दिल्ली: कर्नाटक की राजनीति में “नवंबर क्रांति” का शोर अब दिल्ली तक पहुंच गया है. कांग्रेस में बदलाव की अटकलों के बीच उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राजधानी में डेरा डालकर पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी है. जब उनसे नवंबर क्रांति की बात पूछी गई, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “न नवंबर क्रांति है, न दिसंबर रिवॉल्यूशन. अगर असली क्रांति होगी तो वह 2028 में होगी, जब कांग्रेस दोबारा सत्ता में आएगी.”
शिवकुमार का यह बयान न सिर्फ अफवाहों को जवाब देता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि वे अब भी आलाकमान की लाइन पर ही चल रहे हैं. वहीं भाजपा और विपक्ष ने इन बयानों को लेकर तंज कसना शुरू कर दिया है.
दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा कि नवंबर या दिसंबर क्रांति जैसी बातें राजनीतिक कल्पना मात्र हैं. उन्होंने कहा, “यह किसी की लिखी कहानी है. हमें बिहार चुनाव समेत कई जिम्मेदारियां दी गई हैं, और हम उन्हें पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के अंदर किसी प्रकार की बगावत या सत्ता परिवर्तन जैसी कोई चर्चा नहीं है.
मंत्रिमंडल विस्तार पर तोड़ी चुप्पी
AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के सवाल पर शिवकुमार ने कहा, “मैं किसी से नहीं मिलूंगा. मंत्रिमंडल विस्तार पर मुझसे कोई चर्चा नहीं हुई है.” उन्होंने कहा कि वह पार्टी अनुशासन के सिपाही हैं और पार्टी की सीमा से बाहर जाने का सवाल ही नहीं उठता.
“हम हाईकमान के फैसले के साथ हैं”
कैबिनेट विस्तार और नेतृत्व परिवर्तन के सवाल पर डीके शिवकुमार ने कहा, “यह सब आपकी कल्पना है. पार्टी जो भी फैसला करेगी, हम उसी का पालन करेंगे.” मुख्यमंत्री पद को लेकर भी उन्होंने कहा, “अगर कार्यकाल पांच साल का है तो पांच साल, अगर दस साल का है तो दस साल- फैसला हाईकमान का होगा.”
मंत्री पद के इच्छुकों को संदेश
शिवकुमार ने उन नेताओं को भी अप्रत्यक्ष संदेश दिया जो मंत्री पद की आस लगाए बैठे हैं. उन्होंने कहा, “यह दिल्ली के नेताओं का मामला है, वे तय करेंगे कि कब और कैसे फैसला लेना है.” उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि वे किसी गुटबाजी का हिस्सा नहीं बनना चाहते, बल्कि पार्टी नेतृत्व के निर्देशों के साथ ही आगे बढ़ेंगे.
‘क्रांति’ पर विराम या नई शुरुआत?
हालांकि डीके शिवकुमार के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि “क्रांति” जैसी कोई तात्कालिक हलचल नहीं है. लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे “2028 की तैयारी” के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने पार्टी में एकता की अपील करते हुए कहा कि असली क्रांति संगठनात्मक निष्ठा और अनुशासन में है, न कि सत्ता परिवर्तन में.

