12 अक्टूबर 1967 को भारत ने एक ऐसे राजनेता को खो दिया, जिसकी पूरी जिंदगी सत्ता, सामाजिक भेदभाव और आर्थिक असमानता के खिलाफ संघर्ष में बीती। वह नेता न किसी राजघराने से आया था, न उसके पास कोई बड़ा कारोबारी साम्राज्य था।...
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*प्रशासनिक पक्षाघात:असहमति की आवाजों को दबाने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों का इस्तेमाल*
आयुष बाजपेयी और संदीप पांडेय 10 अक्टूबर को दिल्ली ने ऐसी घटना देखी, जो पिछले एक दशक से इस शासन की एक परिचित कार्यशैली बन चुकी है। असहमति की आवाजों को दबाने, लोगों को अपनी बात कहने से रोकने और उनके विरुद्ध बर्बर हिंसा...













