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अपनी पत्नी के जेवर गिरवी रखते वक्त पुरुष का आत्मसम्मान भी गिरवी हो जाता है… क्या यही नए भारत के निर्माण की परिकल्पना है?-वरुण गांधी

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लखनऊ

उत्तर-प्रदेश में विधानसभा चुनाव केबीच वरुण गांधी ने गोल्ड लोन नहीं चुकाने पर हुई गहनों की नीलामी पर सरकार को निशाने पर लिया है। दैनिक भास्कर की खबर का हवाला देते हुए वरुण गांधी ने अपनी ही सरकार पर निशाना साधते हुए कहा- क्या यही नए भारत के निर्माण की परिकल्पना है?

वरुण गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा, “अपनी पत्नी के जेवर गिरवी रखते वक्त पुरुष का आत्मसम्मान भी गिरवी हो जाता है। किसी भी हिंदुस्तानी का जेवर या मकान गिरवी रखना अंतिम विकल्प होता है। महामारी और मंहगाई की दोहरी मार झेल रहे आम भारतीयों को यह असंवेदनशीलता अंदर तक तोड़ देगी। क्या यही नए भारत के निर्माण की परिकल्पना है?”

वरुण गांधी ने गोल्ड लोन नहीं चुकाने पर हुई गहनों की नीलामी पर सरकार को निशाने पर लिया है।

नीलाम होगा एक लाख लोगों का सोना

दैनिक भास्कर ने अपनी खबर में बताया है कि किस तरह गोल्ड लोन लेकर समय पर न चुकाना करीब एक लाख परिवारों को भारी पड़ेगा। दरअसल, बुधवार को गोल्ड लोन देने वाले NBFC और बैंक सोना नीलाम करने जा रहे हैं। संगठित गोल्ड लोन बाजार में आधे से अधिक हिस्सा गोल्ड लोन NBFC मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस का है। ये ऐसे परिवार हैं, जिन्होंने सोना गिरवी रखकर कर्ज लिया, लेकिन समय पर चुका नहीं पाए।गोल्ड लोन सोने के गहनों के बदले दिया जाता है। गहने की कीमत का करीब 70 फीसदी तक लोन मिलता है। इस मामले में कर्जधारक के लिए लोन मिलना जितना आसान है, उतना ही आसान कर्ज देने वाले के लिए इसकी वसूली है। डिफॉल्ट करने पर वह सोना बेचकर कर्ज वसूल लेते हैं।

कोरोना की दूसरी लहर ने छीना लोगों की नौकरी और रोजगार

अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार कहते हैं, लोग लोन तभी लेते हैं जब उन्हें वित्तीय आवश्यकता होती है। कोरोना की दूसरी लहर में कई लोगों की नौकरी और रोजगार छिन गए। बीमारी में भी काफी पैसा खर्च हुआ। प्राइस का सर्वे बताता है कि 2016 के मुकाबले देश के 60 फीसदी निचले तबके की आय गिरी है। यही तबका सबसे अधिक गोल्ड लोन लेता है। अब आमदनी न होने से कर्ज चुका नहीं पा रहे हैं। यह माइक्रो लेवल पर आर्थिक तंगी को दर्शाता है।

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