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आंदोलन का 1560 वाँ दिन

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साथियों ! आज हमारे देश में क्या होना चाहिए ?और क्या हो रहा है ? बोला क्या जा रहा है ? और लिखा क्या जा रहा है? क्या किया जा रहा है ? शायद इसकी कल्पना करना भी मुमकिन नहीं है !!! *विश्व गुरु,आत्मनिर्भर भारत बनाने के नाम पर खूब फेका जा रहा है और  देश की जनताओं  की बची खुची रोजगार ,बची खुची आशाऐं समाप्त की जाती हैं* ।
*आज बि.के. बिडला की कंपनी सेंचुरी ने 1993  से 2014 तक  अपनी तिजोरियों को भरने के लिए देश के अनेकों राज्यों से बुला बुला रोजगार देने के नाम पर 15 से 29 वर्ष तक खून  और जवानी को निचोड़कर गन्ने की छिलके  की तरह  फेंक दिया गया । अब उद्योगपतियों की तिजोरियां भरने के बाद  रोजगार को बंद करने के लिये कम्पनियों को गाजर मूली की तरह  कभी वेरिएट को, कभी मनजीत को ,कभी और किसी को फर्जी तौर पर खुब बेच रही है । और जो सरकार भारत को विश्व गुरु बनाने की बात कर रही है । वही सरकार उद्योग बंद करने  में शामिल रहती है* 
    जब मजदूरों की मजबूरियों पर कोई सुनवाई नहीं होने पर मजदूर आंदोलन को मजबूर होता है । लेकिन *उस वैद्य आंदोलन को भी जबरदस्त पैसों के बल पर अवैध करार और अतिक्रमण का आरोप लगाकर  हजारों पुलिस लगाकर पंडाल को उखाड़ फेंकवाती है ।* लेकिन सेंचुरी के मजदूर अपना हक लिए बगैर हटेंगे ! यह सोच  उनकी बहुत बड़ी भुल है ।
आज सेंचुरी के मजदूर 1560 दिनों से रोजगार बचाने की संघर्ष कर रहे हैं । शायद यह  *विश्व का सबसे बड़ा ,सबसे लंबा चलने वाला रोजगार बचाओ आंदोलन है* इस आंदोलन के दिनों को कम करना या रोकना बिड़ला जी पर है । *भगवान उनको सद्बुद्घि दे* ।            *जिंदाबाद*        *श्रमिक जनता संघ*

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