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क्या भूमिहार वोटरों के समर्थन से मिलेगा तेजस्वी को ताज

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पटना : बिहार में राजनीतिक तौर पर ऐक्टिव भूमिहार वोटरों का दिल तेजस्वी यादव  पर आ गया है। कम से कम मुजफ्फरपुर के बोचहां उपचुनाव में तो यही दिखा। इसके बाद तेजस्वी यादव ने भी बांहें फैलाकर स्वागत किया। शान में कसीदे पढ़े। आमतौर पर ऐसा परसेप्शन है कि भूमिहार जाति के लोग आरजेडी को वोट नहीं करते हैं। तेजस्वी के पिता लालू यादव के कुछ पुराने बयान इस बात की तस्दीक करते हैं। मगर उनके बेटे ने पूरी सियासत को 360 डिग्री पर बदल देने की कसम का रखी है।

तेजस्वी को ‘कुर्सी’ तक पहुंचाएंगे भूमिहार मतदाता?
बिहार के सवर्ण वोटरों में सबसे ज्यादा भूमिहार मतदाता हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इनकी संख्या करीब 6 फीसदी के आसपास है। लेकिन इस वोट बैंक की ये खासियत है कि जब भी ये किसी पार्टी को जाता है तो एकतरफा जाता है। यानि इस वोट बैंक में सेंधमारी न के बराबर होती है। इसी का नतीजा है कि कभी गरीब सवर्णों के आरक्षण के खिलाफ जाने वाले आरजेडी के युवराज तेजस्वी यादव को अब परशुराम जयंती से भी कोई गुरेज नहीं है। पिता लालू यादव से उलट सियासत कर रहे हैं। दरअसल 2020 विधानसभा चुनाव के बाद तेजस्वी यादव दुहरा चुके हैं कि महागठबंधन को एनडीए से सिर्फ साढ़े 12 हजार कम वोट मिले हैं। अगर आधा भूमिहार वोटर भी तेजस्वी को अपना नेता मान लेते हैं तो उनकी पहुंच ‘कुर्सी’ तक हो सकती है।

परशुराम जयंती पर तेजस्वी यादव ने पढ़े कसीदे
तेजस्वी यादव की उम्मीद बोचहां की रिजल्ट ने जगा दी है। ये सच्चाई है कि अगर बोचहां में भूमिहार मतदाता आरजेडी को वोट नहीं किए होते तो वहां जीत पक्की नहीं होती। ऐसे में तेजस्वी को उम्मीद है कि उनका नया समीकरण उन्हें सत्ता तक पहुंचा देगा। इसके लिए मेहनत बस इतनी करनी है कि जहां जाएं वहां A to Z की बात करें। पटना में परशुराम जयंती पर तेजस्वी ने भरे मंच से कहा ‘हमारी कोशिश है कि सब भाई साथ चलें और बिहार को भी अन्य राज्यों की तरह विकसित बनाएं। ब्राह्मण-भूमिहार समाज जागरूक है। ज्ञान और शिक्षा का प्रतिबिंब है। देश-प्रदेश में इतनी महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी व्याप्त है। आप लोग भी बीड़ा उठा लीजिए – यकीन मानिए सफलता मिलेगी।’
‘हमारी सरकार बनेगी तो हम आप पर ध्यान देंगे’
Give And Take वाली राजनीति के दौर में तेजस्वी भी डोरे डालने से पीछे नहीं रहे। भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच उन्होंने कहा कि ‘हमारी पार्टी ए टू जेड की पार्टी बन चुकी है। एमएलसी चुनाव में हमने पांच भूमिहार उम्मीदवारों को टिकट दिया। तीन जीत कर आए। बोचहां भूमिहार बहुल इलाका था। मगर 36 हजार से ज्यादा वोटों से हमने बीजेपी को हराया। आरजेडी को बदनाम किया जाता था कि ये कुछ जातियों की पार्टी है लेकिन आज हर जाति, हर वर्ग के लोग मेरे साथ खड़े हैं। भूमिहार ब्राह्मण समाज के लोग बुद्धिजीवी हैं। पढ़े लिखे होते हैं। अभी चुनाव नहीं है। हम आप लोग का विश्वास जीतने आए हैं। आप हमें वोट दीजिए या न दीजिए लेकिन हमारी सरकार बनेगी तो हम आप पर ध्यान देंगे।

भूमिहार के साथ दूसरी सवर्ण जातियों पर नजर
तेजस्वी को लगता है कि अगर सवर्णों में भूमिहार मतदाता उनके साथ आ गए तो कुछ दूसरी सवर्ण जातियां भी आ सकती हैं। जिसका फायदा उनको इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में मिलेगा। उनकी पार्टी की अंकगणित मजबूत होगी। बिना संख्याबल के ‘मैजिक चेयर’ तक पहुंचना मुश्किल है। तेजस्वी इस सियासी पथ को आसान बनाना चाहते हैं। 2024 में लोकसभा चुनाव है, उसमें लालू यादव के वारिस अपनी पार्टी का खाता खोलना चाहेंगे। अगर माहौल बना रहा तो इसका फायदा 2025 में होनेवाले चुनाव में भी मिलेगा। अगर सबकुछ कैलकुलेशन के हिसाब से हुआ तो तेजस्वी अपने पॉलिटिकल करियर के टॉप मुकाम पर होंगे।
फोटो- सोशल मीडिया

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