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क्या शिवमोगा का गढ़ बचा पाएगी BJP

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शिवमोगा

कर्नाटक के शिवमोगा शहर का सीगहट्‌टी एरिया। संकरी-संकरी गलियां। एक तरफ हिंदुओं के घर, दूसरी तरफ मुस्लिमों की बसाहट। सीगहट्‌टी में ही हर्षा का घर है। बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा की 20 फरवरी 2022 को हत्या कर दी गई थी। उसके घर के बाहर अब भी कर्नाटक पुलिस के 30 जवान तैनात रहते हैं।

BJP ने 20 अप्रैल को शिवमोगा सीट से चन्नाबसप्पा को अपना कैंडिडेट बनाया। RSS बैकग्राउंड से आने वाले चन्नाबसप्पा कट्टर हिंदूवादी नेता माने जाते हैं। नॉमिनेशन के बाद वे हर्षा के घर गए और उसकी फोटो के सामने खड़े होकर फोटो खिंचवाई। उनका सवाल है कि क्यों हिंदुओं का साथ देना कम्युनल माना जाता है, जबकि कांग्रेस अगर मुस्लिमों का साथ दे, तो सेक्युलर बन जाती है।

शिवमोगा से BJP के उम्मीदवार चन्नाबसप्पा मौजूदा विधायक ईश्वरप्पा के समर्थक हैं। पार्टी ने ईश्वरप्पा के बेटे की बजाय चन्नाबसप्पा को टिकट दिया। अपने कैम्पेन की शुरुआत उन्होंने हर्षा के घर से की।

कर्नाटक में 10 मई को वोटिंग होनी है। शिवमोगा के चुनावी मुद्दों में हर्षा की हत्या भी शामिल है। मैं हर्षा के घर गया, तो करीब 300 मीटर दूर एक मंदिर के पास पुलिस वैन खड़ी मिली। रात का वक्त था। मंदिर में दो पुलिसवाले बैठे थे। ड्यूटी दे रहे जवान ने बताया कि ‘हम कर्नाटक पुलिस की स्पेशल फोर्स से हैं। हर्षा के परिवार की सिक्योरिटी में 30 जवान रहते हैं। 6 रात में, बाकी दिन में।

इतना बड़ा खतरा कि 30 जवान पहरा दे रहे हैं? ये पूछने पर जवान ने बताया कि ‘सीगहट्‌टी बहुत सेंसिटिव इलाका है। शहर में कोई भी हिंसा यहीं से शुरू होती है। इसलिए कुछ समय से यहां फोर्स रहती ही है। हालांकि अभी हमें हर्षा के परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है।’

हर्षा के घर के बाहर खड़ी पुलिस वैन। हर्षा के परिवार को धमकियां मिलने की वजह से घर के आसपास पुलिस तैनात की गई है।

पुलिसवालों से बातचीत के बाद मैं मंदिर से बाहर आया। वहीं हर्षा की बहन अश्विनी, उसके पिता और मोहल्ले के कुछ लड़के खड़े थे। अश्विनी ने बताया कि ‘पुलिस 6 महीने से हमारी सिक्योरिटी में है। जिन मुस्लिम लड़कों ने मेरे भाई का मर्डर किया था, उन्हीं के भाइयों ने 6 महीने पहले हमारे घर के नीचे आकर धमकी दी थी। बाइक पर तीन लड़के आए थे और चिल्लाते हुए कहा था कि तुम्हें छोड़ेंगे नहीं। हमने ये बात BJP विधायक केएस ईश्वरप्पा को बताई, तो उन्होंने घर के बाहर पुलिस लगवा दी।’

हम मराठी, लेकिन अब सरनेम नहीं लगाते: हर्षा की बहन
अश्विनी के साथ बात करते हुए मैं घर में दाखिल हुआ, अंदर हर्षा की बड़ी-बड़ी फोटो लगी हैं। अश्विनी कहती हैं, ‘हर्षा के जाने के बाद BJP वालों ने हमें कभी अकेला नहीं छोड़ा। हमारा मेडिकल फ्री है। राशन तक दिया। हर्षा के नाम पर ट्रस्ट बनाया और देशभर से पैसे कलेक्ट करके हमें दिए।’

हर्षा के घर में उसकी कई तस्वीरें लगी हुई हैं, इस फोटो में बाईं तरफ हर्षा की बहन अश्विनी और दाईं तरफ उसकी मां हैं।

मैंने कहा, ‘पता चला है कि आपको BJP के जरिए 4 करोड़ रुपए की मदद मिली है। अश्विनी कहती हैं, ‘कितना मिला ये तो नहीं बता सकती, लेकिन 40 लाख रुपए हमने ट्रस्ट में लगाए हैं। वहां ऐसे बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जिनके हालात खराब हैं। PFI के हमले में एक कार्यकर्ता की मौत हुई थी, उनका बच्चा भी पढ़ रहा है।’

अश्विनी बताती हैं, ‘अब मैं और मेरा परिवार अपने सरनेम की जगह हिंदू लिखने लगे हैं।’ मैंने पूछा ऐसा क्यों, तो बोलीं, ‘हर्षा ऐसा करने को कहता था। हम चाहते हैं कि BJP की सरकार फिर से आए और जिन लोगों ने हर्षा का मर्डर किया है, उन्हें सजा मिले।’

हर्षा के जरिए हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश
हर्षा की हत्या को भले एक साल से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन शिवमोगा के माहौल से पता चलता है कि इस मुद्दे के जरिए वोटों को पोलराइज करने की कोशिश हो रही है। BJP का चन्नाबसप्पा को टिकट देना इसी का हिस्सा बताया जाता है।

मैं चन्नाबसप्पा से मिलने पहुंचा, तो वो कैंपेन में बिजी थे। एक घर में कार्यकर्ताओं से हिंदुत्व पर बात कर रहे थे। उन्हें बता रहे थे कि कैसे मुस्लिम देश के लिए खतरा हैं और क्यों BJP को सत्ता में लाना जरूरी है।

मैंने उनसे कुछ सवाल किए…
सवाल: शिवमोगा में डेवलपमेंट के बजाय कम्युनल पॉलिटिक्स की बातें ज्यादा क्यों हो रही हैं?
जवाब:
 कम्युनल वॉर जो कर रहे हैं, वो हिंदू नहीं हैं। शिवमोगा में आतंकवादी रहते हैं। यहां की शांति खत्म करने के लिए राष्ट्रविरोधी जमा हैं। BJP के सत्ता में आने के बाद कम्युनल वॉर काफी कम हुआ है, हम सिर्फ डेवलपमेंट कर रहे हैं। शिवमोगा की तो हमने पूरी तस्वीर बदल दी है।

सवाल: कौन हैं आतंकी, आपकी सरकार ने उन्हें पकड़ा क्यों नहीं?
जवाब: स्वतंत्रता दिवस पर कुछ लोगों ने वीर सावरकर की फोटो फाड़ी। जैन समुदाय के एक लड़के पर हमला किया। जांच हुई तो पता चला कि वे लोग सिद्धेश्वर नगर में बम बनाते हैं। तुंगा नदी के पास बम फोड़कर ट्रायल करते हैं। सब मुसलमान देशद्रोही नहीं हैं, लेकिन जितने भी देशद्रोही हैं, वो सब मुसलमान क्यों हैं। मेंगलुरु में कुकर बम ब्लास्ट हुआ, उसमें भी इन्वॉल्वमेंट निकला। हमारी सरकार ही पूरे देश में देशद्रोहियों को अंदर कर रही है।

सवाल: आपके सीनियर लीडर कह रहे हैं- हमें मुस्लिमों के वोट नहीं चाहिए, ऐसा क्यों?
जवाब:
 जो मुसलमान राष्ट्रभक्त हैं, उनके वोट चाहिए। देशद्रोहियों के नहीं चाहिए। BJP ने ही PFI को बैन किया। दूसरे देशद्रोही संगठनों को भी हम बैन करने की मांग कर रहे हैं। हम डॉ. अंबेडकर के संविधान के हिसाब से ही सब काम कर रहे हैं।

सवाल: जो आतंकी शिवमोगा में हैं, क्या उनके बाहर भी कनेक्शन हैं?
जवाब:
 ये हम नहीं बोल रहे, NIA ने कहा है। जनसंघ की शुरुआत के पहले से शिवमोगा में कम्युनल वॉर चल रहा है। पहला कम्युनल वॉर 1933 में हुआ था। तब गांधी बाजार में तोड़फोड़ हुई थी। मुसलमानों को उनके मौलवी ही समझा देते तो अच्छा होता। इतनी प्रॉब्लम नहीं होती।

मुस्लिम बोले- उन्हें सिर्फ हिंदुओं के वोट चाहिए, हम उनके कोई नहीं
अश्विनी और BJP कैंडिडेट से मुलाकात के बाद मैं आजाद नगर पहुंचा। हर्षा की मौत के बाद इसी बस्ती पर हमला हुआ था। भीड़ ने कई घर-गाड़ियों में आग लगा दी थी। यहां मुझे हसीना बानो मिलीं। वे कहती हैं, ‘हर्षा का मर्डर आपसी लड़ाई में हुआ था। जो लड़के थे, सब साथ में शराब-ड्रग्स लेते थे। उस मर्डर के बारे में हमें कुछ पता नहीं था।’

‘मर्डर के बाद पूरे शिवमोगा में हंगामा हुआ। घरों पर पत्थर फेंके गए। हमारे एरिया में घुसकर तलवारें लहराईं। जान बचाने के लिए हमारे लड़के भी बाहर निकले। भीड़ अचानक घुस आई। मिलिट्री, पुलिस सब खड़े थे, लेकिन कोई कुछ कर नहीं रहा था। लोग गाड़ियां जला रहे थे, कई लोग जख्मी हो गए। एक महिला की मौत भी हुई थी।’

हसीना कहती हैं, ‘हर्षा के मर्डर के बाद उनके घर पर कई नेता गए, उनकी मदद की, लेकिन हमारी मदद के लिए कोई नहीं आया। हम लोग उनके कुछ नहीं लगते, उन्हें सिर्फ हिंदू चाहिए। हमारी हिफाजत हमें खुद करनी पड़ती है। हमारी मदद के लिए कांग्रेस-JD(S) भी नहीं आए। अब सरकार बनने का वक्त आया है तो माहौल थोड़ा ठंडा है।’

आजाद नगर में ही मुझे सैय्यद मसूद मिले। बोले, ‘शिवमोगा में एक भी नेता ऐसा नहीं है, जो सबको साथ लेकर चलने की बात करे। पूरा चुनाव नफरती रंग में रंगा है।’

शिवमोगा में BJP मजबूत, लेकिन इस बार चुनाव त्रिकोणीय: एक्सपर्ट
शिवमोगा के सीनियर जर्नलिस्ट रवि कुमार कहते हैं, ‘इस बार BJP की स्ट्रैटजी कम्युनल और इमोशनल मुद्दों को साथ उठाने की है। हालांकि संगठन के लेवल पर BJP मजबूत नजर आती है। यह एरिया उसका गढ़ रहा है, लेकिन इस बार चुनाव त्रिकोणीय दिख रहा है।’

फुटपाथ से मुस्लिमों की दुकानें हटा देते हैं: कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी
कांग्रेस के जिला महासचिव आफताब परवेज कहते हैं, ‘शिवमोगा में बजरंग दल, RSS, BJP मिलकर दंगा-फसाद कराते हैं। हिंदुत्व की राजनीति ऐसी है कि फुटपाथ से मुस्लिमों की दुकानें हटा दी जाती हैं। अगर किसी हिंदू और मुसलमान की बाइक टकरा जाएं, तो सारे BJP के नेता हिंदू को देखने अस्पताल पहुंच जाते हैं।’

‘हर्षा के मर्डर को इतना बड़ा मुद्दा बनाया, लेकिन वो आपसी दुश्मनी में मारा गया। उन सब लड़कों का एक ही ग्रुप था। साथ में गांजा पीते थे। रंजिश के बाद एक-दूसरे को मारने की फिराक में थे, दुर्भाग्य से हर्षा उन्हें अकेला मिल गया और उसका मर्डर हो गया। इसके बाद मुस्लिमों पर हमले किए गए।’

‘हर्षा के परिवार को सुरक्षा दी गई है। चुनाव होते ही उसके घर के सामने से सिक्योरिटी हट जाएगी। BJP कैंडिडेट ने तो नॉमिनेशन तक उसके घर जाकर किया, ताकि हिंदुओं के वोट लिए जा सकें।’

शिवमोगा येदियुरप्पा का गढ़, तीनों पार्टियों के कैंडिडेट लिंगायत
शिवमोगा को BJP नेता बीएस येदियुरप्पा का गढ़ बोला जाता है। शिवमोगा के ही शिकारीपुर से उनके बेटे विजयेंद्र मैदान में हैं। हालांकि लोग बताते हैं कि येदियुरप्पा की हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में एक जैसी पकड़ है। उन्हें सेक्युलर नेता माना जाता है। अभी शिवमोगा से BJP के केएस ईश्वरप्पा विधायक हैं। वे लाउडस्पीकर पर अजान बंद करने की बात कह चुके हैं।

शिवमोगा में मुस्लिम बताते हैं कि ‘ईश्वरप्पा ऐसे बयान देते हैं, लेकिन वो निजी तौर पर मुस्लिमों से भेदभाव नहीं रखते। हमारे साथ खाना-पीना सब करते हैं और ये भी कहते हैं कि राजनीति करना है तो ऐसे बयान देने पड़ेंगे। हालांकि उनके बयानों से बेवजह माहौल खराब होता है और तनाव बढ़ता है।’

शिवमोगा से इस बार BJP, कांग्रेस और JD(S) तीनों के ही कैंडिडेट लिंगायत समुदाय से हैं। JD(S) ने BJP के पूर्व MLC अयानूर मंजूनाथ को टिकट दिया है। मंजूनाथ ने टिकट न मिलने पर BJP से इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस की तरफ से एचसी योगेश चुनाव लड़ रहे हैं।

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