राहुल गांधी पर ईडी की कार्यवाही में छत्तीसगढ़ कनेक्शन के क्या हैं मायने?*
*विजया पाठक, सम्पादक, जगत विजन*
राहुल गांधी पर ईडी द्वारा की जा रही कार्यवाही के पीछे छत्तीसगढ़ कनेक्शन की बात उठ रही है और इसके पीछे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम आ रहा है। दरअसल राहुल गांधी पर ईडी की कार्यवाही की सच्चाई समझने के लिए हमें कुछ साल पीछे चलने की जरूरत है। छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह की सरकार थी। उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनी को प्रदेश में तीन कोयला जिसमें से दो खदान के माइन डेवलपर कम ऑपरेटर (MDO) हैं उनकी आवंटन करने की प्रक्रिया चल रही थी। खदानें आवंटित भी हो गई लेकिन एनओसी नहीं मिलने के कारण खदानें चालू नहीं हो पायी थी। एनओसी मिलती इससे पहले रमन सरकार चली गई और इसी बीच प्रदेश में भूपेश बघेल की सरकार बन गई। भूपेश सरकार में इन तीन खदानों के आवंटन को लेकर अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर खूब विरोध प्रदर्शन हुए। स्थानीय स्तर पर भी कई स्वयंसेवी संगठनों में विरोध किया। लेकिन लगभग तीन साल बाद 2022 में भूपेश सरकार ने तमाम बाधाओं को दूर करते हुए और तमाम विरोधों के बाद अडानी ग्रुप को हसदेव क्षेत्र की तीन कोयला खदानों पर कार्य करने की अनुमति दे दी है। आप को बता दें कि इन खदानों को आवंटित करने का विरोध राहुल गांधी ने भी किया था। पर भूपेश बघेल ने राहुल गांधी की बात को भी नहीं माना। वर्तमान में इन खदानों पर ग्राम पंचायत द्वारा रोक लगाई गई है। हो सकता है कि आने वाले समय में इन खदानों का आवंटन खतरे में पड़ सकता है।
राहुल गांधी का हसदेव कोयला खदान को अडानी को आवंटित न करने की बात करना और भूपेश बघेल को एनओसी न देने की बात कही। राहुल गांधी ने 23 मई 2022 को लंदन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में युवाओं से बातचीत के दौरान हसदेव जंगल कटाई के बारे में प्रश्न पूछने पर उन्होंने कहां कि उन्हें अपनी पार्टी के हसदेव कोयला विस्तार योजना पर दिक्कत है। बस बीजेपी को राहुल गांधी का यही विरोध नागवार गुजरा। यही वह समय था जब राहुल गांधी को बीजेपी सरकार ने ईडी के माध्यम से परेशान करने का चक्रव्यूह रचा। भूपेश बघेल ने भी कई मौकों पर राहुल गांधी के विरोध की बातें कहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक 13 मई 2022 को गृहमंत्री अमित शाह से भूपेश बघेल से हुई मुलाकात में इन्होंने इशारे से मामले में राहुल गांधी के वीटो होने की बात कह दी। इसी से राहुल गांधी के खिलाफ शायद ईडी का चक्रव्यूह रचा गया। इससे पहले भी 22 अक्टूबर 2021 को भूपेश बघेल ने अमित शाह से मुलाकात की थी। दरअसल ईडी तो बहाना भर है इससे राहुल गांधी को बैकफुट पर करने का बस एक तरीका है और यह पूरा खेल परदे के पीछे बैठकर भूपेश बघेल रच रहे हैं। भूपेश बघेल और इनकी चौकड़ी के 03 सदस्य के मामले सुप्रीम कोर्ट, ईडी के पास विचाराधीन हैं और केंद्र कभी भी इनकी गर्दन मरोड़ सकती है। पर केंद्र सरकार की भूपेश पर मेहरबानी पिछले साढ़े तीन साल से मिली हुई है वरना यह अभी जेल में होते। यहीं कारण है कि आजकल सब जगह एक ही बात कहीं जा रही है कि राहुल गांधी पर ईडी की कार्यवाही में छत्तीसगढ़ कनेक्शन है।
पिछले दिनों भूपेश बघेल से दिल्ली में मीडिया वालों ने चर्चा करते हुए पूछा कि क्या अड़ानी के खदान को राहुल गांधी ने निरस्त करने को कहा था जिसके चलते ईडी की पूछताछ राहुल गांधी से हो रही है। इस सवाल को टालते हुये भूपेश बघेल ने कहा कि अड़ानी से भी बड़ी सरकार होती है। जबकि सभी जान रहे हैं कि अड़ानी केन्द्र सरकार में कितने बड़े व्यक्ति है और उनकी खदान को राहुल गांधी के कहने पर निरस्त करने की बात कही जा रही है।
*कांग्रेस विधायकों को दिल्ली बुलाने के पीछे की कहानी*
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सभी विधायकों को दिल्ली पहुंचने को कहा गया है। दरअसल इसके पीछे की कहानी कुछ अलग है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विदेश दौरे पर जाने वाले थे किंतु उन्हें केंद्र सरकार ने अनुमति नहीं दी। इसलिए वह विदेश दौरे पर ना जाकर दिल्ली के धरना प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। इससे पहले जब राहुल गांधी से पूछताछ हो रही थी तब भूपेश बघेल केवल अपने राजनीतिक सलाहकार और एक विधायक के साथ दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे थे। इन सब मामलों को देखकर तो यही लगता है इतिहास वापस दोहराने को है और गांधी परिवार पर कोई अपना ही पीठ पर खंजर मारेगा।
*अपने आप को पार्टी से उपर मानते हैं भूपेश बघेल*
आजकल वैसे भी भूपेश बघेल कांग्रेस में अपने बराबर किसी को नहीं समझते। बात पिछले साल की है जब टीएस सिंहदेव के खिलाफ करीब-करीब पूरी पार्टी को दिल्ली में कांग्रेस कार्यालय ले जाकर भूपेश बघेल जिंदाबाद के नारे लगवाए। दिल्ली मीडिया में राहुल, सोनिया प्रियंका की न्यूज आए ना आए पर भपेश बघेल पोस्टर ब्वॉय बने हुए हैं। उत्तरप्रदेश चुनावों में सबसे बड़े कट आउट इनके लगे थे। ऐसे कई मौकों पर उन्होंने पार्टी हाईकमान को नीचा दिखाया है।
*गांधी परिवार को करीबियों ने ही नुकसान पहुंचाया!*
इतिहास गवाह है कि गांधी परिवार के नेताओं को उनकी के करीबी ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। वही इतिहास अब वापस चरितार्थ होने जा रहा है पर इस बार किरदार अलग है। इसकी क्रोनोलिजी समझनी होगी। दिसंबर 2018 राहुल गांधी ने टीएस बाबा, चरणदास महंत और ताम्रधवज साहू की जगह भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया। तब छत्तीसगढ़ के पावर गैलरी में भूपेश के करीबी मुख्यमंत्री बनने के पहले कहते थे बस एक बार भूपेश मुख्यमंत्री बन जाए वो सबको पीछे छोड़ देंगे। आज करीब 3.5 साल बात सच होते भी दिख रही है। आज भूपेश बघेल से ज्यादा आर्थिक संसाधन वाले नेता पूरे कांग्रेस में नहीं है। इसके लिए वो सारी बातें-मुद्दे जो सरकार से विपक्ष में रहते लड़ते थे, उसकी उन्होंने तिलांजलि दे दी। अपने आसपास ऐसी चौकड़ी बनाई जिसने छत्तीसगढ़ लूट-लूट कर खोखला बना दिया। जिस अदानी को भाजपा सरकार में जी भरकर कोसा करते थे उनके काम इस नवा छत्तीसगढ़ में सबसे पहली प्रायरिटी में होते हैं, इसका सीधा अर्थ तो यह है कि भूपेश बघेल तब विपक्ष में रहते गलत थे या अब मुख्यमंत्री बनकर गलत है। प्रदेश में अवैध शराब टैक्स हो या अवैध कोयला टैक्स किसी भी क्षेत्र को लूटने में इन्होंने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। क्या भोले-भाले आदिवासियों का प्रदेश छत्तीसगढ़ को भूपेश बघेल पूर्णत: लूट लेंगे?

