशी हैं। दोनों दावेदारों के बीच ननद-भाभी का रिश्ता भी है।

बघुवार गांव की सफलता सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है. यहां स्वच्छता, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है. लोग जागरूक हैं और सामूहिक रूप से गांव के विकास की योजनाएं बनाते हैं. यही कारण है कि आज यह गांव पूरे मध्य प्रदेश के लिए “100% साक्षरता” की मिसाल बन गया है.

बघुवार गांव के स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ पोषण पर भी बराबर ध्यान दिया जाता है. मिड-डे मील के तहत पौष्टिक भोजन दिया जाता है, ताकि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास समान रूप से हो सके. यहां के शिक्षक भी गांव के ही पढ़े-लिखे युवा हैं, जो नई पीढ़ी को दिशा दे रहे हैं

गांव में शिक्षा को मनोरंजन से जोड़ने के लिए भी कई नवाचार किए गए हैं. धामनी नदी के किनारे ग्रामीणों ने एक मिनी स्पोर्ट्स स्टेडियम, इनडोर हॉल और स्विमिंग पूल का निर्माण कराया है. इससे बच्चों में खेलों के प्रति रुचि और अनुशासन दोनों बढ़े हैं.

बघुवार गांव की दीवारों पर रंग-बिरंगे शैक्षिक चित्र बनाए गए हैं, जिनसे बच्चों को रोज कुछ नया सीखने को मिलता है. ये चित्र गांव की सुंदरता भी बढ़ाते हैं और संदेश भी देते हैं कि “सीखना कभी बंद मत करो.”

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