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  अब मुस्लिम महिलाओं की तौहीन और अपमान का सिलसिला जारी हुआ!

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                      -सुसंस्कृति परिहार 

कर्नल सोफिया कुरैशी की अवमानना के दोषी मध्यप्रदेश के स्वनाम  धन्य  केबिनेट मंत्री विजय शाह पर उचित दंडात्मक कार्रवाई में हीलाहवाली का ही परिणाम है कि  प्रधानमंत्री अपने गुजरात रोड शो के दौरान सोफिया कुरैशी के भाई बहिन को जिला कलेक्टर के ज़रिए ना केवल रोड शो में आमंत्रित करते हैं बल्कि उनसे अपने ऊपर पुष्प वर्षा कराते हैं। कलेक्टर के आदेश का परिपालन करते हुए उन्हें विवशता स्वरूप ये काम करना पड़ता है। ये सैन्य अधिकारी के परिवार का सरासर अपमान है। सम्मान इस परिवार का होना चाहिए किंतु मोदीजी उनके परिवार से अपना अभिनंदन करवा रहे हैं। सरकारी नौकरी के वशीभूत यह दबाव झेलना उन्हें कितना कष्टप्रद रहा होगा। इससे ना केवल भारतीय सेना नाखुश हुई होगी बल्कि देश के बहुसंख्यक लोग भी आहत हुए हैं। एक प्रधानमंत्री के तौर पर यह काम निरंतर उनकी प्रतिष्ठा को गिरा रहा है। सिंदूर आपरेशन की भी थू थू हो रही है। जबकि उन्होंने खुद, लोगों को इस  बचकानी हरकत से बचने का आव्हान किया है। जबकि वे खुद ये कर रहे हैं।

 इसीलिए,उनकी इन  बातों का यद्यपि कोई असर कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। कर्नाटक के कलबुर्गी जिले की डिप्टी कमिश्नर फौजिया तरन्नुम के साथ इस घटना के तत्काल बाद जिस तरह एक बार फिर घृणित शब्दों का इस्तेमाल हुआ वह इस बात को पुष्ट करते हैं भाजपा की कथनी करनी में ज़मीन आसमान का फासला है। पहले से ये भी कहा जाता रहा है कि ये जो कहते हैं उसके ठीक उलट काम करते हैं। इसीलिए कर्नाटक में बीजेपी के एमएलसी एन रविकुमार के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। रविकुमार ने 2014 बैच की आईएएस अफसर फौजिया तरन्नुम को पाकिस्तानी बताया है। एक बयान में उन्होंने कहा ‘वह पाकिस्तान से आई हुई लगती हैं’।

इससे साफतौर पर यह बात सामने आ रही है कि वे तरक्की पसंद मुस्लिम महिलाओं को कतई बर्दाश्त नहीं करने वाले हैं।

अब ये पढ़ी लिखी उच्च पदस्थ मुस्लिम महिला को भी हिंदु मुस्लिम नज़रिए से देखने लगे हैं ताकि उनके कदम पीछे हो जाएं।

हालांकि उनका इतिहास बताता है कि शाखा से उपजी भाजपा भी महिला विरोधी है उन्हें आगे बढ़ती महिलाएं नापसंद है।यह मनुस्मृति की सीख है जिसे वे भारतीय संविधान की जगह स्थापित करना चाहते हैं ज़ोर ज़बरदस्ती से। इसलिए इनके संगठन में कोई महिला नेत्री पार्टी के उच्च पद पर विराजमान नहीं हो पाई। संघ में भी किसी महिला को सर संघ चालक के लायक आज तक नहीं समझा गया।

किंतु जब तक देश में भारतीय संविधान है किसी तरक्की पसंद महिला को आगे बढ़ने से नहीं रोका जा सकता चाहे वह किसी धर्म की क्यों ना हो उसे पुरुष की बराबरी के तमाम अधिकार प्राप्त हैं। 

 सवाल यह है कि कब तक देश में रह रहे मुस्लिमों को पाकिस्तानी कहा जाता रहेगा। ऐसे लोगों को तत्काल दंडित किया जाए। ताकि देश वासी किसी भी मुस्लिम को यह दंश ना झेलना पड़े।उनकी कितनी परीक्षा ली जाएगी।

अफसोसनाक है कि पहलगाम के आतंकी ना पकड़े जाने के एवज में देश सेवा में रत लोगों को पाकिस्तानी कहा जा रहा है जबकि देश के हिंदू पाकिस्तान की जासूसी में सर्वाधिक सक्रिय हैं।उन जयचंदों को प्रताड़ना मिलना चाहिए। विदित हो फौजिया तरन्नुम को पिछले दिनों राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके श्रेष्ठ कार्यों के लिए सम्मानित किया था।यह तौहीन राष्ट्रपति के सम्मान की भी है।

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