अग्नि आलोक

*यकीनन,तुम आग से खेलने वाले सूरज हो!*  

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-सुसंस्कृति परिहार 

प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने पिछले दिनों जब यह कहा कि वे आग से खेल रहे हैं और उन्हें इस आग में ही समा जाना है तो पुरानी फिल्म हरिश्चन्द्र तारामति में प्रदीप का गीत स्मरण हो आया जिसे हेमंत कुमार ने गाया है।इस गीत में वे सूरज से जलते रहने की तमन्ना करते हैं।गीत में उन्होंने सूरज को “जगत कल्याण के लिए” जलते रहने का संदेश दिया है, भले ही उसे “भस्म” होना पड़े।आज राहुल गांधी भी इस पथ के राही हैं बचपन से ही युवावस्था तक उन्होंने अपनी दादी इंदिरा जी और पिता राजीव गांधी जी की असामयिक हत्या से मृत चिताओं की आग के ताप को हृदय में समाया है।

फिर मां के साथ वर्तमान सरकार के अमानवीय ताप को भी उन्होंने वीरता पूर्वक सहा है।जब वे समझदार हुए तो उन्होंने यह पाया कि जिस देश के निर्माण में नेहरू, पटेल, आज़ाद, इंदिरा,राजीव अटल और मनमोहन सिंह जैसे हज़ारों लोगों ने अपनी अहम् भागीदारी निभाई आज उस देश को बर्बाद करने वे ही लोग सक्रिय हैं जिन पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या का इल्ज़ाम है।वे देश की तहजीब और पहचान मिटाने , हिंदू मुस्लिम कर नफ़रत से देश के समूल नाश की ओर बढ़े चले जा रहे हैं।देश की दुर्दशा के गहन ताप को अंगीकार करते हुए राहुल ने इस गहन अन्धकार से निजात दिलाने सचमुच सूरज की तरह जलना और दुनियां को नई रोशनी देने का संकल्प लिया है। आज राजनीति की सत्ता लोलुपता के बीच वे एक संत की तरह उन ताकतों से लोहा ले रहे हैं जो गांधी जैसे महामना के हत्यारों के वंशज हैं।

एक लगभग राजसी वैभव वाले परिवार से आए पंडित  जवाहरलाल नेहरू ने अपने इलाहाबाद स्थित आनंद भवन को देश के सुपुर्द किया। लोकतांत्रिक गणराज्य के वे साधारण प्रधानमंत्री बने।उनके परिवार के सभी सदस्यों ने उसी परिपाटी को आज तक जीवित रखा है। राहुल गांधी के पास आज भी अपना मकान नहीं। उनकी मां सोनिया गांधी भी अपना मकान नहीं बना पाईं।कहने का आशय यह कि जिसे देशभक्ति का दीवाना कहते हैं वह जज़्बा भगत सिंह के बाद  राहुल में देखने मिल रहा है।

वे अध्ययन शील भी हैं उन्होंने भारत यात्रा के दौरान देश के नागरिकों की असलियत को जाना है गाहे बगाहे वे भारतीय संस्थानों और विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों के कामगारों से मिलकर उनके काम की अनुभूति कर उनकी तकलीफ समझने की कोशिश करते हैं। वे अपने गहन अध्ययन और राजनैतिक अनुभवों से भविष्य के ख़तरे भी समय समय पर बताते रहे हैं ताकि देश मुसीबतों से दूर रहें।

किंतु संघी पाठशाला से निकले वर्तमान हुक्मरानों ने आज देश को एक सुलगते हिंदुस्तान में बदल दिया। जिसका हर क्षेत्र में अपना असर हो चुका है।एक मजबूत और विकसित देश आज तो अपनी सम्प्रभुता भी खोने तैयार बैठा है। देश की लगभग सभी संस्थाएं, जिनमें बहुतेरे नेता,सांसद, विधायक और मीडिया तक पर जहां बिकाऊ होने का ठप्पा लग चुका हो।इतने गहरे संकटापन्न भारत में जहां बहुसंख्यक लोग भी आज दहशत के साए में चुप साध लिए हों। ऐसे में जान पर खेलता नेहरू गांधी परिवार का इकलौता चिराग आज सूरज सी दमक और चमक लिए आश्वस्त कर रहा है कि वह आग से खेल रहा और अंत में आग में समा जाएगा।जो प्राकृतिक सत्य है।

देश को समर्पित इस परिवार का राहुल अपने पुरखों से बिल्कुल अलहदा व्यक्तित्व का है।उसने अपनी राह खुद चुनी और बनाई है।यह मुश्किलात भरी इसलिए है कि वह आज लोकतांत्रिक आवरण ओढ़े,छल छद्म से बनी मनुवादी सरकार से टकरा रहा है ।जो मठाधीश बनाकर सरकार चला रहे हैं।अपने पर मुसीबतों का अब कहर देखते हुए सरकार में जो लोग महात्मा गांधी की तरह राहुल गांधी के सच से  आहत हैं वे उनके जीवन के लिए खतरनाक हो सकते हैं।

राहुल निर्विकार भाव से सूरज की तरह हर घर में रोशनी बिखेरने की कोशिश में लगे हैं। मनुवादी जिन दो शब्दों धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद के  खिलाफ वे उनकी ही मज़बूती के लिए आग से खेल रहे हैं। याद रखिए आग में तपकर ही सही सोने की परख होती है।अब ये हम सब के हाथ हैं इस निखरते सोने की रक्षा हम कैसे करेंगे।खतरे बड़े हैं किंतु, चूंकि सच उनके साथ है वे परास्त हो ही नहीं सकते। यह देश सत्य , अहिंसा और प्रेम शांति की भावनाओं से लबरेज़ है।देर से ही सही देश बचाने की स्थितियां प्रबल हैं फिर राहुल जैसे दृढ़ निश्चयी देशभक्त का साथ है। वाकई राहुल हैं तो समस्याओं के हल भी हैं।

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