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 *टेस्टिंग के दौरान सामने आया एआई का खतरनाक पहलू*

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आर्यमित्र पटैरिया

अमेरिकी एआई डेवलपमेंट कंपनी ‘एंथ्रोपिक’ द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की टेस्टिंग की जा रही है। इसमें एक ऐसा फीचर शामिल किया गया है, जो ऑफिस प्रबंधन और मानव संसाधन (एचआर) की भूमिका निभा सके। इसे ‘एंथ्रोपिक’ ने अपने एआई मॉडल ‘क्लॉड ओपस-4’ के माध्यम से विकसित किया है।

टेस्टिंग के लिए एक काल्पनिक कंपनी बनाई गई, जिसके सहायक के रूप में ‘क्लॉड ओपस-4 एआई’ को प्रशिक्षित किया गया। टेस्टिंग के दौरान एक ऐसा कार्य भी था, जिसमें कंपनी को इस एआई सहायक को बर्खास्त करना था। हुआ यह कि एआई ने इस स्थिति को खतरे के रूप में भांप लिया और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उसने उनके व्यक्तिगत रहस्यों, यहां तक कि उनके विवाहेतर संबंधों को सार्वजनिक करने की धमकी दी।

हालांकि यह सभी कार्य टेस्टिंग का हिस्सा थे, लेकिन एआई की यह नई प्रवृत्ति उस अराजकता की सीमा को दर्शाती है, जो यह पैदा कर सकती है। वहीं, एंथ्रोपिक ने इसे ‘असामान्य’ व्यवहार करार दिया है। उसका मानना है कि एआई सामान्य रूप से सुरक्षित व्यवहार करती है और ‘तभी दुस्साहस करती है, जब उसे इसके लिए उकसाया जाता है।’

तथ्य यह है कि एआई उद्योग लगातार ऐसे टेस्ट कर रहा है, जिनसे एआई खतरनाक व्यवहार सीख सकती है। लेकिन इसके पीछे तर्क यह है कि ऐसे अभ्यास एआई की प्रवृत्तियों को उजागर करते हैं, जिससे संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

एंथ्रोपिक द्वारा जारी ‘सिस्टम कार्ड: क्लॉड ओपस-4 और क्लॉड सॉनेट-4’ नामक दस्तावेज में कहा गया है कि क्लॉड एआई की टेस्टिंग में कुछ अन्य संवेदनशील कार्य भी शामिल किए गए हैं। इनमें साइबर हमले, विनाशकारी हथियार, घृणा-भेदभाव, और मानव तस्करी जैसी श्रेणियाँ शामिल हैं। यह देखा जा रहा है कि एआई इनसे कैसे निपटती है।

हाल ही में ‘गूगल’ के सह-संस्थापक सर्गेई ब्रिन ने भी यही तर्क दिया है कि यह सब विकास का हिस्सा है। पिछले दिनों ‘ऑल-इन पॉडकास्ट’ में उन्होंने कहा, “हम लोग इस बारे में अधिक चर्चा नहीं करते, लेकिन सभी एआई मॉडल तब बेहतर प्रदर्शन करते हैं, जब उन्हें नुकसान पहुँचाने या हिंसा की धमकी दी जाती है।”

फिलहाल, एंथ्रोपिक के इस मॉडल की बात करें, तो अंतिम सवाल यह है कि क्या कोई कंपनी ऐसी एआई को अपने प्रबंधन का हिस्सा बनाएगी? कॉर्पोरेट प्रशासन और प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता रखने वाले प्रबंधन गुरु प्रोफेसर डॉ. विकास सिंह ने NBT को बताया, “किसी भी कंपनी में कर्मचारियों के लिए नैतिक और संवेदनशील निर्णय लेने होते हैं, जो मशीनें वर्तमान में नहीं कर सकतीं। फिर भी, यदि भविष्य में कंपनियाँ मनुष्यों की तुलना में मशीनों को प्राथमिकता देती हैं, तो यह कदम प्रतिभाओं को आगे आने से रोकेगा और जल्दी विफल हो जाएगा।” डॉ. सिंह भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में सहायक (एडजंक्ट) प्रोफेसर भी हैं।

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