अग्नि आलोक

 *राजनारायण के पुत्र  राधेमोहन सिंह का देहावसान*

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उमेश प्रसाद सिंह 

वाराणसी। केंद्र सरकार के पूर्व मंत्री रहे लोकबंधु राजनारायण के ज्येष्ठ पुत्र राधे मोहन सिंह उर्फ कल्लन बाबू (83 वर्ष) का शुक्रवार को तड़के सुबह एक निजी चिकित्सालय में निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे।

राजनीति के औघड़  राजनारायण  जी के पुत्र  राधेमोहन सिंह  जी उर्फ मोहन जी का देहावसान ।               भारतीय  राजनीति के 1970  से 1980  तक की राजनीति जिस अजातशत्रु  राजनेता के इर्दगिर्द  घूमती रही ; जिस कालखण्ड  को मैं ” राजनारायण  कालखण्ड  कहता हूॅ ; इतिहास  भले उस कालखण्ड  को”जेपी कालखण्ड  “कहता रहे; वे राजनारायण  जी थे ; जिधर मुड़े ; इतिहास  पीछे चलने को वाध्य था। सबके विरोध के बावजूद  उन्होंने इन्दिरा गाॅधी के विरूद्ध  चुनाव  लड़ा ; जैसे उनके गुरू डाक्टर राम मनोहर  लोहिया ने जब सारी बुराईयों की जड़ जवाहरलाल  नेहरू को मानकर 1962 में फूलपुर  में टक्कर दी थी; राजनारायण  जी लड़े और हारे? लेकिन  मधुलिमये  वगैरह के विरोध के बावजूद इलेक्शन  पिटीशन इलाहाबाद  उच्च न्यायालय  में दायर किया। जिसकी शुरुआत  पैरवी बिहार  के संसोपा नेता और वकील प्रण्व चटर्जी करते रहे और उनके साथ अविनाश  कुमार  , संसोपा कार्यकर्ता  मुंगेर  ; जो राजनारायण  जी के चुनाव  अधिकारी भी होते थे; वे कागजों का थैला पकडे इलाहाबाद  प्रण्व  जी के साथ  जाते थे। 

अंतिम  बहस में शांतिभूषण  जी बहस में रखे गये थे। यहाॅ राजनारायण  जी ने इन्दिरा जी को पटखनी दे दी ; अपनी कुर्सी बचाने के लिए  इन्दिरा जी ने संविधान  में संशोधन से लेकर  आपातकाल  लगाया। वे राजनारायण  जी ही थे जिन्होंने मोरारजी को प्रधानमंत्री बनाया – हटाया और चरण सिंह  को भी प्रधानमंत्री बनाया। फिर बाद  का इतिहास  सामने है।

             ऐसे महान शख्सियत  का परिवार  किस हालत में रहा ; देश नहीं जानता है। सारे देश में वंशवादियों की ही चल रही है। कोई दल आज अछूता नहीं है।             राजनारायण  जी के चारपुत्र और एक पुत्री है।  एक बडे पुत्र  भुवनेश्वर  कुमार  की मृत्यु युवा अवस्था में बीमारी से हो गयी थी।

                तीसरे पुत्र  जयप्रकाश  जी प्रयागराज  नगरपालिका में कार्यरत थे ; वे वहीं  घर बनाकर  रह रहे थे। अब वे भी नहीं है।                  दूसरे पुत्र  राधेमोहन  सिंह  गाॅव में रहकर खेती कर रहे थे। कुछ  बहकावे में आकर वे भाजपा में चले गये थे ; लेकिन  भाजपा अपने स्वभाव  के अनुसार  उपयोग करना चाहती थे; वे ऐसा नहीं  कर सके तो फिर  कोई नहीं  पूछा? अभी उन्हीं  की मृत्यु  हुई  है। समाजवादी परिवार  गमगीन है। 

          एक सबसे छोटे पुत्र  जो बच रहे है ; बैक की सेवा से सेवानिवृत्त  होकर  वाराणसी में मकान बनाकर  रह रहे है।                एकमात्र  पुत्री सावित्री जी की शादी आजमगढ  में हुई  है ; वे वहीं रहती है।

उनके पैतृक आवास की ओर जाने वाली मोतीकोट-मोहनसराय मार्ग पर भी लोगों ने एकत्र होकर श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि देने वालों में क्षेत्र के सम्मानित नागरिक, किसान, अधिवक्ता एवं विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेता शामिल रहे।

बाबू राधे मोहन सिंह के निधन पर एम.एल.सी. धर्मेंद्र सिंह, अमरेश्वर नारायण सिंह, शार्दुल विक्रम चौधरी शीलू, तहसील बार संगठन राजातालाब के पूर्व अध्यक्ष सर्वजीत भारद्वाज, सुनील सिंह, छेदी यादव, पूर्व महामंत्री प्रदीप सिंह, अधिवक्ता प्रमोद सिंह, गौरव उपाध्याय, नीरज पांडेय, कौशल राय, मयंक मिश्र, संजय सिंह, अरविंद सिंह, अखिलेश गुप्ता, अभिषेक गुप्ता, प्रेम नारायण पटेल सहित सैकड़ों सम्मानित लोग उपस्थित रहे।

                राजनारायण  जी के जीवनीकार मित्र  शाहनवाज कादरी भाई से बात कर उस परिवार का समाचार  लिया।              उस परिवार  पर आये संकट में हमारी भी संवेदना है और राधेमोहन जी को विनम्र   श्रद्धाॅजलि।

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