एस पी मित्तल, अजमेर
नगर निगम के पिछले कार्यकाल में जब धर्मेन्द्र गहलोत मेयर थे तब यह आरोप लगते रहे कि निगम की मिलीभगत से आवासीय भूखंडों पर व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स बन रहे हैं। हालांकि ऐसे आरोपों का गहलोत ने तकनीकी आधार पर जवाब भी दिया। लेकिन पिछले एक वर्ष से नगर निगम में नया बोर्ड है और ब्रज लता हाड़ा इस बोर्ड की अध्यक्ष हैं। लेकिन आवासीय भूखंडों पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनने का काम बदस्तूर अभी भी जारी है। सवाल उठता है कि जब आवासीय भूखंड पर व्यवसायिक निर्माण हो रहा होता है तब निगम के अधिकारी कार्यवाही क्यों नहीं करते? कोई भी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स दो वर्ष से काम अवधि में नहीं बनता है। निगम के अधिकारी दो वर्ष तक तो आंखें बंद कर बैठे रहते हैं, लेकिन जब कॉम्प्लेक्स में कारोबार शुरू हो जाता है तब नोटिस देकर सीज करने की कार्यवाही करते हैं। अच्छा हो कि निगम के अधिकारी आवासीय भूखंड पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनने ही नहीं दें, लेकिन जानकारों की माने तो निगम के अधिकारी अपने संरक्षण में ही व्यवसायिक निर्माण होने देते हैं। स्वभाविक है कि जब गैर कानूनी निर्माण होता है तो अधिकारियों को नजरा भी मिलता रहता है। कॉम्प्लेक्स सीज होने के बाद संबंधित व्यक्तियों को अनेक परेशानी से गुजरना पड़ता है। कॉम्प्लैक्स को सीज मुक्त करने का काम अब स्वायत्त शासन विभाग ने अपने पास ले लिया है। अजमेर के जिन लोगों ने अपने कॉम्प्लेक्स सीज मुक्त करवाए हैं उन्हें पता है कि सरकार में किस तरीके से सीज मुक्त की कार्यवाही होती है। यानी एक भूखंडधारी पहले निर्माण की एवज में नजरा दे और फिर सीज मुक्ति के लिए थैला भरकर जयपुर पहुंचे। असल में अजमेर में तथा कथित मास्टर प्लान के नाम पर आवासीय भूखंड का भू-रूपांतरण कमर्शियल हो ही नहीं रहा है। यदि आवासीय भूखंडों को सरलता के साथ कमर्शियल भूखंड में बदल दिया जाए तो किसी भी मालिक को अवैध निर्माण करने की जरूरत ही नहीं होगी। मौजूदा समय में राज्य में कांग्रेस की सरकार है और कांग्रेस के पार्षदों का भी यह दायित्व है कि आवासीय भूखंडों को कमर्शियल भूखंडों में बदलने की प्रक्रिया को सरल कराए। इससे भ्रष्टाचार से भी मुक्ति मिली सकती है। यह माना जाता है कि कोई भी महिला अधिकारी अथवा जनप्रतिनिधि ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करती हैं। अजमेर नगर निगम में मेयर के पद पर श्रीमती ब्रज लता हाड़ा विरामान हैं और निगम के कई महत्वपूर्ण पदों पर महिला अधिकारी नियुक्त हैं। श्रीमती हाड़ा के नेतृत्व में चल रहे नगर निगम से यह अपेक्षा की जाती है कि उसमें भ्रष्टाचार नहीं होना चाहिए।
अजमेर नगर निगम के अधिकारी व्यावसायिक निर्माण के समय कार्यवाही क्यों नहीं करते?

