प्रयागराज महाकुंभ मेला 2025 में मौनी अमावस्या से पहले संगम नोज पर मची भगदड़ की घटना के बाद से पूरे प्रदेश का प्रशासन अलर्ट मोड पर है। प्रयागराज की सीमाओं को सील कर दिया गया है।महाकुंभ में मौनी अमावस्या के स्नान के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ने से मची भगदड़ में 25 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. ये जानकारी सूत्रों के हवाले से निकलकर सामने आ रही है. हालांकि ये आधिकारिक आंकड़े नहीं हैं. यह संख्या बढ़ भी सकती है. ज्यादातर प्रयागराज जाने वाले वाहनों को अलग-अलग जिलों में रोक लिया गया है। लेकिन अभी तक प्रशासन ये नहीं बता सका है कि संगम हादसे में कितने लाेगों की मौत हुई, कितने घायल हैं?
महाकुंभ में मौनी अमावस्या के स्नान के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ने से मची भगदड़ में 25 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. ये जानकारी सूत्रों के हवाले से निकलकर सामने आ रही है. हालांकि ये आधिकारिक आंकड़े नहीं हैं. यह संख्या बढ़ भी सकती है. माना जा रहा है कि मेला प्रशासन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आधिकारिक आंकड़ा पेश कर सकता है. बता दें कि घायलों का इलाज मोतीलाल मेडिकल कॉलेज में किया जा रहा है.

मौनी अमावस्या से पहले देर रात संगम पर हादसा हो गया। यहां भारी भीड़ में भगदड़ मची। जिसमें कई लोग घायल हो गए और वहीं कुछ मौतों की भी खबर है। प्रशासन की तरफ से अभी मौतों पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। चौंकाने वाली बात ये है कि हादसे के 12 घंटे से ज्यादा बीत जाने के बाद भी अभी तक हताहत लोगों की संख्या नहीं बताई जा सकती है।
सोशल मीडिया पर पीड़ितों के तमाम बयान लोग शेयर कर रहे हैं। इन्हीं में से एक शख्स का वीडियो वायरल हो रहा है, जाे कह रहा है, “हम 7 आदमी हैं, 9 आदमी थे, दो आदमी मर गया राम अवध शर्मा और गुलइचा देवी। जब पूछा गया कब? तो वह कहता है अभी एक घंटा पहले। वह कहता है कि 112 पर फोन किया, कोई नहीं उठाया। 100 पर किया कोई नहीं उठाया। बॉडी वहीं पर है। पुलिस थी, कोई बोला ही नहीं, बोला- बढ़ो, बढ़ो, बढ़ो।”
ऐसे ही तमाम लोगों के वीडियो सामने आ रहे हैं। यह हृदयविदारक तस्वीर देखकर आज हर कोई स्तब्ध है। अब सवाल ये है कि इस महा आयोजन के लिए पूरे सरकारी अमले की ताकत लगा दी गई फिर कमी कहां रह गई? इस हादसे के बाद से कुछ सवाल लोगों के जेहन में उठ रहे हैं।
संगम नोज पर इतनी भीड़ पहुंची कैसे?
दावा किया गया था कि महाकुंभ 2025 को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस, कुम्भ मेला पुलिस, एनएसजी, एटीएस, एनडीआरएफ, और अन्य पैरामिलिट्री फोर्सेज ने सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लगातार मॉक ड्रिल का अभ्यास कर रहे हैं। जाहिर है सभी टीमें और पुलिस फोर्स जानती थीं कि करोड़ों लोगों की भीड़ सबसे ज्यादा संगम स्नान के लिए संगम नोज की तरफ ही आएगी।
संगम नोज एक ऐसी जगह है। जहां से वापस लौटना होता है। मौनी अमावस्या कुंभ का सबसे बड़ा स्नान माना जाता है। इसका पौराणिक महत्व है। ऐसे में ये अंदाजा क्यों नहीं लगाया गया कि कई ऐसे भी लोग होंगे जो देर रात ही संगम पर पहुंच जाएंगे और वह मौनी अमावस्या के मुहूर्त पर स्नान करने का इंतजार वहीं करेंगे। संगम नोज पर भीड़ के दबाव का आंकलन कौन कर रहा था? क्या पीछे दूसरे सेक्टरों में तैनात टीमों को इसकी सूचना दी गई कि भीड़ यहां बढ़ रही है। कृपया आने वाली भीड़ को कंट्रोल करें। ये जांच का विषय है।
ये बात इसलिए है क्योंकि सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल है। ये वीडियो है मेला क्षेत्र के कमिश्नर विजय विश्वास पंत का। ये भगदड़ से पहले का वीडियो बताया जा रहा है। इसमें कमिश्नर साहब हाथ में माइक लेकर लोगों से अपील कर रहे हैं कि यहां लेटे रहने से फायदा नहीं है। उठिए स्नान कीजिए। यहां बहुत से लोग अभी आएंगे भगदड़ मचने की संभावना है। आप पहले से आ गए हैं, आपको अब अमृत स्नान कर लेना चाहिए। उठकर स्नान कर लें। बताया जाता है कि कमिश्नर साहब की अपील के बावजूद लोग वहां से नहीं हटे। संगम नोज पर ही कई लोग लेटे हुए थे। रात एक से डेढ़ बजे अचानक दबाव बढ़ा और भगदड़ मच गई। सवाल ये है कि पूरा प्रशासनिक अमला इस आने वाले संकट को भांपते हुए भी क्या कर रहा था?
श्रद्धालु कितने घायल हुए, कितनों की मौत हुई? कौन बताएगा
हादसे के बाद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील भी की है कि संगम पर भीड़ का दबाव काफी ज्यादा, मेला क्षेत्र में भीड़ को देखते हुए जो भी श्रद्धालु जहां हैं, वह वहीं पास के गंगा घाट पर स्नान कर ले। मौनी अमावस्या पर स्नान का ही महत्व है। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह भी सीएम योगी से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना भी जाहिर की है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर मौतें हुई कितनी हैं? दिक्कत ये है कि मेला प्रशासन लगातार ये आंकड़े तो जारी कर रहा है कि इतने करोड़ लोगों ने स्नान कर लिया। लेकिन ये बताने वाला कोई नहीं है कि घायलों और मृतकों की संख्या कितनी है?
कुंभ मेला एसएसपी राजेश द्विवेदी के बयान से ही अंदाजा लगा लीजिए। वह कहते हैं कि कोई भगदड़ नहीं हुई। अधिक भीड़ थी जिसके कारण कुछ श्रद्धालु घायल हो गए। किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। जब उनसे पूछा गया कि हादसे में घायलों और मृतकों की संख्या क्या है इस पर एसएसपी ने कहा कि अभी ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। जिला पुलिस से इससे बेहतर जानकारी मिल पाएगी। फिलहाल हम यहां की व्यवस्था देख रहे हैं। मेरे पास मृतकों की संख्या नहीं है।
हादसे के बाद ही हम क्यों जागते हैं?
महाकुंभ की शुरुआत से पहले से ही सरकार की तरफ से दावा किया जा रहा था कि इस बार रिकॉर्ड संख्या में करोड़ों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाएंगे। खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मौनी अमावस्या से पहले तक ही 10 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। पूरे आयोजन की समाप्ति तक यहां दुनिया के जितने लोग स्नान करेंगे, वो भारत और चीन की जनसंख्या के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आबादी होगी। जाहिर है इतनी बड़ी संख्या एक जगह पहुंचेगी तो उस जगह दबाव बढ़ ही जाएगा।
अब संगम हादसे के बाद सब एक्टिव हो गए हैं। प्रयागराज में भीड़ का दबाव कम करने के लिए जिले की सीमाएं सील की जा रही हैं। कई मेला स्पेशल ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोकना पड़ा है। हाइवे के हालात ये हैं कि प्रयागराज आने वाले श्रद्धालु वाराणसी और अयोध्या भी दर्शन करने जा रहे हैं। कई जिलों में लोकल ट्रैफिक के साथ बाहर से आने वाली भीड़ के दबाव में सड़कें जाम हैं। राम मंदिर ट्रस्ट ने तो अयोध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ देखते हुए अपील तक जारी कर दी है कि जो आसपास के लोग हैं वह कृपया 15 से 20 दिन बाद राम मंदिर दर्शन करने आएं। अब प्रयागराज में हादसा होने के बाद से अलग-अलग जिलों में जिस तरह की मुस्तैदी देखी जा रही है। बाहर से आने वाली बसों को रोक दिया जा रहा है। वो हादसे से पहले क्यों नहीं दिखीं?
संगम नोज और उसका महत्व क्या है, जानिए
संगम नोज प्रयागराज का वह पवित्र स्थल है, जहां गंगा, यमुना और अदृश्य नदी सरस्वती का मिलन होता है. इस जगह को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए संगम नोज पर स्नान करना सबसे पवित्र और पुण्यदायक माना जाता है.
प्रयागराज में संगम की रेती पर लगे महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर तीसरे शाही स्नान (अमृत स्नान) के लिए श्रद्धालुओं की विकराल भीड़ पहुंची, यह भीड़ सबसे ज्यादा संगम नोज पर उमड़ी. भीड़ का रेला बढ़ता रहा और स्नान कर लौट रहे लोगों की वजह से संगम नोज पर बड़ा हादसा हो गया.
संगम नोज का विस्तार काफी बड़े क्षेत्रफल में है. संगम पर प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान मंदिर से आगे बढ़ने पर जो घाट मिलता है, वही संगम नोज है. इसके क्षेत्रफल को हर बार महाकुंभ के दौरान बढ़ाया जाता है, ताकि अधिक श्रद्धालुओं को स्नान की सुविधा दी जा सके. इस बार संगम नोज के क्षेत्र को इतना बड़ा किया गया था कि हर घंटे दो लाख लोगों के स्नान की व्यवस्था की गई थी, जबकि 2019 के कुंभ में यह क्षमता 50 हजार लोगों प्रति घंटे तक सीमित थी.
संगम नोज पर क्यों मची भगदड़?
मौनी अमावस्या के दिन देर रात एक बजे तक संगम नोज पर श्रद्धालुओं की संख्या अचानक से बढ़ने लगी. लाखों लोग इस पवित्र स्थल पर स्नान करना चाहते थे, लेकिन भारी भीड़ के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई. क्राउड मैनेजमेंट फेल होता नजर आया और श्रद्धालुओं के बीच धक्का-मुक्की के कारण भगदड़ मच गई.
प्रशासन ने तुरंत कई रास्तों को खोलकर भीड़ को दूसरी तरफ डायवर्ट करने की कोशिश की, लेकिन तब तक इस हादसे में कई लोग जान गवां चुके थे. इस घटना के बाद प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती और लोगों को संगम नोज की ओर जाने से रोकने की अपील की.
सीएम योगी और साधु-संतों की अपील
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख जताते हुए श्रद्धालुओं से अपील की कि वे संगम नोज जाने से बचें. उन्होंने कहा, “मां गंगा के जिस घाट के पास हैं, वहीं स्नान करें. प्रशासन द्वारा बनाए गए अन्य स्नान घाटों का उपयोग करें. किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें.”
इस घटना को देखते हुए अखाड़ा परिषद ने स्नान स्थगित कर दिया और कहा कि जब भीड़ छंट जाएगी तब वह स्नान करेंगे. साधु-संतों ने भी भक्तों से आग्रह किया कि वे संगम नोज पर अनावश्यक भीड़ न करें और अन्य घाटों पर स्नान कर पुण्य लाभ लें.
कैसे हुआ हादसा
घटना के वक्त मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी जितेंद्र गोस्वामी ने बताया कि सभी लोग अमृत स्नान के लिए आगे बढ़ रहे थे. उसमें से कुछ लोग सोच रहे थे कि हम शाही स्नान मुख्य समय (सुबह 3-4 बजे) पर नहाएंगे. इसी के चलते कुछ लोग इधर-उधर खड़े हो गए और कुछ लोग बैठ गए. यहां बैठकर लोग मुहूर्त का इंतजार कर रहे थे. एक ही रास्ते से लोग कुछ लोग नहाने जा रहे थे और कुछ लोग स्नान के बाद वापस आ रहे थे. इसी दौरान भीड़ एकत्रित हो गई. इसी दौरान धक्का-मुक्की होने लगी.
जितेंद्र ने बताया कि इसी दौरान कई महिलाएं चिल्ला रही थी. एक महिला का 3 साल का बच्चा खो गया. एक बच्चे की मां भी खो गई. हादसे की वजह पर प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि व्यवस्था अच्छी थी लेकिन लोगों की भी गलती रही है. प्रशासन ने आने और जाने का रास्ता अलग बनाना चाहिए था.
सुरक्षा बलों ने स्थिति संभाली
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और फायर ब्रिगेड की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं. संगम क्षेत्र में पहले से मौजूद ऑल-टेरेन फायर सर्विस व्हीकल की मदद से कई घायलों को सुरक्षित निकाला गया. मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) भरतेंदु जोशी ने बताया कि यह वाहन घटनास्थल पर मौजूद था, जिससे राहत कार्य बिना देरी के आरंभ किया जा सका. एक बच्ची को सुरक्षित निकालकर तत्काल एंबुलेंस तक पहुंचाया गया.
अमृत स्नान स्थगित, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
भगदड़ के बाद प्रशासन स्थिति को सामान्य करने में जुटा हुआ है. महंत राजू दास ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि उनके अखाड़े का अमृत स्नान सुबह 8:30 बजे निर्धारित था, लेकिन प्रशासन से बातचीत के बाद इसे रद्द करने का निर्णय लिया गया है.
हालांकि अब अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज का अभी बयान आया है, उन्होंने कहा है कि अब भीड़ कम हो गई है, जहां हमें स्नान करना था वो खाली कराए जा रहे है. ऐसा लग रहा है कि हम स्नान करेंगे. उन्होंने कहा कि सभी अखाड़ों का जूलुस निकलेगा, लेकिन बड़ा जूलुस नहीं निकलेगा.
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और राहत कार्य तेजी से जारी है. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा रही हैं तथा श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है.