भोपाल। जबसे शिवराज सिंह ने इस प्रदेश की सत्ता की कमान संभाली है तबसे लेकर आज तक ऐसे कई उदाहरण हैं जिनकी वजह से शिवराज सरकार की कार्यशैली लोगों की समझ में नहीं आती है यही नहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके सहयोगियों की मेहरबानी से चौथी बार सत्ता पर काबिज होने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुखाग्रबिन्द से एक बार नहीं अनेकों बार इस प्रदेश के जनमानस को यह सुनने को मिला कि उनके राज्य में भ्रष्ट राजनेता और अधिकारियों की कोई जगह नहीं है, यही नहीं आये दिन उनके मुखाग्रबिन्द से इस प्रदेश के लोगों को यह सुनने को मिलता है कि अबकी बार हम अक्सर मूड में हैं, माफियाओं को दस फीट जमीन के अंदर गाड़ देेंगे? लेकिन जबसे उनके मुखाग्रबिन्द से निकले इन शब्दों को लोगों ने सुना तबसे लेकर आज तक ऐसा कोई अवसर इस प्रदेश के जनमानस के सामने आया हो जिसमें इस प्रदेश में राजनैतिक और प्रशासनिक संरक्षण में धड़ल्ले से कर रहे अवैध शराब के कारोबारी रेत माफियाओं ही नहीं बल्कि वन माफिया के साथ-साथ अब तो कोरोना महामारी के संक्रमण के इस काल में लॉकडाउन अवधि के दौरान कोरोना पीडि़तों को उपलब्ध कराई जानेवाली दवाओं वेेंटिलेटरों, व वैक्सीन सहित कोरोना से ग्रस्त लोगों के लिये रामबाण कहे जाने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन भी राजधानी के हमीदिया अस्पताल से चोरी होने की घटना के प्रकाश में आते ही प्रदेश की राजनीति में खूब बवाल मचा था, लेकिन आखिर वह इंजेक्शन किसने चोरी कराए थे और किसकी शह पर चोरी किए गए थे आज तक इस बात का खुलासा नहीं हो सका, हां यह जरूर है कि कोरोना काल के दौरान यह सुनने को जरूर मिला कि कोरोना पीडि़तों को रेमडेसिविर इंजेक्शन की आवश्यकता थी वह अपने परिजनों की जान बचाने के लिये भटकते रहे
इस दौरान यह घटना भी सुर्खियों में रही कि शिवराज मंत्रिमण्डल के एक मंत्री ने अपने चहेतों और पीडि़तों को फोन करके यह जरूर संदेश दिया कि वह राजधानी के पांच नंबर स्थित फलां जगह पहुंचकर उस व्यक्ति से इंजेक्शन प्राप्त कर लें अब पता नहीं उक्त मंत्री के द्वारा किये गये फोन पर उन पीडि़तों को यह रेमडेसिविर इंजेक्शन पैसों से उपलब्ध करायें या नि:शुल्क बांटे गये यह जांच और शोध का विषय है कुछ ऐसी ही कार्यशैली अभी कुछ महीनों से प्रशासनिक और राजनैतिक स्तर पर लोग बड़े ही चटकारे लेकर प्रदेश में शराब के उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियों पर हुई कार्यवाही को लेकर जो घटना सुर्खियों में है उसकी चर्चा करते हुए नजर आते हैं और यह चर्चा करने वाले लोग यह कहने से नहीं चूकते कि भाजपा शासनकाल में चौथी बार मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान के मुखाग्रबिन्द से यह सुनने को जरूर मिला कि वह माफियाओं को दस फुट नीचे जमीन में गाड़ देेेंगे लेकिन उनकी प्रशासनिक कार्यशैली से उन बाबुओं (आईएएस अधिकारियों) जिनके बारे में कभी देश की सर्वोच्च संस्था लोकसभा में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा यह कहे जाने पर कि सोचो आईएएस अफसरों के प्रति बाबू शब्द का उल्लेख करने पर प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध पूरे देश के यह बाबू (आईएएस अधिकारी) विरोध करते नजर आए थे? लेकिन ११ जनवरी २०२१ को भारत के प्रधानमंत्री ने उसी सर्वाेच्च सदन में इन आईएएस अधिकारियो के खिलाफ बाबू शब्द का हवाला देते हुए कहा कि आईएएसहो गया तो वह हवाईजहाज भी चलाएगा।
यह कौन सी बड़ी ताकत बनाकर रख दी हमने? बाबुओं के हाथ में देश देकर हम क्या करने वाले हैं? प्रधानमंत्री द्वारा पुन: इन शब्दों का उपयोग करते हुए बाबुओं (आईएएस अधिकारियों) के बारे में जो कुछ भी कहा वह भारत की सर्वोच्च सदन की कार्यवाही में उल्लेखित है मजे की बात तो यह है कि उसी भाजपा के एक प्रांत के मुख्यमंत्री हमारी सरकार के मुखिया शिवराज के राज में हर प्रकार के माफिया उनमें से एक शराब माफिया को जमीन में गाडऩे की चेतावनी उनके मुखाग्रबिन्द से निकलती है उसी शराब माफिया का दबदबा इतना है कि उनकी सुरा के आगे वह अपने ही वर्ग के अधिकारियों की बेइज्जती कराने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं? हालांकि शराब के बारे में शराब कवियों और फिल्मी गीतकारों ने बहुत कुछ लिखा लेकिन फिल्मी दुनिया के शहंशाह अमिताभ बच्चन की फिल्म शराबी में एक फिल्मी गाना है ”नशा शराब में होता तो… नाचती बोतलÓÓ इस फिल्मी गाने की यह पंक्तियां इस प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों पर सटीक बैठती नजर आ रही हैं जिसके चलते आबकारी विभाग की प्रमुख सचिव जिनके बारे में यह आम चर्चा है कि वह ईमानदार और न्यायप्रिय हैं लेकिन उन्हीं के द्वारा धार जिले की दो शराब फैक्ट्रियों पर अपने ही आबकारी विभाग के अधिकारियों पर भरोसा न करते हुए इंदौर के आयुक्त जो उन्हीं की उन बाबुओं (कलेक्टर) के समकक्ष हैं उनसे इन शराब फैक्ट्रियों पर कार्रवाई कराई
आयुक्त इंदौर द्वारा अपने अमले के साथ जब इन फैक्ट्रियों पर कार्यवाही की तो वहां वह गांधी का गुजरात जहां शराब की पूर्ण नशाबंदी लागू है लेकिन मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि देश के तमाम अवैध शराब प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के चलते भारी मात्रा में शराब की पूर्ति की जा रही है और इस कारोबार में अवैध शराब के कारोबारी तो सक्रिय हैं तो वहीं प्रशासनिक अधिकारी और राजनेताओं का इन्हें संरक्षण प्राप्त है यही नहीं अपने शराब के कारोबार की शुरुआत के समय उक्त कारोबारी ने अपनी डिस्टलरी के समीप एक प्रांगण में प्रदेश के तमाम राजनेताओं को बुलाकर एक आयोजन रखा था उस आयोजन में अपने संबोधन में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा यह कहा गया था कि अरोरा बंधुओं की तिजोरी पर लक्ष्मी देवी की कृपा हमेशा बनी रहे। हालांकि इस आयोजन में शिवराज सिंह के गुरु पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा जिन्होंने शिवराज को सत्ता पर काबिज करने के लिये एक समाचार पत्र में यह आलेख प्रकाशित किया था कि ”मत चूको चौहान…ÓÓ जब यह आलेख प्रकाशित किया गया था इस प्रदेश की सत्ता पर शिवराज सिंह काबिज नहीं थे? लेकिन इस आलेख के प्रकाशित होने के बाद जो तूफान भाजपा में शिवराज के पक्ष में पैदा हुआ उसी तूफान के चलते पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के स्थान पर उमा भारती की जगह शिवराज काबिज हो गए लेकिन उस समय यह जरूर हुआ था कि राजधानी के भाजपा कार्यालय दीनदयाल उपाध्याय परिसर में आयोजित बैठक में शिवराज सिंह के पक्ष में माहौल को देखते हुए बैठक से उमा भारती बाहर खड़ी नजर आईं? सोम डिस्टलरी के इस आयोजन के बाद मिले राजनैतिक व प्रशासनिक संरक्षण के चलते अवैध शराब के कारोबर के लिये सदन से लेकर सड़क तक जरूर सुर्खियों में रहे यही नहीं इन्हीं सोम के संचालकों की बदौलत प्रदेश के एक राजनेता गौरीशंकर शेजवार भी काफी विवादों में रहे, लेकिन अब स्थिति यह है कि अकेले सोम ही नहीं बल्कि प्रदेश की अन्य निर्माता कंपनियां भी प्रदेश में सक्रिय नजर आते रहे हैं
यही वजह है कि इंदौर से लेकर झाबुआ तक अवैध शराब के कारोबार के लिये चर्चित है और इसकी पुष्टि इंदौर के आयुक्त ने अपने दल-बल के साथ की गई जांच के दौरान धार जिले की एक फैक्ट्री में पांच ट्रक शराब से लदे पकड़े थे जिसे बाद में यह खबरें आई कि यह गुजरात भेजे जाने वाले थे मजे की बात तो यह है कि जिन आईएएस अधिकारी के द्वारा अपने ही वर्ग के आईएएस अधिकारी पर भरोसा कर धार जिले की इन फैक्ट्रियों पर छापेमारी की कार्यवाही करवाई गई कार्रवाई के दौरान इंदौर कमिश्नर ने फैक्ट्री में अव्यवस्थाओं के साथ-साथ इस बात की भी पुष्टि कर दी कि इस फैक्ट्री में शराब से लदे पांच ट्रक गुजरात भेजे जाने वाले थे लेकिन पता नहीं आयुक्त इंदौर ने अपनी रिपोर्ट में क्या-क्या लिखा इसका खुलासा अभी तक नहीं हो सका लेकिन आबकारी प्रमुख सचिव जो स्वयं आईएएस हैं ने अपने ही इंदौर आयुक्त आईएएस से इसकी जांच कराई और इसके बाद जो कुछ उन्होंने शिवराज के प्रशासनिक कार्यशैली को नया रूप देते हुए अपने ही वर्ग के आईएएस के द्वारा की गई जांच पर जांच अपने विभाग के राज्य स्तरीय अधिकारियों से कराये जाने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि अब वह समय आ गया कि हमारे वर्ग के आईएएस जब कभी किसी आईएएस पर कोई आरोप लगेेगा तो वह राज्य के किसी भी विभाग के एक साधारण से लिपिक या योग्य चपरासी से भी जांच कराने के आदेश देने में नहीं हिचकेेंगे कुल मिलाकर इस धार जिलों की फैक्ट्रियों पर हुई इस कार्यवाही और उसके बाद आईएएस अधिकारी की जांच आबकारी विभाग के अधिकारियों द्वारा किये जाने की घटना से राज्य के आईएएस अधिकारियों को भले ही बुरा लगा हो लेकिन सवाल यह है कि जो आईएएस अधिकारी भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा उनके द्वारा बाबू शब्द का उपयोग करने पर नाराज होते दिखाई दिये थे वह मध्यप्रदेश के उनके ही वर्ग के आईएएस द्वारा अपने वर्ग के आईएएस द्वारा कराई गई जांच के बाद जो जांच आबकारी विभाग के उन अधिकारियों के द्वारा कराये जाने जिनपर उन्हें विश्वास नहीं था और जिनकी कृपा के चलते राज्य में अवैध शराब कारोबारी अपना गोरखंधा भली भांति दिन दूना रात चौगुना करने में लगे हुए हैं इस घटना के बाद आईएएस अधिकारियों ने अपने ही वर्ग के अधिकारी ने चुप्पी क्यों साध ली इस घटना के बाद तरह-तरह की चर्चाएं आईएएस वर्ग में चटकारे लेकर सुनी जा सकती हैं मामला जो भी लेकिन इस घटना ने यह तो सिद्ध कर दिया कि शिवराज की कार्यशैली की परम्परा के चलते राज्य के बाबू कलेक्टर भी अपने वर्ग के अधिकारी की बेइज्जती कराने और राज्य में आईएएस अधिकारियों के खिलाफ जांच की नई परम्परा शराब कारोबारियों के दबाव में आकर करने मेें भी नहीं चूकते हैं।
आबकारी प्रमुख सचिव द्वारा इन्दौर आयुक्त जो आई ए एस भी हैं उनके से इन शराब उत्पादन के बाली फैक्टरियों पर कार्रवाई करने बाद उसी आबकारी विभाग के अधिकारियों से पून: जांच करने की कार्रवाई भी शिवराज सिंह चौहान के उस चेतावनी की भी कि वह माफियाओं को जमीन में गाड देगें? की हकीकत सामने आ जाती है?

