अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ पॉलिसी को लागू करने में किसी को नहीं बख्शा है। स्विट्जरलैंड इसका उदाहरण है। जी-हुजूरी के बाद भी उसे ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ा है। अमेरिका ने स्विट्जरलैंड पर 32% टैरिफ लगाया है। जबकि स्विट्जरलैंड गोल्ड रिफाइनिंग में अमेरिका की बड़ी मदद करता रहा है।
सुपरपावर अमेरिका की मदद करने वाला एक देश अब मुश्किल में पड़ गया है। अमेरिका की चमचागिरी में उसने अपने हाथ जला लिए हैं। जी-हुजूरी के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसे नहीं बख्शा है। समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को सोने का निर्यात करने के कारण स्विट्जरलैंड परेशानी में फंस गया है। पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड से आयातित सामानों पर 32% टैरिफ लगा दिया। यह टैरिफ यूरोपीय संघ (ईयू) के 20% टैक्स से भी ज्यादा है। इसका स्विट्जरलैंड सरकार ने कड़ा विरोध किया है। इसे बेहद शर्मनाक बताया है। स्विट्जरलैंड को उम्मीद थी कि अपनी नीतियों और ईयू से दूरी के चलते उसे अमेरिका से इनाम मिलेगा। लेकिन, ट्रंप ने उसकी गलतफहमी को दूर कर दिया।
सोना रिफाइन करने का सेंटर है स्विट्जरलैंड
अब यह समझते हैं कि स्विट्जरलैंड के पास अमेरिका को सोने की ईंटें भेजने की क्या वजह थी। दरअसल, स्विट्जरलैंड दुनिया का सोना रिफाइन करने का केंद्र है। स्विट्जरलैंड में दुनिया की सबसे बड़ी सोना रिफाइनिंग कंपनियां हैं। इनमें वैलकैंबी, पैम्प और मेटालोर जैसी दिग्गज शामिल हैं। ये कंपनियां सोने को बहुत हाई क्वालिटी (99.99%) में शुद्ध करती हैं। अलग-अलग देशों से कच्चा या अशुद्ध सोना लाकर उसे 99.99% शुद्ध सोने की ईंटों में बदला जाता है।
कैसे अमेरिका को मिल रही थी मदद?
अमेरिका में खास आकार की सोने की ईंटों की डिमांड है। अमेरिका में ज्यादातर सोने के लेनदेन 100 औंस (लगभग 3.1 किलो) की ईंटों में होते हैं। यूरोप और बाकी देशों में सोने के स्टैंडर्ड अलग हैं। मसलन, 400 औंस की ईंटें। लिहाजा, जब अमेरिका में 100 औंस की ईंटों की मांग बढ़ती है तो पुराने बड़े आकार के सोने को स्विट्जरलैंड भेजा जाता है। वहां उसे पिघलाकर नए आकार में ढालकर फिर अमेरिका भेजा जाता है।
जब भी दुनिया में आर्थिक संकट या अनिश्चितता बढ़ती है तो बैंक, निवेशक और गोल्ड ईटीएफ फंड बड़ी मात्रा में फिजिक गोल्ड खरीदते हैं। इन निवेश के लिए साफ-सुथरी, स्टैंडर्ड क्वालिटी की सोने की ईंटों की जरूरत होती है। ये स्विट्जरलैंड में बनती हैं।
भारी भरकम टैक्स लगाने के बाद दुनिया में सोने की मांग स्विट्जरलैंड के बाहरी व्यापार डेटा को बिगाड़ देती है। ऐसे में सोने के आधार पर दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा या लाभ को सही तरीके से नहीं समझा जा सकता।

