अग्नि आलोक

मज़लूम के हक़ की लड़ाई लड़ने वाला ही असली हीरो है. पर्दे पर नाचने वाला नहीं.

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“बिलकिस बानों हमें माफ करो” का पोस्टर छाती में लटकाए लगाए हवाई चप्पल और खादी के कुर्ता पायजामा में गोधरा में पदयात्रा कर रहें ये संदीप पांडेय जी हैं. उन्हें पुलिस ने गुजरात में गिरफ्तार कर लिया था,अब फिर निकल पड़े हैं बिलकिस की  आवाज बुलंद करने,उनके दोषियों के रिहाई के विरोध में.सर से विनायक सेन की गिरफ्तारी के दिनों में छत्तीसगढ़ में मुलाकात हुई थी.जब वे अनशन पर बैठ गए थे रमन सरकार के खिलाफ. बाद में मेरे पते पर सर लखनऊ से डाक से लेख भेजते रहें.वे स्कूल चलाते थे,मोबाइल नहीँ रखते हैं.2002 का रेमन मैग्सेसे पुरस्कार उन्हें मिला है.मैं उनसे बेहद प्रभावित हुआ और आज तक उनके लिए मेरे मन में बेहद इज्जत है.जब भी वे कोई अन्याय देखते हैं इसी तरह जमीन पर नजर आते हैं.ये आज के गांधी ही हैं.उनके बारे में एक लेख न्याय करता हुआ अजीत साही जी ने लिखा है पढ़िए.

अपने असली हीरो को पहचानिए.ये हैं संदीप पांडे.

संदीप भाई उसी उम्र के हैं जिस उम्र के शाहरुख़ ख़ान, सलमान ख़ान, आमिर ख़ान हैं.

लेकिन संदीप भाई बाल नहीं रंगते. संदीप भाई बोटोक्स के इंजेक्शन नहीं लगाते.

संदीप भाई आईआईटी बीएचयू से पढ़े इंजीनियर हैं. उन्होंने अमेरिका की जानीमानी यूनिवर्सिटी ऑफ़ बर्कले से अप्लाइढ फ़िज़िक्स में पीएचडी की है. उन्होंने विज्ञान की किताबें लिखी हैं. उनकी रिसर्च की लोग आज भी दाद देते हैं. वो चाहते तो अमेरिका में रह कर आज बड़ी से बड़ी नौकरी कर रहे होते और करोड़ों डॉलर हर साल कमा रहे होते.

लेकिन पच्चीस साल पहले संदीप भाई ने अमेरिका त्याग दिया. खादी पहनाना शुरू किया और भारत लौट कर गाँव गाँव जाकर समाज सेवा का काम शुरू किया. संदीप भाई को मैंने तीन साल पहले अमेरिकी संसद में भाषण देने बुलाया था. जब एयरपोर्ट पर लेने पहुँचा तो वो हवाई चप्पल और खादी का कुर्ता-पायजामा पहन कर ही अमेरिका आए. और उसी लिबास में अमेरिका की संसद में तक़रीर की.

कल गुजरात के गोधरा में पुलिस ने उनको हिरासत में ले लिया. लेकिन वो निडर हैं. वो गोधरा गए हैं बिल्किस बानो के समर्थन में पदयात्रा करने.

अपने असली हीरो पहचानिए.

मज़लूम के हक़ की लड़ाई लड़ने वाला ही असली हीरो है. पर्दे पर नाचने वाला नहीं.

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