Site icon अग्नि आलोक

क्या अशोक गहलोत राजस्थान में सचिन पायलट की उपयोगिता को समाप्त कर पाएंगे?

Share

एस पी मित्तल अजमेर

12 दिसंबर को जयपुर में होने वाली कांग्रेस की राष्ट्रव्यापी रैली की तैयारियां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वयं संभाल रखी है। यह रैली जयपुर के 40 हजार की क्षमता वाले विद्याधर नगर के स्टेडियम में हो रही है। दावा है कि रैली के जयपुर में दो लाख लोग जुटेंगे। स्वाभाविक है कि 40 हजार की क्षमता वाला स्टेडियम खचाखच भरा होगा। अकेले जयपुर शहर में आठ विधानसभा क्षेत्र हैें। एक विधानसभा से पांच हजार लोगों को लाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में रैली स्थल के स्टेडियम को जयपुर शहर के लोगों से भर दिया जाएगा। प्रदेश और देशभर से आए कांग्रेस के कार्यकर्ता कहां बैठेंगे, यह कोई नहीं जानता। रैली की तैयारियों की सभी प्रमुख जिम्मेदारी सीएम गहलोत ने अपने समर्थक मंत्रियों और पदाधिकारियों को दी है। कहा जा सकता है कि रैली की तैयारियां के केंद्र सीएम गहलोत ही हैं।

रैली की तैयारियों में पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई है। तैयारियों को लेकर सीएम गहलोत ने पायलट से कोई विचार विमर्श भी नहीं किया है। पायलट की पहुंच प्रभारी महासचिव अजय माकन तक ही है। लेकिन अजय माकन भी जब तैयारियों को लेकर सीएम गहलोत के पास जाते हैं तो पायलट साथ नहीं होते हैं। पायलट भी सीएम गहलोत के रुख को समझते हैं, इसलिए तैयारियों में जबरन घुसपैठ भी नहीं करते हैं। पायलट को जब कोई जिम्मेदारी ही नहीं दी गई है तो वे क्या कर सकते हैं? रैली से एक दिन पहले 11 दिसंबर को प्रदेश के प्रमुख अखबार में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से रैली का विज्ञापन प्रथम पृष्ठ पर छपा है, लेकिन इस विज्ञापन में सचिन पायलट का फोटो नहीं है। जयपुर में कांग्रेस की रैली होने के बाद भी यदि पायलट का फोटो नहीं हो तो रैली की तैयारियों को समझा जा सकता है। सवाल उठता है कि क्या अशोक गहलोत राजस्थान में सचिन पायलट की उपयोगिता को समाप्त कर पाएंगे? सब जानते हैं कि कांग्रेस ने 2018 का विधानसभा चुनाव मुख्यतौर पर पायलट के चेहरे पर ही लड़ा था। तब पायलट प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी थे। अशोक गहलोत 2013 में जब मुख्यमंत्री थे, तब कांग्रेस को मात्र 21 सीटें मिली थीं, लेकिन भाजपा के पांच वर्ष के शासन में पायलट ने लगातार संघर्ष किया और इसी का परिणाम रहा कि 2018 में कांग्रेस को 200 में से 100 सीटें मिलीं। तब कांग्रेस में सचिन पायलट की  ही महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। अब यदि तीन वर्ष बाद और अगले विधानसभा चुनाव से 22 माह पहले कांग्रेस के विज्ञापन में सचिन पायलट का फोटो नहीं लगाया जाता है तो पायलट समर्थकों में नाराजगी होना स्वाभाविक है। अनेक मौकों पर उपेक्षा के बाद भी पायलट कांग्रेस के साथ ही हैं। भले ही सीएम गहलोत पायलट से नाराजगी और ईर्ष्या रखते हों, लेकिन कांग्रेस का नेतृत्व करने वाला गांधी परिवार राजस्थान में पायलट की उपयोगिता को समझता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि राजस्थान भर में सचिन पायलट की लोकप्रियता है। देखना होगा कि 12 दिसंबर को रैली में राहुल गांधी की उपस्थिति में सचिन पायलट का संबोधन होता है या नहीं। वैसे रैली के प्रमुख मंच की कमान भी सीएम गहलोत के पास ही है। 

Exit mobile version