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19 साल की सुप्रीति का एथलेटिक्स में नैशनल रेकॉर्ड

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रवि सिन्हा, रांची :

 झारखंड की बेटी ने देश में राज्य का मान बढ़ाया है। गुमला जिले में घाघरा प्रखंड की बुरूहू गांव की रहने वाली 19 वर्षीय सुप्रीति कच्छप (Supriti Kachchhap) ने नेशनल रेकॉर्ड के साथ एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन किया है। 1-6 अगस्त तक कोलंबिया के काली में होने वाले अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर चुकी हैं। सुप्रीति कच्छप ने गुरुवार को खेलो इंडिया (Khelo India) के अंतिम दिन नेशनल रेकॉर्ड कायम करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया।

पिता की हत्या के बाद पूरा परिवार आर्थिक संकट से गुजरा

खेलो इंडिया यूथ गेम्स में इस सफलता और राष्ट्रीय रेकॉर्ड बनाने पर सुप्रीति कच्छप के चेहरे पर संतोष और मुस्कान जरूर नजर आ रही हैं, लेकिन इस सफलता के पीछे उसकी कड़ी मेहनत और संघर्ष की कहानी छिपी हुई है। जब सुप्रीति सिर्फ डेढ़ साल की थी, तो आर्युवेद चिकित्सक के रूप में ग्रामीणों की सेवा करने वाले सुप्रीति के पिता की नक्सलियों ने हत्या कर दी। इसके बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। सुप्रीति की मां ने उसे जारी प्रखंड के बुकरूडीपा प्रभात मिशनरी स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा के लिए नामांकन कराया। बाद में गुमला जिला मुख्यालय में चल रहे संत पातरिक्स स्कूल में सुप्रीति का एडमिशन हुआ।

एथलेटिक्स कोच की नजर पड़ी, तकदीर बदली

इस दौरान वर्ष 2015 में गुमला जिले में खेलकूद प्रतियोगिता में सुप्रीति कच्छप की मेहनत और क्षमता पर नजर एक ऐसे कोच की पड़ी, जिसने बाद में उसे तराशने का दायित्व अपने जिम्मे ले लिया। राज्य सरकार के एथलेटिक्स ट्रेनिंग सेंटर के कोच प्रभात रंजन तिवारी की नजर जब सुप्रीति पर पड़ी, तो उन्होंने मिशनरी स्कूल के प्राचार्य से ये आग्रह किया कि वे इस बच्ची को एथलेटिक्स प्रशिक्षण सेंटर में भेज दें, स्कूल के प्रिंसिपल ने भी सहमति जताई और यही से व्यवस्थित तरीके से सुप्रीति का प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ।

2018 से भोपाल स्थित साईं सेंटर में ट्रेनिंग का मौका

सुप्रीति ने एसजीएफआई में बेहतर प्रदर्शन के बाद 2017 में विजयवाड़ा में आयोजित जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में दूसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद सुप्रीति की नजर राष्ट्रीय स्तर के कोचिंग संस्थान के संचालकों पर नजर पड़ी। जिसके बाद भोपाल स्थित साईं सेंटर की ओर से आग्रह किया गया कि सुप्रीति को प्रशिक्षण के लिए भोपाल भेज दिया गया। जिसके बाद सुप्रीति को गुमला में प्रारंभिक प्रशिक्षण देने वाले कोच प्रभात रंजन तिवारी ने इस शर्त के बाद उसे भोपाल भेजने पर सहमति जताई कि भोपाल में वो उनके शेड्यूल पर ही प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। सुप्रीति भोपाल स्थित साईं सेंटर में ट्रेनिंग लेने लगी।

कोरोना काल में फिर बढ़ी मुश्किल

वर्ष 2020 में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण के खतरों के बीच जब सभी सेंटर बंद हो गए तो सुप्रीति भी वापस गुमला लौट आई। जिसके बाद गुमला में कोच प्रभात रंजन तिवारी ने अपने व्यक्तिगत खर्च पर सुप्रीति के लिए गुमला में रहने और खाने-पीने के साथ प्रशिक्षण के लिए आवश्यक इंतजाम कराया। हालांकि कोरोना काल में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद फिर से भोपाल में प्रशिक्षण शुरू होने पर सुप्रीति वहां जाकर ट्रेनिंग लेने लगी। अब आगामी अगस्त में कोलंबिया में होने वाले विश्व एथलेटिक्स प्रतियोगिता भी सुप्रीति के मेडल हासिल करने की उम्मीद है।

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