-सुसंस्कृति परिहार
आपको विदित ही होगा कि पिछले सालों में चीन द्भारा भारतीय सीमा पर अतिक्रमण की खबरें ना केवल मीडिया ने दी बल्कि वहां के सांसद और नागरिकों द्वारा बराबर खबरें सदन में उठाई जाती रही है। सर्वविदित है कि भारतीय सीमा से लगकर ना केवल चीन ने कालोनियां बनाई हैं बल्कि सड़क के ज़रिए हमारी सीमा में घुसकर अतिक्रमण बढ़ाता जा रहा है। हालांकि मोदीजी किसी दबाव वश सदैव यही सदन से बाहर कहते रहे हैं कि चीन ने हमारी एक इंच भूमि भी नहीं दबाई है।मतलब ये कि वहां के नागरिक एवं सांसद जो बात कह रहे हैं वे सब झूठी हैं। राहुल गांधी के भाषण की बात कुछ समय के लिए यदि गलत मान ली भी जाए तो नागरिकों एवं सांसद की बात को सभा में उठाना सच्चे देशभक्त ना होने की पहचान कैसे बन गया।

जब इस मुद्दे को राहुल गांधी ने उठाया तो उन पर एफआईआर हुई और हाल ही में राहुल गांधी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता की टिप्पणी को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या कोर्ट तय करेगा कि सांसद या विपक्ष के नेता क्या और कहां बोलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 4 अगस्त को नेता विपक्ष राहुल गांधी पर कड़ी टिप्पणियां कीं। राहुल गांधी ने चीन द्वारा भारतीय जमीन कब्जाए जाने को लेकर सवाल किए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनके बोलने पर ही सवाल उठा दिया। सवाल पूछने का अधिकार खतरे में है। मजे की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने सवाल पूछकर सवाल पूछने के अधिकार को ख़तरे में डाला है। उनकी तुलना बिकाऊ मीडिया और अंधभक्तों से कैसे की जा सकती है।राहुल गांधी प्रतिपक्ष के नेता हैं और उन्हें अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है। अदालत की यह सलाह और उनको फटकार किसी भी हालत में सही नहीं है।लगता है कि जज महोदय ने यह बात भी दबाव में आकर कहीं है। टोटली यह बात आम नागरिकों के मौलिक अधिकार के साथ प्रतिपक्ष की मुख्य आवाज़ दबाने की एक बड़ी साज़िश प्रतीत होती है।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व कानून और राजस्व मंत्री रहे सुब्रमण्यम स्वामी लंबे समय से लद्दाख में चीन की ओर से घुसपैठ का मुद्दा उठाते रहे हैं। सुब्रमण्यम स्वामी ने 28 जुलाई, 2024 को सोशल मीडिया के जरिए सवाल उठाया कि नरेंद्र मोदी सरकार उनका क्यों विरोध कर रही है?एक्स पर बीजेपी नेता ने लिखा- “निर्विवाद लद्दाख में 4064 वर्ग किमी पर चीन के हालिया कब्जे की सच्चाई जानने से उन्हें रोका जा रहा है। बीजेपी नेता ने सवाल उठाया कि उन्हें चीनी कब्जे से जुड़ा सच जानने से रोकने के लिए मोदी सरकार अदालत में विरोध क्यों कर रही है?”
सुब्रमण्यम स्वामी ने एक्स पोस्ट में आगे लिखा, ” लोगों को जानने का अधिकार है, जबकि कांग्रेस पार्टी यह मुद्दा नहीं उठा रही है। बीजेपी नेता के मुताबिक, ‘कांग्रेस केस इसलिए नहीं उठा रही क्योंकि गांधी परिवार का चीन से समझौता है। क्या डील में नरेंद्र मोदी हैं?
और जब इस मुद्दे को उठाया गया तो।हश्र सामने है। नरेन्द्र मोदी ने सदन में इस सम्बन्ध में एक शब्द नहीं बोला ना ही उनकी पार्टी ने तब सुब्रमण्यम स्वामी पर कोई कार्रवाई की।ये सब कानून प्रतिपक्ष उनके नेता उनके पश्रधर पत्रकार,लोककवि,लेखक, कार्टूनिस्ट, कलाकार पर ही क्यों लागू होते हैं।आए दिन एफआईआर इनके खिलाफ होती रहती है।ये सब इस बात के पुख्ता संकेत हैं कि फासिस्ट सरकार की नज़र में सिर्फ सरकार के विरोध में लिखने वाले , आंदोलनकारी लोग खटकते हैं।अब तो अदालतें भी फासिस्ट की तरह व्यवहार करने लगीं हैं।
वरना सुब्रमण्यम स्वामी जैसे भाजपा के सांसद द्वारा खुलकर अनगिनत कितने सरकार विरोधी बयान लगभग प्रतिदिन दिए जा रहे हैं उन्हें कोई चुनौती नहीं देता। क्या एक सांसद का यह व्यवहार अक्षम्य है।
ज़रा इस बात पर भी गौर फरमाएं जज महोदय अरुणाचल के लोग, वहां के सांसद, वहां के जनप्रतिनिधि जो कह रहे हैं वह गलत है? गलवान से स्थानीय लोगों ने जो कुछ जानकारियां साझा की हैं क्या वे इस बात की पुष्टि नहीं करती कि चीन भारत की जमीन हड़प रहा है? क्या डोकलाम और गलवान में जमीन हड़पने की चीनी कोशिश नहीं हुई और क्या भारतीय सेना ने उन कोशिशों को विफल नहीं किया।सुप्रीम कोर्ट ने ‘सच्चा भारतीय’ को लेकर भी नेता प्रतिपक्ष को अपमानित किया है।
कुल मिलाकर, चीन द्वारा अतिक्रमण की बात करना विरोधियों के लिए खतरनाक हो रहा है जो सरकार में हैं उनसे इल्तिज़ा है यदि वे सच्चे भारतीय हैं तो इस मुद्दे को गर्माएं ,सदन में उठाएं अन्यथा जैसे अमरीका के आगे सरकार घुटने टेक रही है वैसा ही हाल चीन कर देगा।तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। याद आ रहे हैं फिर भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी जिन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने राफेल डील, मनोहर पर्रिकर की मौत, हरेन पांड्या केस, और एस. जयशंकर की नियुक्ति जैसे मुद्दों की पोल खोली है उनका दावा है कि पाकिस्तान ने 5 जेट गिराए हैं और मोदी सरकार को अमेरिका-चीन के पास मौजूद गुप्त दस्तावेजों से डर है।
क्या अदालत इन सांसद महोदय की बात पर संज्ञान लेगी।जो देश के प्रधानमंत्री पर सरासर कई इल्जाम सरे आम लगा रहे हैं उनसे वे गुप्त दस्तावेज ही मांग लीजिए जिनका डर हमारे प्रधानमंत्री को सता रहा है।यह भी बताया जाए कि सुब्रमण्यम स्वामी सच्चे भारतीय हैं या नहीं।