खरगोन जिले के युवा किसान अंकित परिहार ने गुलाब की खेती को एक नए बिजनेस में बदल दिया. उन्होंने सरकारी योजना की मदद से गुलकंद बनाने की यूनिट शुरू की और अपना ‘आईजी गुलकंद’ ब्रांड तैयार किया. आज वे गुलकंद बेचकर हर साल करीब 9 लाख रुपए का कारोबार कर रहे हैं और गांव के 12 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. जानिए उनकी सफलता की पूरी कहानी.
यह कहानी है खरगोन जिले के बड़वाह क्षेत्र के ग्राम नांदिया के युवा किसान अंकित परिहार की, जिन्होंने खेती को एक नए तरीके से आगे बढ़ाया है. पहले वे अपने खेत में गुलाब की खेती करते थे और उसी से आय होती थी. लेकिन उन्होंने सोचा कि अगर खेती के साथ कोई प्रोसेसिंग का काम शुरू किया जाए तो आमदनी और बढ़ सकती है. इसी सोच के साथ उन्होंने गुलाब से गुलकंद बनाने का काम शुरू किया और आज यह उनका सफल कारोबार बन चुका है.
अंकित परिहार ने करीब 5 लाख रुपए की लागत से अपना छोटा फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू किया. खेत में उगने वाले गुलाब का उपयोग कर उन्होंने ‘आईजी गुलकंद’ नाम से अपना ब्रांड बनाया. धीरे-धीरे उनके उत्पाद की पहचान बनने लगी और बाजार में इसकी मांग भी बढ़ने लगी.
local18 से बातचीत में अंकित ने बताया कि, उन्हें इस काम में सरकार की योजना से भी मदद मिली. उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना का लाभ लिया. इस योजना के तहत उन्हें एचडीएफसी बैंक के माध्यम से करीब 4 लाख 46 हजार रुपए का लोन मिला. इसके साथ लगभग 1 लाख 73 हजार रुपए की सब्सिडी भी दी गई.
इस आर्थिक मदद से अंकित ने अपनी गुलकंद बनाने की यूनिट को तैयार किया. उन्होंने प्रोसेसिंग के लिए जरूरी उपकरण लगाए और पैकेजिंग की भी व्यवस्था की. इससे उनका काम व्यवस्थित तरीके से शुरू हो गया और उत्पादन भी बढ़ने लगा. अब वे अपने उत्पाद को ब्रांड के रूप में बाजार में बेच रहे हैं
अंकित परिहार अपने खेत में सुगंधित अजमेरी गुलाब की खेती करते हैं. यही गुलाब उनके गुलकंद बनाने के काम में उपयोग होता है. इसके अलावा वे आसपास के किसानों से भी गुलाब खरीदते हैं ताकि उन्हें भी फसल का अच्छा दाम मिल सके.
गांव के कई किसान अब उनके साथ जुड़े हुए हैं. वे अपने खेत में गुलाब उगाकर अंकित को बेचते हैं. इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर ही बाजार मिल जाता है और उनकी आय भी बढ़ रही है. इस तरह अंकित का उद्योग गांव के अन्य किसानों के लिए भी फायदा पहुंचा रहा है.
आज अंकित परिहार के गुलकंद उद्योग में हर महीने करीब 12 टन गुलकंद तैयार किया जा रहा है. बाजार में इसकी कीमत करीब 7 लाख 20 हजार रुपए तक पहुंच जाती है. खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने लगभग 80 हजार रुपए तक की शुद्ध कमाई हो रही है.
अंकित का ‘आईजी गुलकंद’ ब्रांड अब सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है. निमाड़ क्षेत्र के अलावा राजस्थान और महाराष्ट्र तक इसकी सप्लाई हो रही है. उनके इस उद्योग से करीब 12 लोगों को गांव में ही रोजगार भी मिल रहा है, जिससे कई परिवारों की आय का जरिया बना है.

