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MPPSC की महिला अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र:महिला आरक्षण रद्द करने की मांग

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मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की तैयारी कर रहीं महिला अभ्यर्थियाों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। पत्र लिखकर इन अभ्यर्थियों ने परीक्षा में महिला आरक्षण की नीति को रद्द करने की मांग की है। साथ ही कहा है कि इससे मेरिट प्रभावित हो रही है। यह उन्हें सामान्य मेरिट की जगह आरक्षित सीटों तक सीमित कर देती है। हालांकि एमपीपीएससी के अध्यक्ष ने इसे खारिज कर दिया है।

MPPSC परीक्षा की तैयारी कर रही कुछ महिला उम्मीदवारों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में महिला आरक्षण नीति को रद्द करने की मांग की है। उनका तर्क है कि यह नीति महिलाओं को लाभ पहुंचाने के बजाय नुकसानदेह है। यह उन्हें सामान्य मेरिट के बजाय आरक्षित सीटों तक सीमित कर देती है। हालांकि, MPPSC अध्यक्ष राजेश लाल मेहरा ने कहा कि ऐसा नहीं है। यह याचिका मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी भेजी गई है।


मेरिट को दबाती है रिजर्वेशन

महिला उम्मीदवारों का कहना है कि आरक्षण प्रणाली मेरिट को दबाती है। यह उच्च अंक प्राप्त करने वाली महिलाओं के अवसरों को सीमित करती है। याचिकाकर्ताओं में से एक, सुनीता जैन ने कहा कि सरकार महिलाओं के लिए 35% आरक्षण की वकालत कर रही है, फिर भी MPPSC परीक्षाओं में यह नीति मेधावी महिला उम्मीदवारों के खिलाफ काम कर रही है।

उन्होंने आगे कहा किजो महिलाएं शीर्ष रैंक हासिल करती हैं, उन्हें सामान्य मेरिट सूची में शामिल करने के बजाय आरक्षित श्रेणी में डाल दिया जाता है। सुनीता जैन ने बताया कि यह न केवल उनके अवसरों को प्रभावित करता है बल्कि कुल मिलाकर महिलाओं के चयन की संख्या को भी सीमित करता है।

उम्मीदवारों ने ऐसे विशिष्ट मामलों की ओर इशारा किया है, जहां अधिक अंक वाली महिला उम्मीदवारों को आरक्षित सीटें आवंटित की गईं। वहीं कम अंक वाले पुरुष उम्मीदवारों ने सामान्य वर्ग में स्थान प्राप्त किया। उन्होंने 2017 की सहायक प्रोफेसर परीक्षा के परिणामों का उदाहरण दिया। इसमें बायोकेमिस्ट्री में शीर्ष रैंक वाली महिला उम्मीदवार तस्नीम रंगवाला को सामान्य मेरिट सूची में शामिल करने के बजाय आरक्षित श्रेणी में रखा गया था। उनका कहना है कि परिणामस्वरूप, एक अन्य योग्य महिला उम्मीदवार, शिल्पी पांडे का चयन नहीं हो पाया।
भेदभाव बंद हो

एक अन्य उम्मीदवार, निशा गर्ग ने कहा कि हम विशेष व्यवहार की मांग नहीं कर रहे हैं। हमारी मांग सिर्फ निष्पक्षता की है। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई पुरुष उम्मीदवार उच्च रैंक हासिल करता है, तो उसका चयन मेरिट के आधार पर होता है। लेकिन जब कोई महिला उम्मीदवार समान रैंक हासिल करती है, तो उसे आरक्षित श्रेणी में रखा जाता है। यह भेदभाव बंद होना चाहिए।

उम्मीदवारों ने यह भी तर्क दिया कि महिलाओं को अक्सर चयनित होने के लिए पुरुषों की तुलना में अधिक अंक प्राप्त करने पड़ते हैं, जिससे आरक्षण नीति उलटी साबित हो रही है। वे विभिन्न परीक्षाओं में आरक्षण के कार्यान्वयन में ‘विसंगतियों’ का हवाला देते हैं। वे मांग करती हैं कि महिला आरक्षण नीति पर पुनर्विचार किया जाए ताकि महिला उम्मीदवार कोटा द्वारा प्रतिबंधित किए बिना समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

महिलाओं को वंचित नहीं किया जा सकता

MPPSC अधिकारियों ने कहा कि आरक्षण नीतियां राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाती हैं और महिलाओं को समान अवसर से वंचित नहीं किया जाता है। वहीं, MPPSC अध्यक्ष राजेश लाल मेहरा ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि ऐसा कोई मुद्दा नहीं है। महिला उम्मीदवारों का चयन महिला कोटा और सामान्य वर्ग दोनों में मेरिट के आधार पर किया जाता है। इस प्रक्रिया में कोई विसंगति नहीं है। हाल ही में घोषित परिणाम इस बात का प्रमाण हैं।

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