बसंत पंचमी के दिन शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट बदल ली. मैदानी इलाकों में बारिश तो पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो गई, जिससे पहाड़ों पर मोटी सफेद चादर बिछ गई. बारिश और बर्फबारी से सर्दी का सितम पूरे उत्तर भारत पर टूट पड़ा. लोग ठिठरने लगे. हालांकि पहाड़ी राज्य तो गुलजार हो गए. क्या उत्तराखंड, क्या हिमाचल प्रदेश क्या जम्मू-कश्मीर, सभी जगह बर्फबारी ने पर्यटकों का पैसा वसूल कर दिया. इन राज्यों में वादियों और बर्फबारी का मजा लेने आए पर्यटक खूब मस्ती करते दिखाई दिए. सभी ने स्नोफॉल का जमकर आनंद उठाया. स्नोफॉल के फोटो-वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं.
सबसे पहले बात करें उत्तराखंड की तो यहां नैनीताल, मसूरी, धनोल्टी, चकराता, औली, गंगोत्री, टिहरी और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जमकर बर्फबारी हुई. सरोवर नगरी के नाम से मशहूर नैनीताल में बर्फबारी ने सभी के चेहरों पर रौंनक ला दी. नैनीताल के मुक्तेश्वर, रामगढ़ सहित उंचाई वाले इलाकों हो रही बर्फबारी से शांत पड़े पर्यटन को नई रफ्तार मिल गई. स्थानीय लोग काफी खुश दिखाई दिए. उन्होंने कहा कि अब पर्यटक यहां आएंगे तो उनका व्यापार चल पड़ेगा.
बर्फबारी का आनंद ले रहे पर्यटक
वहीं आज दिन भर मसूरी, धनोल्टी, चकराता, औली, गंगोत्री टिहरी और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रुक-रुक कर बर्फबारी होती रही. मसूरी के कंपनी गार्डन, कैम्पटी फॉल रोड और मॉल रोड के आसपास बर्फ की परत जमने से नजारा पूरी तरह बदल गया. स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटक भी इस मौसम का भरपूर आनंद ले रहे हैं.
इसके साथ ही चारों धाम में सबसे प्रसिद्ध बाबा केदारनाथ धाम में भी सुबह से बर्फबारी हो रही है. बाबा केदारनाथ बंसत पंचमी के शुभ अवसर पर बर्फबारी में नहाते दिखाई दिए. खाली होती हिमलाय की चोटियों में एक बार फिर बर्फ का दीदार होने से वैज्ञानिकों के चेहरे भी खिल उठे. अगर समय रहते बर्फबारी और बारिश नहीं होती तो बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता था.
मनाली और कुल्लू में भारी बर्फबारी
बात अगर हिमाचल प्रदेश की करें तो यहां राजधानी शिमला के साथ-साथ मनाली, नारकंडा, कुफरी, चायल, डलहौजी जैसे रिहायशी इलाकों में खूब बर्फ गिरी. मनाली और कुल्लू में तो 10 से 15 इंच तक बर्फ गिरी है. इन दोनों जगहों पर पर्यटक खूब आते हैं. यहां इस सीजन की पहली बर्फबारी है. शिमला में बर्फीले तूफान ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं. हालांकि पर्यटन कारोबारियों और पर्यटकों दोनों के चेहरे खिल गए. IMD शिमला की ओर से आज कई इलाकों में भारी बारिश-बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया. कई इलाकों के लिए येलो अलर्ट है.
कश्मीर में बर्फ की मोटी चादर बिछी
वहीं जम्मू-कश्मीर में तो बर्फबारी से जनजीवन काफी प्रभावित हुआ है. रामबन, डोडा, किश्तवाड़, पुंछ, राजोरी, रियासी, उधमपुर और कठुआ जिलों में दिनभर बर्फबारी हुई. यहां 5 इंच से लेकर एक फीट से अधिक तक बर्फ जम चुकी है. वहीं कश्मीर में तो बर्फ की मोटी चादर बिछ गई, जिसे देख पर्यटक खुशी से झूम उठे. श्रीनगर में आठ इंच तक बर्फ गिरी है. गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम जैसे पर्यटन स्थलों में बर्फ की मोटी परत जम गई है. सड़कें बंद हो गईं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ. हालांकि बर्फबारी से स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है. वजह कि टूरिस्ट यहां आएंगे.
वैष्णो देवी यात्रा स्थगित
मनाली से कश्मीर तक पर्यटक बर्फबारी के मजा ले रहे हैं. हालांकि, बर्फबारी ने मुश्किलें भी बढ़ाई हैं. वैष्णों देवी की यात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी गई है. कश्मीर के अनंतनाग में बिजली का संकट पैदा हो गया है. कश्मीर से कईउड़ानें रद्द की गई हैं. हाईवे बंद किया गया है. अब सवाल है कि आखिर बर्फबारी कैसे होती है और हवा में बर्फ कैसे बन जाती है?शिमला-मनाली हो या कश्मीर, हर तरफ बर्फबारी शुरू हो गई है. पहाड़ी इलाकों में बर्फ की चादर बिछी हुई है. सबसे ज्यादा असर कश्मीर में दिख रहा है जहां लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. सड़क और हवाई यातायात पर सबसे बड़ा असर दिखा. श्रीनगर एयरपोर्ट पर 26 उड़ानें रद्द की गई हैं. जम्मू-कश्मीर नेशनल हाइवे बंद कर दिया गया है. बर्फबारी और तेज हवाओं ने अनंतनाग के हिस्सों में बिजली व्यवस्था को प्रभावित किया है. भारी बारिश और बर्फबारी के कारण वैष्णों देवी की यात्रा को कटरा में रोक दिया गया है.

सर्दी का आधा सीजन बीत चुका है और अब बर्फबारी की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. अब सवाल है कि हवा में आखिर कैसे बर्फ बन जाती है, क्या कहता है इसका साइंस?
कैसे बनती है बर्फ?
बर्फबारी क्यों और कैसे होती है? आसान भाषा में समझें तो ऐसा तब होता है जब हवा, नमी और ठंड, तीनों एक साथ सही कॉम्बिनेशन में हों. बर्फबारी के लिए पहले बादलों का होना भी जरूरी है. बादल कैसे बनते हैं, पहले इसे समझ लेते हैं.धरती से गरम हवा ऊपर उठती है और वायुमंडल में जाकर ठंडी होती है. हवा में मौजूद पानी की भाप छोटी-छोटी बूंदों में बदल जाती है. यही बूंदें यही मिलकर बादल बनाती हैं.
शिमला में बर्फबारी.
अमेरिका का नेशनल स्नो एंड आइस डाटा सेंटर कहता है, बर्फ गिरने के लिए वायुमंडल में नमी का होना जरूरी है. यह तापमान पर भी बहुत हद तक निर्भर करती है, लेकिन जरूरी नहीं कि यह वही तापमान हो जो हमें जमीन पर महसूस होता है. बर्फ तब बनती है जब वायुमंडल का तापमान हिमांक बिंदु (0°C या 32°F) पर या उससे नीचे होता है. यदि जमीन का तापमान हिमांक बिंदु (0°C या 32°F) पर या उससे नीचे है, तो पानी की बूंदें जमकर बर्फ के कण में बदल जाती हैं औरबर्फ जमीन तक पहुंचने लगती है.
Vaishno Devi Yatra in Jammu & Kashmir has been suspended after heavy rainfall at Katra and snowfall at Bhawan. Beautiful pictures from Bhawan. Jai Mata Di! pic.twitter.com/QVQxzDeVAF
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) January 23, 2026
हालांकि, यदि परिस्थितियां अनुकूल हों, तो हिमांक बिंदु से ऊपर के तापमान पर भी बर्फ जमीन तक पहुंच सकती है. इस स्थिति में, बर्फ के कण जैसे ही इस उच्च तापमान वाली परत तक पहुंचते हैं, पिघलना शुरू हो जाते हैं. पिघलने से वाष्पीकरण होता है और ठंडक बढ़ती है. जो बर्फ के कण के आसपास की हवा को तुरंत ठंडा कर देती है.
पहाड़ों पर बर्फबारी का हाल.
विज्ञान कहता है कि अगर जमीन का तापमान कम से कम 5°C (41°F) हो तो बर्फ नहीं बनती है. हालांकि बर्फबारी के लिए बहुत गर्म मौसम हो सकता है, लेकिन बर्फबारी के लिए बहुत ठंडा मौसम नहीं हो सकता. बर्फ बेहद कम तापमान पर भी गिर सकती है, बशर्ते नमी का कोई स्रोत हो. अंटार्कटिका की शुष्क घाटियां महाद्वीप का सबसे बड़ा बर्फ़-मुक्त भाग है।. शुष्क घाटियां काफ़ी ठंडी होती हैं, लेकिन यहां आर्द्रता बहुत कम होती है, और तेज हवाएं हवा से बची हुई नमी को भी सोख लेती हैं. नतीजा, इस अत्यधिक ठंडे क्षेत्र में बहुत कम बर्फ़बारी होती है.