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लड़कियों का स्वास्थ्य , शिक्षा और रोजगार सरकार की प्राथमिकता हो : नारी चेतना मंच

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कुमारी अरुणा शर्मा को नया अध्यक्ष चुना गया
रीवा । नारी चेतना मंच के 28 वें स्थापना दिवस के अवसर पर रविवार 20 फरवरी को स्थानीय स्वयंवर बारात घर में वार्षिक सम्मेलन संपन्न हुआ। कुमारी अरुणा शर्मा को आगामी 1 वर्ष के लिए नारी चेतना मंच का अध्यक्ष चुना गया ।  पूर्व अध्यक्ष आशा श्रीवास्तव के निधन पर सम्मेलन के समापन सत्र में 2 मिनट का मौन रखकर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई । सम्मेलन में डॉ सुनीता त्यागी बिजनौर उत्तर प्रदेश का शुभकामना संदेश के साथ नारी चेतना संबंधित आलेख भी पढ़ा गया . इसके अलावा भुवनेश्वर उड़ीसा से वाणी मंजरी दास , जयपुर राजस्थान से पत्रकार आशा पटेल , मधु सहाय जोशी , भोपाल से माधुरी लाल , ममता शर्मा , जबलपुर से आभा श्रीवास्तव , निरूपा पांडे , इंदौर से लीला पंवार आदि के बधाई संदेश की सम्मेलन में जानकारी दी गई ।


महिलाओं के साथ आए दिन होने वाले अत्याचार , हत्याएं , बलात्कार , सामूहिक बलात्कार , दहेज कुप्रथा , लिंग भेद , मादा भ्रूण हत्या , बिगड़ते लिंगानुपात , सामान्य प्रसव के बजाए सिजेरियन ऑपरेशन , बेहद महंगी होती जा रही शादियां , सामाजिक कुरीतियों , बाल विवाह , छुआछूत , पर्दा प्रथा , अशिक्षा , सामाजिक-आर्थिक गैर बराबरी , फिजूलखर्ची , भ्रष्टाचार , बढ़ती जा रही महंगाई , बेरोजगारी , मिलावटखोरी , नशाखोरी , उपभोक्तावाद , कन्यादान आदि अनेक ज्वलंत सवालों पर सम्मेलन में विशेष चर्चा के साथ संबंधित प्रस्ताव पारित किए गए । 
सम्मेलन में प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यह काफी कष्टप्रद स्थिति है कि सरकार 21वीं सदी में भी बाल विवाह पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं कर पाई है । अभी भी 18 साल से कम उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती है । नारी चेतना मंच बाल विवाह का शुरू से विरोध करता आया है । लड़कियों की शादी 18 वर्ष आयु पूरी होने पर ही होना चाहिए । 18 वर्ष होने पर लड़कियां तय करेंगी कि उन्हें कब शादी करना है , इसका फैसला सरकार को लेने की जरूरत नहीं है । सरकार का काम है कि वह उनकी पढ़ाई , रोजगार और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान दे और बाल विवाह की रोकथाम पर प्रभावशाली नियंत्रण करे । वैसे भी देखने में आ रहा है कि जिन परिवारों में लड़के लड़कियां पढ़ रहे हैं , वहां स्वाभाविक रूप से उनकी शादी की उम्र बढ़ती जा रही है । दुनिया के विकसित देशो में से चीन में भी लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 20 वर्ष से अधिक नहीं है । यह भारी विडंबना और विरोधाभास है कि सरकार बाल विवाह रोक नहीं पा रही है और वहीं दूसरी तरफ झूठी वाहवाही के लिए लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र में बढ़ावा करने जा रही है । नारी चेतना मंच ने कहा है कि यदि कानूनी तौर पर लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष हो जाएगी तो उन करोड़ों गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी जिनकी लड़कियां आठवीं दसवीं के आगे अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाती हैं ।
यह काफी चिंताजनक बात है कि सरकार न तो लड़कियों की बेहतरीन नि:शुल्क पढ़ाई और स्वास्थ्य की व्यवस्था बना पा रही है , न ही उन्हें रोजगार दे पा रही है , लेकिन वहीं उनकी शादी की न्यूनतम उम्र बढ़ाने जा रही है । यदि सरकार लड़कियों की पढ़ाई , रोजगार , स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दे तो स्वाभाविक रूप से लड़कियों का बाल विवाह रुकेगा ।
नारी चेतना मंच में कहा कि लड़कियां दान की वस्तु नहीं है फिर भी मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार मुख्यमंत्री कन्यादान योजना चला रही है । नारी को दान की वस्तु बनाने वाले नामों को तत्काल बदला जाना चाहिए । देश और समाज में सांप्रदायिकता और जातिवाद बहुत बड़ा खतरा है जिसके खिलाफ सम्मेलन में विशेष प्रस्ताव पारित किया गया। नारी चेतना मंच ने कहा है कि सरकार विवाहित जोड़ों को छोटे परिवार के लिए प्रेरित करे और दहेज प्रथा पर नियंत्रण लगाए । सरकार लड़कियों की शादी के नाम पर ₹50000 का दहेज बांट रही है लेकिन उनके जीवनयापन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर रही है । कड़वा सच है कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत लाखों विवाहित जोड़े पूरी तरह रोजगार विहीन हैं , जो भारी समस्या से जूझ रहे हैं । सरकार लड़कियों की कन्यादान योजना की जगह उन्हें रोजगार उपलब्ध कराए । लड़कियों को रोजगार मिल जाएगा तो उन्हें शादी में कोई दिक्कत नहीं आएगी ।
 सम्मेलन में प्राध्यापक डॉ अरुणा पाठक ने महिलाओं को जागरूक बनाने संबंधी संबोधन के साथ कविता पाठ भी किया , जिसे काफी सराहा गया।
सम्मेलन में प्रमुख रूप से नारी चेतना मंच के संयोजक अजय खरे , नारी चेतना मंच की पूर्व अध्यक्ष मीना वर्मा , मीरा पटेल , नजमुननिशा , प्रेमवती शर्मा , गीता महंत , करुणा आदिवासी , निवर्तमान अध्यक्ष सुशीला मिश्रा , शांति सिंह , डॉ अरुणा पाठक , फूलमनी केवट , सुनीता रजक , कौशल्या द्विवेदी , सुधा त्रिपाठी , प्रियंका श्रीवास्तव , निर्मला पाटिल , सुंदी रजक , बिट्टो सोंधिया , मिथिलेश गुप्ता , प्रेमा गुप्ता , कुसुम गुप्ता , किरण मांझी ,मंजू मांझी , क्रांति मांझी , सितारा निषाद , शहरून्निसा , तहरून्निसा , कुमारी अरुणा शर्मा , कुमारी खुशी मिश्रा , इत्तू चंदेल आदि ने शिरकत की। सम्मेलन में सास बहू और मां बेटी की भी शिरकत रही।

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