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आपके वार्ड से कौन जीत रहा है? महापौरकौन बनेगा?

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इंदौर। क्यों आपके वार्ड से कौन जीत रहा है? महापौरकौन बनेगा? नेहरू स्‍टेडियम के स्ट्रांग रूम में ईवीएम मशीन के जमा होने के बाद से ही शहर के हर नुक्कड़ और चौराहे पर यही दो सवाल चर्चा में है। हर व्यक्ति राजनीतिक विश्लेषक की तरह इसका विश्वलेषण कर रहा है। भाजपा पार्षदों से नाराजगी की बात सामने आ रही है। इसीलिए कांग्रेस पार्षदों की संख्‍या बढ़ना तय माना जा रहा है। वहीं महापौर के मामले में बीजेपी भारी है। क्योंकि पिछले चुनाव में भी कई ऐसे वार्डों में मालिनी गौड़ चुनाव जीती थी, जहां उनके पार्षद चुनाव हार गए थे।

राजनीति विश्लेषकों की मानें तो भाजपा के 27 वार्डों में जीत का समीकरण बिगाड़ दिया है। यहां पर वोटों का प्रतिशत पिछले बार से 5 से 10 प्रतिशत तक नीचे चला गया है तो दूसरी ओर मुस्लिम क्षेत्र के 9वार्डों में हुए 60 से 65 प्रतिशत मतदान का लाभ पूरी तरह कांग्रेस को ही मिल रहा है। हालांकि मुस्लिम क्षेत्रों में सपा, बसपा, आप और बागी प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से कांग्रेस के प्रत्‍याशियों की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है। मगर, यहां से कांग्स महापौर को लीड मिलना तय है। इन 9 को छोड़कर 48 वार्डों में 60 से 70 प्रतिशत के बीच वोटिंग हुई है। जहां भाजपा की स्थिति अच्छी है। इंदौर-2 जैसे भाजपा के गढ़ में वार्ड-29 और 31 में 50 प्रतिशत से कम और दो वार्डों 19 और 30 में 55 प्रतिशत तक वोटिंग हुई है।

कम वोटिंग की वजह मतदान पर्चियों में गड़बड़ को बताया जा रहा है, इसीलिए यहां भी भाजपा को कम वोटिंग के बावजूद नुकसान नहीं होगा। नुकसान होगा भी तो पार्षद को जो बाहरी के विषय पर जनता के निशाने पर है। 21 वार्डों में 55 से 60 प्रतिशत मतदान हुआ है। इनमें कई जगह भाजपा प्रत्याशियों की स्थिति कमजोर है। 57 वार्डों में 60 फीसदी से अधिक मतदान हुआ है। जिससे भाजपा आशान्वित हैं और कांग्रेस उम्‍मीद से। बहरहाल, 2022 के नगर निगम चुनाव के लिए 2015 चुनाव के परिणामों का एनालिसिस करना जरूरी है।

यह ऐतिहासिक चुनाव थे। जब वार्ड-66 और वार्ड-71 में निर्विरोध पार्षद चुने गए। नौ ऐसे वार्ड थे, जहां भाजपा का पार्षद प्रत्याशी हारा लेकिन वहां मालिनी गौड़ चुनाव जीती। सबसे पहले बात इंदौर- 1 के अंतर्गत आने वाले वार्ड-17 की। जहां विद्या कुशवाह को 76 वोटों से हराकर पार्वती कुशवाह ने 2015 की सबसे छोटी जीत दर्ज की थी। इस वार्ड से मालिनी गौड़ को 3024 वोटों की लीड मिली। वार्ड-9 में कांग्रेस की निता तिवारी ने 748 वोटों से सुशीला वाजपेयी को हराया था जबकि महापौर प्रत्याशी के खाते में गए थे 2630 ज्यादा वोट।

वार्ड-21 में कांग्रेस की माधवी चौकसे ने पुनिया उमाशंकर तरेटिया को 379 वोटों से हराया था जबकि गौड़ को लीड मिली 2630 वोटों की। वार्ड-55 में छोटे यादव जैसे बड़े नेता 1126 वोटों से जीते थे लेकिन महापौर की कांग्रेस प्रत्‍याशी की 2510 वोटों से हार टाल नहीं सके। इसी तरह वार्ड-76 में कांग्रेस की चंद्रकला मालवीय 369 वोटों से जीती लेकिन मालिनी के मुकाबले कांग्रेस प्रत प्रत्‍याशी 505 वोटों से हार गई। इसी तरह वार्ड-26 में निर्दलीय यशोदा धीमान ने भाजपा की लक्ष्मी रठ्ठा को 2597 वोट से हराया था, जबकि मालिनी गौड़ ने 2994 वोटों की बढ़त ली। वार्ड-62 में जगदीश धनेरिया 129 वोटों से जीते थे जबकि गौड़ को 4458 वोट ज्यादा मिले

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