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संन्यासी से विवादित राजनेता तक योगी का सफर

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दिल्ली में बीजेपी नेताओं से मुलाकातों के कारण सुर्खियों में हैं। यूपी में सत्ता परिवर्तन, कैबिनेट विस्तार और पूर्वांचल का गठन जैसे मुद्दों पर कयास लगाए जा रहे हैं। देश के सबसे बड़े सूबे उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले दो दिन से दिल्ली में हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लेकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से भी उन्होंने मुलाकात की। उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में एक साल से भी कम का वक्त रह गया है।

ऐसे में कयासों का बाजार गर्म है। कोरोना से बिगड़ी राज्य और पार्टी की छवि को लेकर बीजेपी उनसे खफा है या पूर्वांचल बनने की अटकलों को लेकर योगी की अलग राय है, ये वक्त आने पर ही पता चलेगा। पर 49 साल के योगी कई कारणों से खबरों में हैं। पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का योगी के जन्मदिन पर बधाई ना देना मुद्दा बना, फिर सरकारी पोस्टर्स से मोदी का चेहरा हटाए जाने की खबरें भी सामने आईं।

संन्यासी से राजनीतिक तक के सफर में योगी अपनी हिंदुत्ववादी छवि, विवादास्पद बयानबाजी के कारण कई बार विवादों में रहे। 2017 में जब बीजेपी ने सीएम पद के लिए योगी के नाम की घोषणा की थी, तो कई लोगों के लिए ये चौंकाने वाला था। पूर्वांचल में योगी का दबदबा है। पूर्वांचल के कारण ही योगी और बीजेपी के बीच सियासी टकराव के किस्से भी नए नहीं हैं। योगी कई बार चुनावों में बीजेपी प्रत्याशियों के सामने खड़े हिंदू महासभा और हिंदू युवावाहिनी के उम्मीदवारों का समर्थन कर चुके हैं।

3 बजे शुरू होता है इनका दिन…
योगी के जीवन पर आधारित शांतनु गुप्ता की किताब ‘योगीगाथा’ के अनुसार योगी गोरखपुर आश्रम में थे, तो हर दिन सुबह 400 गायों को खुद गुड़ खिलाते थे। दिनचर्या तड़के 3 बजे शुरू होती है। 3 से 5 के बीच योग और प्रार्थना करते हैं। इसके बाद पूजा और फिर दो घंटे अध्ययन करते हैं। सुबह जनता दरबार में लोगों की समस्याएं सुनते हैं।

राममंदिर आंदोलन के दौर में अजय सिंह बिष्ट से योगी बने
योगी उत्तराखंड में उत्तरकाशी स्थित मशालगांव में पैदा हुए। पिता आनंद सिंह फॉरेस्ट रेंजर और मां गृहिणी थीं। कॉलेज में एबीवीपी के साथ जुड़कर छात्र राजनीति शुरू की। इस बीच रामजन्मभूमि आंदोलन में रुचि लेना शुरू कर दी। 1993 की शुरुआत में जब राममंदिर आंदोलन चरम पर था, तब अजय सिंह गोरखनाथ मंदिर के दर्शन के लिए गए और वहां महंत अवेद्यनाथ से मुलाकात हुई।

महंत ने अजय से गोरखपुर मठ में उनका शिष्य बनने के लिए कहा। नवंबर 1993 में अपने परिवार को बताए बिना अजय गोरखपुर चले आए। 15 फरवरी 1994 को ने दीक्षा ली और अजय सिंह से योगी आदित्यनाथ बन गए। सितंबर 2014 को अवेद्यनाथ की मृत्यु के बाद योगी गोरखनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी बन गए।

गोरखपुर में चहेतों के लिए पार्टी के खिलाफ भी गए

योगी पहली बार 1998 में 26 साल की उम्र में गोरखपुर से सांसद बने। इसके बाद लगातार चुनाव जीतते रहे। पूर्वांचल में वह बीजेपी के स्टार प्रचारक रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई मौकों पर उन्होंने बीजेपी के खिलाफ खड़े प्रत्याशियों का समर्थन किया। 2002 विस चुनावों में बीजेपी के खिलाफ हिंदू महासभा के प्रत्याशी उतारने का एलान किया।

दिसंबर 2006 में गोरखपुर में तीन दिन का विराट हिंदू महासम्मेलन बुलाया, ठीक उसी समय लखनऊ में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी चल रही थी। 2007 में योगी पूर्वांचल में अपनी पसंद के उम्मीदवारों के लिए 100 से ज्यादा टिकट चाहते थे। महिला आरक्षण विधयेक पर भी योगी बीजेपी के रुख के खिलाफ थे।

विवादों के योगी, दंगे भड़काने के आरोप में जेल भी गए

2002 में योगी ने गोरखपुर में हिंदू युवा वाहिनी नाम से संगठन की स्थापना की। इसे सांस्कृतिक संगठन कहा गया, लेकिन संगठन के लोगों पर गौरक्षा, लव जिहाद पर लोगों को परेशान करने का आरोप लगता रहा। 2005 में योगी ने यूपी के एटा से शुद्धिकरण अभियान शुरू किया, इसे घर वापसी नाम दिया गया। 2007 में योगी पर दंगे भड़काने का भी आरोप लगा था, इस मामले में वह 11 दिन जेल में भी रहे।

योगी के कई विवादित बयानों जैसे- ‘सूर्य नमस्कार का विरोध करने वाले भारत छोड़ें..। मदर टेरेसा भारत में ईसाइयत की साजिश का हिस्सा थीं..। शाहरुख के बोल हाफिज सईद जैसे, पाकिस्तान जा सकते हैं..। ताजमहल भारतीय संस्कृति को नहीं दर्शाता।’ ने भी बखेड़ा खड़ा किया।

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