ज्यादातर लोग जीवन बीमा पॉलिसी लेते हैं लेकिन कई लोगों को ये नहीं पता होता है कि ये पॉलिसी सिर्फ सुरक्षा ही नहीं देती, बल्कि एक्स्ट्रा पैसा भी देती है. जी हां, हम बात कर रहे हैं “बीमा बोनस” की. जब आप प्रीमियम भरते हो तो कंपनी उस पैसे को निवेश करती है. अगर अच्छा मुनाफा हुआ तो वो अपना कुछ हिस्सा आपको बोनस के रूप में देती है. इससे आपको कैसे फायदा हो सकता है, आइए बताते हैं.
आजकल हर कोई अपनी फ्यूचर प्लानिंग के चक्कर में जीवन बीमा पॉलिसी ले रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये पॉलिसी देने वाली कंपनियां सिर्फ बीमा ही नहीं देती, बल्कि एक्स्ट्रा फायदा भी देती है. असल में, हम बात कर रहे हैं बीमा पॉलिसी बोनस की. ये वो बोनस है जो कंपनी आपके प्रीमियम के आधार पर आपको देती है.
जीवन बीमा पॉलिसी लेने पर आपको न सिर्फ आपकी बीमा राशि मिलती है, बल्कि कंपनी का मुनाफा भी शेयर होता है. ये बोनस आपकी जमा की गई रकम पर तय होता है और पॉलिसी खत्म होने पर या क्लेम के वक्त मिलता है. आइए आपको बताते हैं कि बीमा पॉलिसी बोनस क्या है, किन पॉलिसी पर मिलता है और कितना फायदा दे सकता है.
क्या होता है बीमा पॉलिसी बोनस?
सबसे पहले तो ये जान लें कि बीमा पॉलिसी बोनस का मतलब है जब आप बीमा कंपनी को अपना प्रीमियम देते हैं, तो वो आपका पैसा बाजार में लगाती है. कभी बॉन्ड में, कभी शेयर में, कभी दूसरे सुरक्षित निवेशों में. अगर कंपनी को अच्छा रिटर्न मिलता है, यानी मुनाफा होता है, तो वो अपना कुछ हिस्सा पॉलिसी होल्डर्स को बोनस के रूप में लौटाती है. इसके अलावा, अगर कंपनी को कम क्लेम आते हैं, मतलब कम लोग पॉलिसी पर क्लेम करते हैं, तो उनके खर्चे भी कम रहते हैं, तो बचा हुआ पैसा भी बोनस बन जाता है. ये बोनस हर साल घोषित होता है, लेकिन मिलता है पॉलिसी मैच्योर होने पर या अगर कुछ अनहोनी हो जाए तो क्लेम के समय पर दिया जाता है.
ये बोनस गारंटीड नहीं होता है. ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस अच्छा हो तो ही मिल पाएगा. अगर बाजार डाउन हो या क्लेम ज्यादा आएं, तो बोनस कम या शून्य भी हो सकता है. फिर भी, ज्यादातर बड़ी कंपनियां इसे एक आकर्षक सुविधा बनाए रखती हैं ताकि ग्राहक खुश रहें.
किन पॉलिसी पर मिलता है ये बोनस?
दो मुख्य टाइप की पॉलिसी होती हैं – पार्टिसिपेटिंग और नॉन-पार्टिसिपेटिंग. पार्टिसिपेटिंग पॉलिसी लेने वालों को ही बोनस का फायदा होता है. इसमें आप कंपनी के मुनाफे में पार्टनर बन जाते हैं, मतलब प्रॉफिट शेयरिंग का फायदा आपको होगा. जैसे एंडोमेंट प्लान, मनी बैक प्लान, होल लाइफ पॉलिसी या यूनिट लिंक्ड प्लान के कुछ वर्जन. अगर आप सिर्फ सस्ती कवरेज चाहते हो तो टर्म ठीक, लेकिन अगर सेविंग के साथ बोनस चाहिए तो पार्टिसिपेटिंग चुन सकते हैं.
बीमा कंपनी चार तरह के बोनस देती हैं, हर एक का अपना फायदा. पहला है सरल रिवर्शनरी बोनस. ये हर साल आपकी बीमा राशि में जुड़ जाता है, लेकिन इस पर आगे बोनस नहीं मिलता. मतलब सिंपल इंटरेस्ट जैसे होता है. पॉलिसी खत्म होने पर या क्लेम पर ये अमाउंट मिल जाता है.
इसके बाद दूसरा टाइप का बोनस है- कंपाउंड रिवर्शनरी बोनस. इसमें हर साल का बोनस मूल राशि में जुड़ जाता है, और अगले साल का बोनस बढ़ी हुई राशि पर कैलकुलेट होता है. जैसे कंपाउंड इंटरेस्ट, जो लंबे समय में पैसा बहुत बढ़ा देता है.
तीसरा होता है नकद बोनस. ये सालाना कैश में मिलता है, लेकिन आपकी पॉलिसी राशि नहीं बढ़ती. इसके बाद चौथा है टर्मिनल बोनस. ये लंबे समय तक पॉलिसी चलाने वालों को मिलता है.
आपको क्या फायदा मिलता है?
बोनस से आपका बीमा कवरेज बढ़ जाता है. मान लें आपने 5 लाख की पॉलिसी ली, बोनस से ये 6 लाख हो जाए तो क्लेम पर ज्यादा मिलेगा. मैच्योरिटी पर एक्स्ट्रा कैश मिलता है, जो रिटायरमेंट या बच्चे की शादी के काम आ सकता है. ये एक तरह का बैकअप फंड भी बन जाता है. सबसे अहम बात ये भी है कि बोनस रेट हर साल बदल सकता है. जीवन बीमा का बोनस आपके क्लेम के पैसे को बढ़ाने में मदद कर देता है और परिवार की सेफ्टी को दोगुना कर देता है. इसलिए पॉलिसी लेते वक्त अच्छे से समझ लें कि आपकी पॉलिसी में बोनस मिलेगा या नहीं.

