जिन राजनीतिक दलों को माना जाता था कि वो जनता के लिए बनाए गए हैं। और उन्हीं के हितों की पूर्ति करना उनका प्राथमिक कर्तव्य है। अब वही दल उससे दूर होते जा रहा हैं। यह दूरी किस तरह की है उसको समझने के लिए किसी शख्स को पटना की सड़कों पर स्थिति दलों के दफ्तरों पर नजर दौड़ानी होगी। पहले इन राजनीतिक दलों के दफ्तर आम लोगों के लिए बिल्कुल खुले रहते थे लेकिन अब उन्हीं दफ्तरों पर सुरक्षा बलों के जवानों को तैनात करना पड़ रहा है। आखिर ये स्थिति आयी क्यों। और यह लोकतंत्र के लिए कितना लाभदायक या फिर हानिकारक है आइये उसको समझने की कोशिश करते हैं।
पटना वर्ष 2022 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि केंद्र की हाल ही में घोषित अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए अग्नि वीरों को भाजपा कार्यालयों के लिए सुरक्षा गार्डों की भर्ती में प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि बिहार में कार्यालय पार्टी के सुरक्षाकर्मी के रूप में बिहार पुलिस को ही तैनात किया गया है न की अग्निवीरों को। अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है?
हाल फिलहाल में छात्रों के साथ, संविदा कर्मी, जीविका, आंगनबाड़ी कर्मी एवं आंदोलनकारियों ने अपनी मांग को लेकर सरकार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन किया है। इस सिलसिले में सरकारी आवास के अलावा सत्ताधीश पार्टी का प्रदेश कार्यालय आंदोलनकारियों के लिए पसंदीदा जगह बन चुका है। कभी शिक्षक अभ्यर्थी, कभी राजस्व कर्मी तो कभी डायल 112 के चालकों ने बीजेपी दफ्तर के बाहर उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान कई बार पुलिस को लाठी भी चलानी पड़ी।
बीजेपी दफ्तर कार्यालय में काम कर रहे राजीव के मुताबिक 13 सितंबर, 2025 को संविदा कर्मचारी प्रदर्शन करते हुए भाजपा दफ्तर तक जा पहुंचे। हजारों की तादाद में शामिल संविदा कर्मी सरकार के खिलाफ नारेबाजी और विरोध-प्रदर्शन करते रहे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ पार्टी दफ्तर में कोर कमेटी की बैठक होनी थी। प्रदर्शन की वजह से जेपी नड्डा पार्टी दफ्तर में कोर कमेटी की बैठक नहीं कर सके। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने उन्हें समझाने की कोशिश भी की। इस दौरान पुलिस के द्वारा उनकी पिटाई भी हुई, जिससे कई कर्मचारी घायल हुए।
इन्हीं सबको रोकने के लिए कई जगहों पर पार्टी दफ़्तरों के बाहर पुलिस की तैनाती की गयी है। माना जा रहा है कि प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम दफ्तरों का घेराव न हो इसके लिए किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ बिहार चुनाव को लेकर भाजपा चुनाव प्रबंधन कार्यालय का उद्घाटन भी किया गया है
स्थानीय पत्रकार परमवीर सिंह के मुताबिक हाल के दिनों में विरोध-प्रदर्शन में इजाफा हुआ है। पटना से बाहर भी कुछ जिलों में पार्टी कार्यालयों का घेराव किया जा चुका है। पार्टी के ही कार्यकर्ताओं के द्वारा अपनी मांगों को लेकर धरना करते देखा गया है। कई बार टिकट बंटवारे से असंतुष्ट नेता के आंदोलन की वजह से भी पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ता है।
चुनावी मौसम में भी युवाओं की नहीं सुन रही सरकार
छात्र संघ से जुड़े अंशु अनुराग बताते हैं, “चुनावी मौसम के बीच पटना में छात्र सड़कों पर हैं। इन्हें उम्मीद थी कि सरकार उनकी सुनेगी, क्योंकि 2 महीने बाद उनके वोट से अगली सरकार तय होनी है। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हर बार की तरह इस बार भी कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस सामने आई। लाठियों के बल पर छात्र-छात्राओं को खदेड़ा जा रहा है। किसी ने नहीं बताया कि आखिर इनकी गलती क्या है? कुछ के माता-पिता भी प्रोटेस्ट में शामिल होने आए थे। लेकिन कुछ हल नहीं निकला।”
पटना में छात्रों का हुजूम सड़कों पर लगातार अपनी मांगों को लेकर सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहा है। चुनाव का बिगुल बजने और आचार संहिता लगने से पहले उन्हें सरकार द्वारा जो नौकरी के लिए आश्वासन दिया गया था, उसे छात्र पूरा करवाना चाहते हैं।
पटना में तैयारी कर रहे विपुल बताते हैं कि, “छात्र अपनी मांगों को लेकर एक लंबे समय से प्रदर्शन करते रहे हैं और सरकार के समक्ष मजबूती से अपनी बात को रखते हैं। बीपीएससी द्वारा ली जाने वाली परीक्षा में शायद ही कोई ऐसी परीक्षा होगी जो शांतिपूर्ण तरीके से बिना किसी विवाद के पूर्ण हो गयी हो, जिसके चलते छात्र आक्रोषित रहते हैं। जब सरकार छात्रों से किए गए वादों को पूरा नहीं करती है तो आखिरकार छात्र इंतजार करते-करते आंदोलन करने लगते हैं और सड़क पर उतर आते हैं।”
“जब छात्र सरकार से जवाब मांगते हैं कि आपने जब एक लाख पदों पर शिक्षकों की भर्ती करने का वादा किया था तब आप सिर्फ 26 हजार भर्तियां क्यों निकाल रहे हैं? साल का यह दूसरा आंदोलन है और छात्रों को ऐसा लग रहा है कि चुनाव सामने है, ऐसे में सरकार हमारी मांगें पूरी कर ले और हमारी आवाज सरकार तक पहुंच जाए इसके लिए आंदोलन जारी है” आगे वह बताते हैं।
जब किसी कार्यालय का घेराव किया जायेगा तो वह हिंसक रूप भी ले सकता है इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वीरचंद पटेल पथ मार्ग को प्रतिबंधित घोषित कर पार्टी दफ्तरों के बाहर अस्थायी रूप से पहरा लगा कर धारा 163 लगा दिया गया है।

