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अजमेर में सौहार्द बिगड़ने की आशंका क्यों जताई जा रही है?

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एस पी मित्तल, अजमेर

गत दो अप्रैल को हिन्दू नववर्ष अजमेर में धूमधाम से मनाया गया। नगर निगम और नव संवत्सर समारोह समिति के तत्वावधान में शहरभर के चौराहों को भगवा रंग से सजाया गया। एक दिन पहले रीजनल कॉलेज के निकट चौपाटी पर विक्रम मेला भी लगा। दो अप्रैल को ही निकले सिंधी समुदाय के चेटीचंड के जुलूस का ख्वाजा साहब की दरगाह के बाहर खादिमों ने शानदार इस्तकबाल किया। मुस्लिम प्रतिनिधियों ने कोई पांच सौ हिन्दुओं के सिर पर पगड़ी बांधी। यानी किसी भी स्थान पर सौहार्द बिगडऩे की आशंका नजर नहीं आई। न ही किसी धर्म गुरु ने कोई आपत्तिजनक बयान दिया। लेकिन अब पांच दिन बाद अजमेर के पुलिस और जिला प्रशासन को लगता है कि आने वाले दिनों में होने वाले धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में यदि सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक प्रतीक वाली झंडिया लगाई जाएगी तो सौहार्द बिगड़ जाएगा। सौहार्द बिगडने की आशंका को ध्यान में रखते हुए ही जिला पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट पर जिला कलेक्टर ने सात अप्रैल से आगामी एक माह तक के लिए सार्वजनिक स्थलों जैसे चौराहों, सरकारी भवनों, टेलीफोन और बिजली के खंभों आदि पर धार्मिक प्रतीक वाली झंडियां लगाने पर रोक लगा दी है। अब डीजे बजाने के लिए भी प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। ऐसे आदेश धारा 144 के अंतर्गत निकाले गए हैं, लेकिन यह स्पष्ट किया गया है कि रामनवमी, महावीर जयंती, अंबेडकर जयंती आदि पर निकलने वाले जुलूस पर कोई प्रतिबंध नहीं है। सब जानते हैं कि सरकारी मशीनरी सत्तारूढ़ राजनीतिक दल की नीतियों एवं सोच को ही क्रियान्वित करती है। वैसे भी लोकतंत्र में चुनाव अफसरों को नहीं बल्कि राजनीतिक दलों को ही लड़ना पड़ता है। सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक प्रतीक वाली झंडियां न लगाने का आदेश भले ही अफसरों ने जारी किया हो, लेकिन इसकी जिम्मेदारी सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की ही है। रामनवमी हो या महावीर जयंती या फिर अंबेडकर जयंती प्रतिवर्ष ऐसे आयोजनों पर शहर के चौराहों को सजाया जाता है। यदि महावीर जयंती प चौराहे सजेंगे तो जैन धर्म के अनुरूप ही झांडिया लगेंगी तथा सजावट भी होगी। ऐसा ही 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती पर भी होता है7 हनुमान जयंती पर भी ऐसे आयोजन होते हैं। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ, जब ऐसे धार्मिक और सामाजिक आयोजनों पर पाबंदियां लगाई गई हों। यदि महावीर जयंती पर चौराहे और बाजार जैन समुदाय की भावनाओं के अनुरूप नहीं सजेंगे तो फिर जयंती मनाने का क्या मतलब है। सरकार में बैठे लोग माने या नहीं, लेकिन प्रशासन की ऐसी पाबंदियों से लोगों में नाराजगी है। ऐसा प्रतीत होता है कि सौहार्द बना हुआ है, उसे बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। सरकार में बैठे लोगों को यह समझना चाहिए कि दुनियाभर में अजमेर को साम्प्रदायिक सद्भावना की मिसाल माना जाता है। हिन्दुओं का तीर्थ गुरु पुष्कर और मुसलमानों की ख्वाजा साहब की दरगाह इसके उदाहरण है। जिस अजमेर से दुनियाभर में सौहार्द का पैगाम जाता हो उस शहर में सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक प्रतीक वाली झंडियां लगा देने से सौहार्द बिगड़ जाएगा, ऐसी बात किसी के भी गले नहीं उतरेगी। सरकार में बैठे लोगों को यह भी समझना चाहिए कि अजमेर में प्रतिवर्ष सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती का 6 दिवसीय उर्स भरता है। उर्स के दौरान देशभर में चादरों के जुलूस में धार्मिक प्रतीकों का प्रदर्शन होता ही है। जो मुस्लिम और प्रशासनिक अधिकारी पूर्व में अजमेर में तैनात रहे हैं, वे उर्स के माहौल के बारे में बता सकते हैं। नवरात्र, महावीर जयंती, अंबेडकर जयंती, हनुमान जयंती वाले अप्रैल माह में सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक प्रतीक वाली झंडियां लगाने पर जो रोक लगाई है, वह रोक यदि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जानकारी में है तो कोई कुछ नहीं कर सकता, लेकिन ऐसा आदेश सीएम गहलोत की जानकारी में नहीं है तो फिर गहलोत को दखल देना चाहिए, क्योंकि ऐसे आदेश से लोगों में नाराजगी है और ऐसी नाराजगी अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी पड़ेगी।

भाजपा महिला मोर्चे का प्रदर्शन:
जिला प्रशासन द्वारा अप्रैल माह में धारा 144 के अंतर्गत लगाई गई पाबंदियों के विरोध में 8 अप्रैल को अजमेर जिला भाजपा महिला मोर्चे की कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम जिला कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि प्रशासन का यह आदेश हिन्दू समुदाय की धार्मिक भावनाओं का आहत करने वाला है। मोर्चे के जिला अध्यक्ष पार्षद भारती श्रीवास्तव ने कहा कि प्रशासन का यह आदेश तुगलकी आदेश है जिसे आम हिन्दू समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।

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