बजट 2026 ने ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को भारत की नई आर्थिक शक्ति के रूप में पहचान दी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एनीमेशन, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट के जरिए 2030 तक 20 लाख नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए देश भर के 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स बनाने और पूर्वी भारत में एक नया NID स्थापित करने जैसे बड़े कदम उठाए गए हैं. इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, यह सेक्टर न केवल रोजगार का बड़ा स्रोत बनेगा, बल्कि भारत को दुनिया का ‘ग्लोबल क्रिएटिव हब’ बनाने में भी मदद करेगा.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 के जरिए भारत की विकास यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ दिया है. इस बार बजट का केंद्र बिंदु ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ (Orange Economy) को बनाया गया है, जिसे अब तक केवल मनोरंजन का जरिया माना जाता था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही इसके महत्व पर जोर दिया था, और अब सरकार ने इसे देश की ‘सर्विसेज-लेड ग्रोथ’ रणनीति का मुख्य हिस्सा बना लिया है. इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के ढांचे पर आधारित यह बजट बताता है कि कैसे एनीमेशन, गेमिंग और डिजाइन जैसे क्षेत्र भारत के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और पर्यटन के नए स्रोत बन सकते हैं.
सरकार का यह विजन केवल ‘सॉफ्ट पावर’ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक हाई-मल्टीप्लायर इंडस्ट्री के रूप में देखा जा रहा है. इसका मकसद देश के युवाओं को रचनात्मक क्षेत्रों में खपाना, स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना और शहरों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है. विशेषज्ञों का मानना है कि रचनात्मकता पर आधारित यह अर्थव्यवस्था पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग से अलग है, क्योंकि इसकी असली ताकत भौतिक वस्तुओं के बजाय मानवीय विचारों और कलात्मक अभिव्यक्ति में छिपी है.
क्या है ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ और भारत के लिए क्यों है अहम?
ऑरेंज इकोनॉमी, जिसे रचनात्मक अर्थव्यवस्था (Creative Economy) भी कहा जाता है, उन गतिविधियों का संगम है जो संस्कृति, रचनात्मकता, तकनीक और बौद्धिक संपदा (IP) को जोड़कर आर्थिक और सामाजिक मूल्य पैदा करती हैं. इसे ‘ऑरेंज’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह रंग रचनात्मकता और नवाचार का प्रतीक माना जाता है.
भारत के लिए इसकी अहमियत और बढ़ने के कई कारण हैं:
- युवा आबादी और डिजिटल क्रांति: भारत की विशाल युवा आबादी और तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने इसके लिए सही माहौल तैयार किया है.
- बढ़ता बाजार: अर्न्स्ट एंड यंग (EY) के आंकड़ों के अनुसार, भारत की क्रिएटर इकोनॉमी 18% की सालाना दर (CAGR) से बढ़ रही है. 2023 में जो बाजार 19 अरब रुपये का था, उसके 2026 तक 34 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.
- वैश्विक योगदान: दुनिया भर में रचनात्मक उद्योगों का जीडीपी में योगदान 0.5% से 7% तक होता है. भारत अब इस वैश्विक दौड़ में अग्रणी बनना चाहता है.
- बजट 2026 के बड़े एलान: AVGC सेक्टर पर खास फोकस
वित्त मंत्री ने अपने नौवें बजट भाषण में रचनात्मक क्षेत्रों को नौकरियों का नया इंजन करार दिया. सबसे बड़ा एलान एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) सेक्टर को लेकर हुआ:
- 15,000 स्कूलों में खुलेंगी लैब्स: वित्त मंत्री ने घोषणा की कि देश भर के 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में ‘AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स’ स्थापित की जाएंगी.
- IICT मुंबई की भूमिका: इन लैब्स को मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी (IICT) के सहयोग से चलाया जाएगा, ताकि जमीनी स्तर पर ही युवाओं को डिजिटल स्किल्स सिखाई जा सकें.
20 लाख नौकरियों का लक्ष्य: सरकार का अनुमान है कि 2030 तक केवल AVGC सेक्टर में ही 20 लाख प्रशिक्षित पेशेवरों की जरूरत होगी. यह पहल इसी कार्यबल को तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. - पूर्वी भारत को मिलेगा नया NID: देश में डिजाइनरों की कमी को देखते हुए सरकार ने पूर्वी भारत में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) खोलने का प्रस्ताव दिया है, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर विशेष प्रशिक्षण सुलभ होगा.

