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 *इत्ती एक नम्बर सलाह दी थी, माने नी साब*

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सब जानते हैं कि भूरा काका ट्रम्प नोबल शांति पुरस्कार के लिए मरे जा रिया है। इस बीच इज़राइल ने ईरान को फुस्सी बम समझ के उस पे चढ़ाई कर दी। लेकिन असली ड्रायफ़्रूट खाने वाले ख़ौमेनी ने भी जवाब में मिसाइलें फोड़के नेतान्याहू को बताया कि भिया हमें ग़ाज़ा मती समझो। अब भूरा काका को क़ायदे से समझाना था ईरान -इज़राइल को ट्रेड-व्रेड की धमकी देकर … लेकिन भूरा काका जानबूझके सूम काट गया कि इज़राइल के थोड़े कस-बट्टे निकल जान दो पहले … इधर ईरान जब थोड़ा चौड़ा होने लगा तो मजबूरन अपनी विश्व के दादा की इमेज बचाने के लिए भूरा काका को ईरान पर हमला करना पड़ा तीन जगह। लेकिन इससे भारत-पाकिस्तान का युद्ध रुकवाने वाले कि छबि बिगड़कर नोबल पुरस्कार के चांस धूल होने लगे तो भूरा काका ने तुरपाई करने के लिए बड़े-बड़े इस्क्रिप्ट राईटर होन बुलवाए। उन लोगों ने दिमाग़ लगा-लुगु के ये जोड़ लगाया कि विश्व में स्थायी शांति के लिए ज़रूरी है कि मुस्लिम कट्टरता वाले देशों के पास न्यूक्लीयर बम रेंवेई नी, इस इसलिए अपने महान दूरदर्शी ट्रम्प ने ईरान के सिर्फ़ परमाणु ठिकानों पर बम फोड़े, बाक़ी तो अमेरिकी सैनिक ईरान जाकर भी ईरानी चाय पीने तक के लिए भी रुके नहीं, सिद्धे वापस घर आ गए। 

अब सब ठीक हो रहा था कि खोमैनी का खाया हुआ च्यवनप्राश फिर ज़ोर मारने लगा और उसने कुवैत में अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइलें छोड़ दीं। इससे सारी दुनिया को चिंता हुई कि अब अमेरिका ईरान पर और बड़ा हमला करेगा … लेकिन ….आपके #आलोक_बाजपेयी_कहिन को पहले से ही पता था कि भूरा काका नोबल पुरस्कार पाने के लिए अब शांति -शांति खेलेगा। इसीलिए अपन ने मोदीजी को सलाह दी कि आप तो झट ट्वीट कर दो कि मेरे समझाने पर ईरान-इज़राइल और अमेरिका तीनों सीज़ फ़ायर के लिए मान गए हैं और युद्ध अब और नी बढ़ेगा। लेकिन साहब हम लोगों की सुनते कहाँ हैं, सो माने नी … उधर भूरा काका के तुरपाई करने वालों को फिर बुलवाया और उन ने नया ठेगड़ा लगा दिया कि ईरान ने हमको पहले से बताकर मामूली हमला किया, 14 राऊ में बनी मिसाइलें छोड़ीं जिनमें से 13 हमने हवा में ही फुस्स कर दीं और एक चूँकि जा ही ग़लत डायरेक्शन में रही थी तो अपन ने उसे जाने दिया। भूरा काका ने साथ में जोड़ दिया कि ख़ौमेनी मियाँ का “बदला” भी हो गया, हमारा भी कुछ नहीं बिगड़ा, इसलिए अब बदले की कार्यवाई कुछ नहीं होगी। ईरान तुम भी शांत रहो, इज़राइल तुम भी शांत रहो और हमें भी अपने घर शांति से सोचने दो कि नोबल पिराइज आख़िर किस तरह सजा कर रखेंगे। मतलब अब आप भारतीय टीवी चैनलों की भड़काऊ भाषा पर मत जाओ … भूरा काका ईरान पर जवाबी हमला नहीं करेगा बल्कि ईरान -इज़राइल के सीजफ़ायर का श्रेय भी ख़ुद लेगा। अब काश कि साहेब अपनी बात मानकर शाम को ही ट्वीट करके घोषणा कर देते ईरान -अमेरिका – इज़रायल के सीज़ फायर की … !! अपना स्कोर बराबर भी हो जाता और नोबल पुरस्कार भी भूरा काका के हाथ से फिसलकर अपने यहाँ आ जाता। पर साहेब अपनी बात मानते कहाँ हैं …

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